October 4, 2025

Bishnoi Sthapana Divash

Bishnoi Sthapana Divash 2025: बिश्नोई स्थापना दिवस

Bishnoi Sthapana Divash Kab Hai: बिश्नोई स्थापना दिवस सन् 1485 से कार्तिक कृष्णा अष्टमी को बिश्नोई संप्रदाय के द्वारा मनाया जाता है। इस संप्रदाय की स्थापना गुरु जम्भेश्वर जी ने की थी। Bishnoi Sthapana Divash बिश्नोई शब्द को विष्णु से लिया गया, जिसका अर्थ है विष्णु के अनुयायी। विभिन्न विचारों के अनुसार बिश्नोई संप्रदाय में 2 9 सिद्धांतों का पालन किया जाता है। Bishnoi Sthapana Divash बिश का अर्थ है 20(बीस) और नोई का मतलब 9 (नौ)। इस प्रकार, बिश्नोई बीस-नियम के रूप में भी अनुवादित किया जाता है। बिश्नोई समाजी लोग प्रकृति एवं जंगली जानवरों के अत्यधिक प्रेमी होते हैं। प्रारंभ में, Bishnoi Sthapana Divash बिश्नोई सम्प्रदाय को अपनाने वाले अधिकतर लोग जाट समुदाय से थे। अतः बिश्नोई सम्प्रदाय को कुछ जगह बिश्नोई जाट भी बोला जाता है। Bishnoi Sthapana Divash 2025: बिश्नोई स्थापना दिवस अनुष्ठान सप्तमी से ही मुक्तिधाम मुकाम में जाम्भाणी सत्संग का आयोजन किए जाते हैं।अष्टमी को मुक्तिधाम मुकाम से शोभा यात्रा निकली जाती है। शोभा यात्रा में भगवें झण्डे के सात 29 नियमों की पट्टिकाओं के साथ बिश्नोई जन सम्मिलित होते हैं।बिश्नोईयों के‌ आद्य स्थल समराथल‌ धोरा पर जाम्भाणी यज्ञ के साथ पवित्र पाहल बनाया‌ जाता है, बिश्नोई जन अपने संकल्पों को दोहराएंगे।महासभा द्वारा तैयार प्रसाद-भोज‌ का भोजशाला में आकर ग्रहण करते हैं। Bishnoi Sthapana Divash: बिश्नोई समाजी लोग प्रकृति एवं जंगली जानवरों के अत्यधिक प्रेमी होते हैं। प्रारंभ में, बिश्नोई सम्प्रदाय को अपनाने वाले अधिकतर लोग जाट समुदाय से थे। अतः बिश्नोई सम्प्रदाय को कुछ जगह बिश्नोई जाट भी बोला जाता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने चैंपियन ऑफ अर्थ अवार्ड 2018 का श्रेय विश्नोई समाज को दिया ।तथा बिश्नोईयो के पर्यावरण के लिए बलिदान की परंपरा को विश्व इतिहास की अनोखी घटना भी बताया। संबंधित अन्य नाम बिश्नोई समाज स्थापना दिवस शुरुआत तिथि कार्तिक कृष्णा अष्टमी कारण बिश्नोई संप्रदाय स्थापना दिवस उत्सव विधि व्रत, भजन-कीर्तन, मंदिर में प्रार्थना

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Radha Kund Snan

Radha Kund Snan 2025 Date And Time: अहोई अष्टमी पर कब किया जाएगा राधा कुंड स्नान? जानें सही तिथि, मुहूर्त और संतान प्राप्ति का महत्व

Radha Kund Snan 2025 mein kab hai: अहोई अष्टमी का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर किया जाता है। इस दिन, मथुरा के गोवर्धन में स्थित राधा कुंड में स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताएं कहती हैं कि इस पवित्र कुंड में डुबकी लगाने से निसंतान दंपत्ति (Childless couples) को संतान की प्राप्ति हो सकती है। यह पर्व केवल संतान की कामना रखने वाले जोड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी साधकों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। Radha Kund Snan 2025 Date And Time:राधा कुंड स्नान 2025: सही तिथि और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की Radha Kund Snan अष्टमी तिथि पर अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। इसी दिन राधा कुंड में स्नान का विधान है। राधा कुंड स्नान की सही तिथि और शुभ मुहूर्त इस प्रकार है: विवरण तिथि और समय अष्टमी तिथि की शुरुआत 13 अक्टूबर, रात 12 बजकर 24 मिनट पर अष्टमी तिथि का समापन 14 अक्टूबर, सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर राधा कुंड स्नान की तिथि सोमवार, 13 अक्टूबर (उदया तिथि के अनुसार) स्नान का शुभ मुहूर्त (निशिता काल) रात 11 बजकर 41 मिनट से रात 12 बजकर 30 मिनट तक यह स्नान अर्ध रात्रि यानी निशिता काल में किया जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इस समय स्नान करने से संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी हो सकती है। Ahoi Ashtami 2025 Date: 13 या 14 अक्टूबर? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि राधा कुंड स्नान का महत्व: क्यों माना जाता है इसे वरदान:Importance of taking bath in Radha Kund: Why is it considered a boon: Radha Kund Snan: राधा कुंड गोवर्धन परिक्रमा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अहोई अष्टमी के दिन इस कुंड में डुबकी लगाने का विशेष महत्व है, खासकर उन विवाहित जोड़ों के लिए जो संतान सुख से वंचित हैं। 1. संतान प्राप्ति का वरदान: ऐसी मान्यता है कि अहोई अष्टमी के दिन अर्ध रात्रि (निशिता काल) में श्रद्धापूर्वक राधा कुंड में स्नान करने से निसंतान दंपत्ति की संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी हो जाती है। 2. मनोकामना पूर्ति: जो भी साधक इस दिन श्रद्धापूर्वक स्नान करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 3. ईश्वरीय कृपा: इस कुंड में स्नान करने से साधक को न केवल राधा रानी की, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा की भी प्राप्ति होती है। संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होने के बाद, जोड़े दोबारा इस Radha Kund Snan कुंड में आकर स्नान करते हैं और राधा रानी जी का धन्यवाद प्रकट करते हैं। राधा कुंड में स्नान करने की विधि (Sacred Ritual) संतान प्राप्ति की मनोकामना के लिए राधा कुंड में स्नान करने की एक विशेष विधि है, जिसका पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है: 1. व्रत और संकल्प: संतान प्राप्ति की मनोकामना के लिए स्नान करने वाले जोड़े पूरे दिन व्रत रखते हैं। 2. मध्य रात्रि का स्नान: जोड़े मध्य रात्रि (निशिता काल) में कुंड में स्नान करते हैं। 3. विशेष सामग्री: स्नान के दौरान, कच्चा सफेद कद्दू, जिसे ‘पेठा’ भी कहा जाता है, उसे एक लाल कपड़े में बांधकर अपने हाथों में रखा जाता है। 4. ध्यान और कामना: स्नान करते समय साधक राधा रानी का ध्यान करते हैं और अपनी मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं। 5. अर्पण: स्नान के बाद, यह ‘पेठा’ राधा रानी को अर्पित किया जाता है। राधा रानी की पूजा के समय मंत्रों का जप करना और श्रीजी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। Story of Radha Kund Bath:राधा कुंड स्नान की कहानी Radha Kund Snan राधा कुंड का निर्माण भगवान कृष्ण ने अरिस्तासुर को मारने के बाद किया था जोकि एक बैल रूपी राक्षस था। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, बैल धर्म का प्रतीक है क्योंकि यह गाय के परिवार से संबंधित है। इसलिए राधारानी और गोपीयों के अनुसार, भगवान कृष्ण ने बैल को मार कर धार्मिक अपराध किया था। Radha Kund Snan राधा जी ने कृष्ण से सभी पवित्र नदियों में पवित्र स्नान करके स्वयं को शुद्ध करने के लिए कहा। अतः राधारानी को खुश करने के लिए, भगवान कृष्ण ने सभी पवित्र स्थानों का पानी एक ही स्थान पर एकत्र किया। कृष्णा ने अपने कमल चरणों को जमीन पर मारा जिससे उस स्थान पर सभी अलौकिक और पवित्र नदियों का पानी एकत्रित हो गया, और उस समय से, यह स्थान श्याम कुंडा के रूप में जाना जाता है। यह देखकर, राधारानी ने अपनी चूड़ियों के साथ जमीन खोदकर श्याम कुंडा के पास एक और कुंड बनाया। सभी पवित्र जल निकायों ने राधा जी से अनुरोध किया कि वे बनाए गए कुंड में प्रवेश करें। Radha Kund Snan इसलिए, इस तरह राधा कुंड बनाया गया था। राधा कुंड के तट पर, राधा रानी के आठ प्रमुख सखियों के नाम पर कुल आठ कुंज भी स्थित हैं।

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Ahoi Ashtami 2025

Ahoi Ashtami 2025 Date: 13 या 14 अक्टूबर? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Ahoi Ashtami 2025 Date: अहोई अष्टमी हिन्दू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे खासतौर पर माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के लिए करती हैं। यह व्रत कार्तिक माह में मनाया जाता है और इस वर्ष यह 13 अक्टूबर को पड़ रहा है।  अहोई अष्टमी हिन्दू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे खासतौर पर माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के लिए करती हैं। यह व्रत कार्तिक माह में मनाया जाता है और इस वर्ष यह 13 अक्टूबर को पड़ रहा है। Ahoi Ashtami 2025 पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी व्रत से न केवल संतान की दीर्घायु सुनिश्चित होती है, बल्कि संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले परिवारों में भी विशेष कृपा मिलती है। अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami 2025) हिन्दू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के लिए बड़े उत्साह के साथ मनाती हैं। Ahoi Ashtami 2025 यह व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत संतान सुख की प्राप्ति और सुख-समृद्धि में वृद्धि के लिए भी विशेष फलदायी होता है। इस वर्ष Ahoi Ashtami 2025 अहोई अष्टमी की सही तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति है। आइए जानते हैं वैदिक पंचांग के अनुसार अहोई अष्टमी व्रत की सही तारीख और शुभ मुहूर्त। अहोई अष्टमी 2025 कब है? (Ahoi Ashtami 2025 Date) वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार अहोई अष्टमी का पर्व 13 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह व्रत सुहागिन महिलाएं निर्जला (बिना जल के) रखती हैं। संतान की दीर्घायु सुनिश्चित करने के अलावा, यह व्रत संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले परिवारों के लिए भी विशेष कृपा लेकर आता है। अष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत और समापन का विवरण इस प्रकार है: विवरण जागरण (Jagran) हिन्दुस्तान (Hindustan) अष्टमी तिथि की शुरुआत 13 अक्टूबर, रात 12 बजकर 24 मिनट पर 13 अक्टूबर, दोपहर 12 बजकर 24 मिनट पर अष्टमी तिथि का समापन 14 अक्टूबर, रात 11 बजकर 9 मिनट पर 14 अक्टूबर, सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 53 मिनट से शाम 7 बजकर 8 मिनट तक शाम 06 बजकर 17 मिनट से शाम 07 बजकर 31 मिनट तक तारों को देखने का समय शाम 6 बजकर 17 मिनट तक शाम 06 बजकर 39 मिनट पर तारों के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण (व्रत खोलना) किया जाता है। अहोई अष्टमी व्रत की पूजा-विधि (Puja Vidhi) Ahoi Ashtami 2025 अहोई अष्टमी के दिन माताएं भगवान शिव और माता पार्वती के संग अहोई माता की पूजा-अर्चना करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन महादेव की पूजा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी दुख-संकट दूर होते हैं। 1. व्रत का संकल्प: अहोई अष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद माताएं व्रत का संकल्प लें। 2. पूजा की तैयारी: पूजा की शुरुआत दीवार पर अहोई माता की तस्वीर बनाकर की जाती है। 3. पूजा: रोली, चावल, और जल से पूजा संपन्न करें। एक कलश में जल भरकर रखें। 4. व्रत कथा: पूजा के दौरान अहोई अष्टमी व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। माना जाता है कि कथा का पाठ करने से संतान के जीवन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं और तरक्की के मार्ग खुलते हैं। 5. भोग: माता को पूरी और किसी मिठाई का भोग अर्पित किया जाता है। 6. कामना: अहोई माता से संतान के जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें। 7. तारों को अर्घ्य: सायंकाल, तारों को देखकर माताएं उन्हें अर्घ्य देती हैं और संतान की लंबी उम्र, सुखद जीवन और स्वास्थ्य की कामना करती हैं। 8. पारण और सम्मान: तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। व्रत खोलने से पहले घर के बुजुर्गों को सम्मान स्वरूप वस्त्र या आवश्यक सामग्री भेंट करने की परंपरा है। अहोई अष्टमी पर क्या करें और क्या न करें? (Ahoi Ashtami 2025 Do’s and Don’ts) इस पावन दिन पर कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है: क्या करें (Do’s) • सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। • पूजा-अर्चना और व्रत कथा का पाठ करें। • अहोई माता से संतान के करियर में तरक्की और लंबी आयु की कामना करें। • इस दिन अन्न-धन समेत अन्य चीजों का दान करने का विशेष महत्व है। • व्रत का पारण करते समय केवल सात्विक भोजन का सेवन करें। क्या न करें (Don’ts) • भूलकर भी काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। • किसी के बारे में गलत न सोचें और किसी से वाद-विवाद या लड़ाई-झगड़ा न करें। • इस दिन जमीन की खुदाई करना वर्जित माना गया है। • फल और सब्जियों को काटने से बचें। • व्रत के दिन दूध का प्रयोग भी निषिद्ध होता है। अहोई अष्टमी व्रत का महत्व:Importance of Ahoi Ashtami fast Ahoi Ashtami 2025 अहोई अष्टमी व्रत का विशेष महत्व माताओं और परिवार के लिए है। यह न केवल संतान की रक्षा और स्वास्थ्य की कामना के लिए किया जाता है, बल्कि पूरे परिवार में समृद्धि, सुख और वैभव लाने का भी माध्यम है। Ahoi Ashtami 2025 यह व्रत करने से संतान को लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, साथ ही बच्चे के करियर में तरक्की भी होती है। Karwa Chauth 2025 Vrat Upay: करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं क्या करें, क्या नहीं? जानिए..

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