September 25, 2025

Dhanteras 2025

Dhanteras 2025 Date And Time: 18 या 19 अक्टूबर, कब है धनतेरस? नोट करें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Dhanteras 2025 Kab Hai: धनतेरस 2025: दीपावली उत्सव का प्रथम और महत्वपूर्ण पर्व Dhanteras 2025: सनातन धर्म में धनतेरस (Dhanteras 2025) का पर्व विशेष महत्व रखता है। इसे दीपावली (दीवाली) उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और यह पांच दिवसीय उत्सव का पहला महत्वपूर्ण पर्व होता है। यह पर्व हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित व्रत रखा जाता है, जिनकी पूजा करने से धन संबंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं। 18 या 19 अक्टूबर, कब मनाया जाएगा धनतेरस 2025? (Dhanteras 2025 Date) Dhanteras 2025: धनतेरस 2025 की सही तिथि को लेकर भक्तों के मन में अक्सर असमंजस रहता है कि यह पर्व 18 अक्टूबर को है या 19 अक्टूबर को। आइए वैदिक पंचांग और द्रिक पंचांग के अनुसार सही तिथि और समय जानते हैं: त्रयोदशी तिथि का आरंभ: 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार) को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर। त्रयोदशी तिथि का समापन: 19 अक्टूबर 2025 (रविवार) को दोपहर 1 बजकर 51 मिनट पर। चूँकि हिंदू धर्म में उदयातिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, यानी वह तिथि जो सूर्योदय के समय मौजूद हो, इसलिए धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर 2025, शनिवार के दिन ही मनाया जाएगा। धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त 2025 (Dhanteras Puja Muhurat 2025) Dhanteras : धनतेरस के दिन पूजन के लिए प्रदोष काल यानी संध्याकाल को सबसे शुभ माना गया है। इस समय भगवान धन्वंतरि की पूजा और दीपदान करना श्रेष्ठ होता है। विवरण तिथि समय अवधि स्रोत धनतेरस 2025 तिथि 18 अक्टूबर 2025 शनिवार – पूजन का शुभ समय (प्रदोष काल) | 18 अक्टूबर 2025 शाम 7 बजकर 16 मिनट से 8 बजकर 20 मिनट तक 1 घंटा 4 मिनट धनतेरस का धार्मिक महत्व और पौराणिक मान्यताएं:Religious significance and mythological beliefs of Dhanteras धनतेरस Dhanteras 2025 को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व से जुड़ी मुख्य मान्यताएं और महत्व निम्नलिखित हैं: 1. भगवान धन्वंतरि का जन्म: पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का जनक (देवताओं का वैद्य) भी कहा जाता है। 2. स्वास्थ्य और समृद्धि: इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि उनकी पूजा से शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। 3. खरीददारी का महत्व: इस दिन सोना-चांदी से बने आभूषणों, बर्तनों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि धनतेरस पर की गई खरीदारी से धन में 13 गुना वृद्धि होती है। 4. यम दीपदान: माना जाता है कि Dhanteras धनतेरस पर दीपदान करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-शांति आती है। शाम के समय घर के बाहर यम देवता के लिए एक बड़ा दीपक (यम दीप) जलाया जाता है, जिससे अकाल मृत्यु से बचाव होता है। धनतेरस की पूजा विधि (Dhanteras Puja Vidhi) धनतेरस Dhanteras 2025 पर मां लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और स्वास्थ्य के देवता धन्वंतरि की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान इन चरणों का पालन करें: 1. सफाई और स्थापना: पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह से साफ-सफाई करें। पूजा के लिए एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। 2. देवताओं को स्थापित करें: चौकी पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 3. दीपक प्रज्ज्वलित करें: पूजा शुरू करने से पहले धन्वंतरि देव के लिए एक घी का दीपक जलाएं। यह दीपक स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। 4. मंत्र जाप: पूजा करते समय ‘ॐ धन्वंतराय नमः’ और धन प्राप्ति के लिए ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः’ जैसे मंत्रों का जाप करें। 5. अर्पण: भगवान को फल, फूल, मिठाई, और धनिया के बीज (जिसे धन का प्रतीक माना जाता है) अर्पित करें। 6. कथा श्रवण: पूजा समाप्त होने के बाद धनतेरस की कथा अवश्य सुनें। 7. यम दीप: शाम को, घर के बाहर यम देवता के लिए एक बड़ा दीपक जलाना न भूलें। Diwali 2025 Date And Time: 20 या 21 अक्टूबर, कब है दिवाली? जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और दीपावली कैलेंडर

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Diwali 2025

Diwali 2025 Date And Time: 20 या 21 अक्टूबर, कब है दिवाली? जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और दीपावली कैलेंडर

Diwali 2025 Kab Hai: हिंदू धर्म में दिवाली (दीपावली) का पर्व प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। यह पावन पर्व अंधकार पर प्रकाश की जीत, अधर्म पर धर्म की विजय और अज्ञानता पर ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली का त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन प्रभु श्री राम 14 वर्ष का कठिन वनवास पूरा करके माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में नगरवासियों ने पूरे अयोध्या को घी के दीपकों से सजाया था, तभी से यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। दिवाली (Diwali) का पांच दिवसीय पर्व धनतेरस के साथ आरंभ होता है और भाई दूज के साथ समाप्त होता है। आइए जानते हैं Diwali 2025 दिवाली 2025 की सही तिथि और संपूर्ण कैलेंडर। कब है दिवाली 2025? (Diwali 2025 Date) वर्ष 2025 में, Diwali दिवाली के पर्व की तिथि को लेकर लोगों में अक्सर असमंजस रहता है। यहाँ द्रिक पंचांग के अनुसार सही तिथि और समय दिया गया है: 1. कार्तिक अमावस्या का आरंभ: 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 3 बजकर 45 मिनट पर। (अन्य स्रोत के अनुसार 03 बजकर 44 मिनट पर)। 2. कार्तिक अमावस्या का समापन: 21 अक्टूबर 2025 को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर। (अन्य स्रोत के अनुसार 21 अक्टूबर 2025 को सुबह 05 बजकर 54 मिनट पर)। दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा निशिता काल (मध्यरात्रि) में करने का विशेष विधान होता है। इसी कारण, दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर 2025, सोमवार के दिन मनाया जाएगा। दिवाली 2025 लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त (Lakshmi Puja Muhurat) दिवाली Diwali पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी की पूजा-अर्चना की जाती है। लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए सबसे शुभ समय प्रदोष काल और स्थिर लग्न का माना जाता है। पूजन का विवरण तिथि और समय अवधि लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त 20 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 08 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 18 मिनट तक 1 घंटा 10 मिनट अन्य लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 20 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 4 मिनट तक 1 घंटा 8 मिनट प्रदोष काल शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 8 मिनट तक – वृषभ काल (सन्ध्या) शाम 6 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 53 मिनट तक 1 घण्टा 56 मिनट्स निशिता काल का मुहूर्त (मध्यरात्रि) रात 11:41 से 21 अक्टूबर को सुबह 12:31 तक – दिवाली 2025 का 5 दिवसीय कैलेंडर (Diwali 2025 Calendar) दिवाली का पर्व एक दिन का नहीं, बल्कि पांच दिनों का त्योहार होता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है। त्योहार का नाम तिथि दिन धनतेरस 18 अक्टूबर 2025 शनिवार काली चौदस 19 अक्टूबर 2025 रविवार नरक चतुर्दशी 20 अक्टूबर 2025 सोमवार दिवाली 20 अक्टूबर 2025 सोमवार दिवाली स्नान 21 अक्टूबर 2025 मंगलवार गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर 2025 बुधवार भाई दूज 23 अक्टूबर 2025 गुरुवार Dhanteras Kab Hai: धनतेरस कब है कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर आरंभ हो रही है, जिसके कारण धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 से 19 अक्टूबर को सुबह 06:08 तक है। Diwali Pujan Vidhi or Mahetwapurn Upay: दिवाली पूजन विधि और महत्वपूर्ण उपाय दिवाली Diwali के दिन मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए सही विधि से पूजा करना आवश्यक है: पूजन विधि: Puja Vidhi 1. स्थान की तैयारी: सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके पूर्व दिशा या ईशान कोण (North-East) में लकड़ी की चौकी रखें। 2. स्थापना: चौकी पर लाल या गुलाबी रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर विराजमान करें। 3. शुद्धिकरण: संकल्प लें, एकमुखी घी का दीपक जलाएं, और अपने चारों ओर जल छिड़ककर शुद्धिकरण करें। 4. पूजन क्रम: सबसे पहले भगवान गणेश को पुष्प और मिठाई अर्पित करें। उसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें। 5. समापन: दोनों देवताओं के मंत्रों का जप करने के बाद आरती करें और शंखनाद करें। 6. वस्त्र: पूजा के समय लाल, पीले या चमकीले वस्त्र धारण करें और काले व गहरे रंगों से परहेज करें। 7. दीप प्रज्ज्वलन: दिवाली की रात घर के प्रत्येक कोने, मुख्य द्वार, छत और आंगन में दीपक अवश्य जलाएं। धन-समृद्धि के लिए विशेष उपाय • धन प्राप्ति: धन-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए पूजा के समय मां लक्ष्मी को एकाक्षी नारियल (one-eyed coconut) अर्पित करें। • सुख-शांति: जीवन में सुख-शांति के लिए इस दिव्य मंत्र का जप करें: “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं श्रीं क्लीं क्लीं श्रीं महालक्ष्म्यै मम गृहे धनं पूरय पूरय, चिंतां दूरय दूरय स्वाहा॥” मान्यता है कि सच्चे मन से यह उपाय करने पर मां लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

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Maa Siddhidhatri

Navratri 2025 Day 9 Maa Siddhidhatri Puja Vidhi : नवरात्रि के 9वें दिन मां सिद्धिदात्री की होती है पूजा, नोट कर लें पूजन….

Maa Siddhidhatri Puja Vidhi : सिद्धिदात्री को आठ सिद्धियों की देवी माना जाता है। भक्त पूरे विधि-विधान और श्रद्धा से उनकी पूजा करके अष्ट सिद्धि प्राप्त कर सकते हैं। नवरात्रि के 9वें दिन माता सिद्धिदात्री की कृपा पाने के लिए व्रत रखा जाता है। आइए, विस्तार से जानते हैं नवरात्रि के 9वें दिन की पूजा विधि और भोग। 9वां दिन है, जिसे रामनवमी भी कहते हैं। इस दिन (Maa Siddhidhatri) मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री सिद्धियां और मोक्ष देती हैं इसलिए उनकी पूजा करने से सारे काम पूरे होते हैं और मोक्ष मिलता है। कुछ कहानियों के अनुसार, भगवान शिव ने भी Maa Siddhidhatri मां सिद्धिदात्री से ही सिद्धियां पाई थीं। आइए, जानते हैं मां सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करें, उन्हें क्या भोग लगाएं और इस दिन का क्या महत्व है। Navratri 9th Day Maa Siddhidatri Puja :  नवरात्रि का अंतिम यानी 9वां दिन है। नवरात्रि के 9वें दिन मां दुर्गा के के नवमं स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। नव दुर्गाओं में मां सिद्धिदात्री अंतिम हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार Maa Siddhidhatri मां सिद्धिदात्री भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उन्हें यश, बल और धन भी प्रदान करती हैं। शास्त्रों में मां सिद्धिदात्री को सिद्धि और मोक्ष की देवी माना जाता है। मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली हैं। सभी देवी-देवताओं को मां से ही सिद्धियों की प्राप्ति हुई हैं। भगवान शिव ने भी मां की तपस्या कर सिद्धियों को प्राप्त किया। मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और वह अर्धनारीश्वर कहलाए। नवरात्र में नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के बाद नवरात्र का समापन माना जाता है। Siddhidatri Mata Koun Hai: सिद्धिदात्री माता कौन है नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। यह दिन बहुत खास है। Maa Siddhidhatri मां सिद्धिदात्री कमल के फूल पर बैठती हैं। उनकी पूजा में नौ तरह के फल और फूल चढ़ाए जाते हैं। उन्हें विद्या और कला की देवी सरस्वती का रूप भी मानते हैं। माता सिद्धिदात्री के पास हैं 8 सिद्धियां:Mata Siddhidatri has 8 Siddhiyas भक्त नवरात्रि के नौ दिनों तक उपवास और पूजा-अर्चना करके मां दुर्गा की कृपा पाते हैं और मनचाहा फल प्राप्त करते हैं। साथ ही, घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। देवी-देवता, गंधर्व, ऋषि और असुर भी माता सिद्धिदात्री की पूजा करके आठ सिद्धियां प्राप्त कर सकते हैं और अंत में मोक्ष प्राप्त करते हैं। नवरात्रि के 9वें पूजा विधि:9th puja method of Navratri Maa Siddhidhatri: नवरात्रि के 9वें दिन कन्या पूजन किया जाता है. इस दिन 9 कन्याओं और एक लांगूर (बालक) का पूजन करने का विधान है। हालांकि, अपनी क्षमता के अनुसार 5 कन्याओं का पूजन भी किया जा सकता है। कन्या पूजन में कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें दान-दक्षिणा दी जाती है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है. यह पूजन श्रद्धा और सम्मान के साथ किया जाता है। नवरात्रि के 9वें दिन का भोग:Offerings on the 9th day of Navratri मां सिद्धिदात्री Maa Siddhidhatri को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई तरह के भोग लगाते हैं। हलवा, पूरी, चना, फल, खीर और नारियल जैसे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। मान्यता है कि जामुनी या बैंगनी रंग के कपड़े पहनकर पूजा करने से विशेष फल मिलता है। भोग लगाने के बाद मां सिद्धिदात्री माता की विशेष रूप से आरती की जाती है। पूजा-विधि:Method of worship सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां की प्रतिमा को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं। मां को सफेद रंग के वस्त्र अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां को सफेद रंग पसंद है। मां को स्नान कराने के बाद सफेद पुष्प अर्पित करें। मां को रोली कुमकुम लगाएं। मां को मिष्ठान, पंच मेवा, फल अर्पित करें। माता सिद्धिदात्री को प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ प्रकार के पुष्प और नौ प्रकार के ही फल अर्पित करने चाहिए। मां सिद्धिदात्री Maa Siddhidhatri को मौसमी फल, चना, पूड़ी, खीर, नारियल और हलवा अतिप्रिय है। कहते हैं कि मां को इन चीजों का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं। माता सिद्धिदात्री का अधिक से अधिक ध्यान करें। मां की आरती भी करें। नवमी के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन कन्या पूजन भी करें। मां सिद्धिदात्री बीज मंत्र- ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:। कन्या पूजन अति उत्तम-ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन करना अति उत्तम माना जाता है। कहते हैं कि नवरात्रि के आखिरी दिन कन्या पूजन करने से Maa Siddhidhatri मां सिद्धिदात्री प्रसन्न होती हैं। Aarti of Maa Siddhidhatri :मां सिद्धिदात्री की आरती जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता। तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता। तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि। तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि। कठिन काम सिद्ध करती हो तुम। जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम। तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है। तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है। रविवार को तेरा सुमिरन करे जो। तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो। तू सब काज उसके करती है पूरे। कभी काम उसके रहे ना अधूरे। तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया। रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया। सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली। जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली। हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा। महा नंदा मंदिर में है वास तेरा। मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता। भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता। Shardiya Navratri 2025 Day 8 Puja Vidhi: अष्टमी विशेष, जानिए मां महागौरी की कृपा पाने का सही तरीका

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