September 22, 2025

Sharad Purnima 2025

Sharad Purnima 2025 Start Date:कब है शरद पूर्णिमा? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धन वृद्धि के अचूक उपाय

Sharad Purnima 2025 Start Date; शरद पूर्णिमा 2025 का धार्मिक महत्व: सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ माना गया है। विशेष रूप से शरद पूर्णिमा को सभी 12 पूर्णिमाओं में सबसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। Sharad Purnima 2025 इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना और दान करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि और खुशियों का आगमन होता है। Sharad Purnima 2025 इस माह (अश्विन माह) में मां दुर्गा और पितरों की पूजा-अर्चना करने का भी विधान है। कब मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा 2025? (Sharad Purnima 2025 Date and Time) वैदिक पंचांग के अनुसार, अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि हर वर्ष बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। विवरण तिथि और समय (द्रिक पंचांग के अनुसार) पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 06 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर होगी। पूर्णिमा तिथि का समापन अगले दिन यानी 07 अक्टूबर 2025 को सुबह 09 बजकर 16 मिनट पर होगा। शरद पूर्णिमा 2025 पर्व 06 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। Why is the moon special on the night of Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा क्यों है खास? शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत की वर्षा करता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में दिव्य औषधीय गुण होते हैं। इसी वजह से, इस रात को दूध से बनी खीर चांदनी में रखी जाती है, और अगले दिन इसका सेवन प्रसाद के रूप में किया जाता है। माना जाता है कि इसे ग्रहण करने से जातक के शरीर और मन दोनों को शुद्धि एवं शक्ति मिलती है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें ये विशेष उपाय (Sharad Purnima Upay) अगर आप आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं या जीवन में धन में अपार वृद्धि चाहते हैं, तो Sharad Purnima 2025 शरद पूर्णिमा के दिन ये उपाय अत्यंत लाभकारी माने गए हैं: 1. आर्थिक तंगी से छुटकारा: शरद पूर्णिमा के दिन स्नान करने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। इस दौरान देवी लक्ष्मी को कमल का फूल और नारियल (या एकाक्षी नारियल) अर्पित करें। Sharad Purnima 2025 ऐसी मान्यता है कि इस उपाय से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और आर्थिक तंगी की समस्या से छुटकारा मिलता है। 2. धन में अपार वृद्धि: धन में अपार वृद्धि के लिए शरद पूर्णिमा की रात को 11 पीले रंग की कौड़ियों को एक पीले कपड़े में बांधकर मां लक्ष्मी के सामने रखें। अगले दिन इन कौड़ियों को अपनी तिजोरी में रख दें। Sharad Purnima 2025 ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से धन में अपार वृद्धि होती है और घर-परिवार में कभी भी धन की कमी नहीं होती है, तथा लक्ष्मी माता का वास होता है। मां लक्ष्मी के प्रिय मंत्र:Favorite mantras of Goddess Lakshmi पूजा के दौरान आप मां लक्ष्मी के इन मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं: • श्री लक्ष्मी बीज मन्त्र: ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः।। • लक्ष्मी प्रार्थना मंत्र: नमस्ते सर्वगेवानां वरदासि हरे: प्रिया। या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां या सा मे भूयात्वदर्चनात्।। • श्री लक्ष्मी महामंत्र: ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।

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Navratri Day 6

Shardiya Navratri Day 6, Maa Katyayini Puja Vidhi: नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की होती है आराधना, जानिए पूजा- विधि, मंत्र, भोग और आरती

Shardiya Navratri Day 6, Maa Katyayini Puja Vidhi:देवी भागवत पुराण में कहा गया है कि मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्त को अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। Shardiya Navratri 6 Day, Maa Katyayani Puja Vidhi, Aarti In Hindi: शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा- अर्चना करने का विधान है। वहीं आपको बता दें कि देवी कात्यायनी को महिषासुर मर्दनी के नाम से भी जाना जाता है। वहीं अगर मां के स्वरूप की बात करी जाए तो मां 4 भुजाधारी और सिंह पर सवार हैं। Navratri Day 6 उन्होंने एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल का पुष्प धारण किया हुआ है। अन्य दो हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं। मान्यता है कि कात्यायनी की पूजा करने से भक्त को अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं मां कात्यायनी का भोग, आरती और पूजा- विधि… Shardiya Navratri Day 6, Maa Katyayini Puja Vidhi: मां कात्यायनी की पूजा- विधि Navratri 2025: इस दिन सुबह जल्दी उठ जाएं। साथ ही स्नान करने के बाद साफ- सुथरे वस्त्र धारण कर लें। वहीं सबसे पहले धूप अगरबत्ती जलाएं। साथ ही पूजा आरंभ करें। सबसे पहले कलश की विधिवत पूजा करें। इसके बाद Navratri Day 6 मां दुर्गा के साथ मां कात्यायनी की पूजा करें। वहीं माता को फूल चढ़ाएं। साथ ही माला, सिंदूर, कुमकुम, रोला, अक्षत लगाने के साथ मां का श्रृंगार भी करें। वहीं  इसके बाद मां को भोग में शहद, फल, मिठाई का भोग लगाएं। इसके साथ ही एक पान में 2 लौंग, एक इलायची, बाताशा, एक सिक्का रखकर चढ़ा दें। साथ ही अंत में माता के सभी मंत्रों का उच्चारण करें। Navratri Day 6 साथ ही दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। वहीं अंत में आरती करें और जो प्रसाद लगाया है, वो घर के सभी सदस्यों में बांट दें और अंत में क्षमा प्रार्थना करें। मां कात्यायनी प्रिय भोग:Maa Katyayini Priy bhog नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा के समय शहद का भोग लगाना चाहिए। Navratri Day 6 इससे मां प्रसन्न होकर सुख- समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। मां कात्यायनी का प्रिय रंग:Maa Katyayini Ka Priy Rang मां कात्यायनी को लाल रंग अति प्रिय है। Navratri Day 6 इसलिए इस रंग के वस्त्र अर्पित करने के साथ लाल रंग के गुलाब अर्पित करें। मां कात्यायनी का बीज मंत्र:Maa Katyayini Ka Beej Mantra क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:। मां कात्यायनी आराधना मंत्र:Maa Katyayini Aradhana Mantra 1- या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। 2-चंद्र हासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना|कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानवघातिनि|| मां कात्यायनी स्तोत्र पाठ:Maa Katyayini Stotra Path कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोच्जवलां।स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥परमांवदमयी देवि परब्रह्मा परमात्मा।परमशक्ति, परमभक्ति, कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥ मां कात्यायनी कवच: Maa Katyayini Kavach कात्यायनी मुखं पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥कल्याणी हृदयं पातु जया भगमालिनी॥ मां कात्यायनी की आरती:Maa Katyayini Ki Aarti जय-जय अम्बे जय कात्यायनीजय जगमाता जग की महारानीबैजनाथ स्थान तुम्हारावहा वरदाती नाम पुकाराकई नाम है कई धाम हैयह स्थान भी तो सुखधाम हैहर मंदिर में ज्योत तुम्हारीकही योगेश्वरी महिमा न्यारीहर जगह उत्सव होते रहतेहर मंदिर में भगत हैं कहतेकत्यानी रक्षक काया कीग्रंथि काटे मोह माया कीझूठे मोह से छुडाने वालीअपना नाम जपाने वालीबृहस्पतिवार को पूजा करिएध्यान कात्यायनी का धरिएहर संकट को दूर करेगीभंडारे भरपूर करेगीजो भी मां को ‘चमन’ पुकारेकात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

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Day 3 Navratri

Day 3 Navratri Puja Vidhi: नवरात्रि के तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें सही विधि, भोग, मंत्र, शुभ रंग और कथा

Day 3 Navratri Puja Vidhi: नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है. आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, भोग, मंत्र, शुभ रंग और कथा. Navratri 2025 Day 3: नवरात्रि के तीसरे दिन देवी दुर्गा के चंद्रघंटा रूप की पूजा की जाती है. मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है. इनके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है, Day 3 Navratri Puja Vidhi मां के दस हाथ हैं, जिनमें अलग-अलग अस्त्र और शस्त्र होते हैं. वहीं, मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह है. मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की सच्ची निष्ठा से पूजा-अर्चना करने से जीवन में शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन आता है. ऐसे में आइए जानते हैं Day 3 Navratri मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, भोग, मंत्र, शुभ रंग और कथा. Day 3 Navratri Puja Vidhi: नवरात्रि के तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा…. मां चंद्रघंटा की पूजा विधि (Maa Chandraghanta Puja Vidhi) इसके बाद, मां के चरणों में पुष्प अर्पित कर आरती गाएं. देवी चंद्रघंटा की आराधना करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद साफ कपड़े धारण कर लें. मंदिर को साफ कर पूजा स्थान पर देवी की मूर्ति की स्थापना करें.  मां की प्रतिमा को गंगा जल से स्नान कराएं.  इसके बाद धूप-दीप, पुष्प, रोली, चंदन अर्पित करें. मां को भोग लगाकर उनके मंत्रों का जाप करें. मां चंद्रघंटा का मंत्र  (Maa Chandraghanta Mantra) पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता.प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥ ध्यान मंत्र वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्.सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्.खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्.मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्.कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥ मां चंद्रघंटा का भोग (Maa Chandraghanta ka bhog) नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग समर्पित किया जाता है. मां चंद्रघंटा शुभ रंग (Maa Chandraghanta ka Shubh Rang) नवरात्रि के तीसरे दिन का शुभ रंग लाल होता है.मां चंद्रघंटा की कथा (Maa Chandraghanta ki Katha) पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर नाम के एक राक्षस ने देवराज इंद्र का सिंहासन हड़प लिया था.  महिषासुर स्वर्गलोक पर राज करना चाहता था. Day 3 Navratri उसकी यह इच्छा जानकार देवता चितिंत हो गए, जिसके बाद वे अपनी इस परेशानी के लिए त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और शंकर के पास पहुंचें. महिषासुर के आतंक की गाथा सुनकर त्रिदेव क्रोधिक हो गए. इस क्रोध के चलते तीनों के मुख से ऊर्जा उत्पन्न हुई. इसी उर्जा से मां चंद्रघंटा का जन्म हुआ. महिषासुर का अंत करने के लिए भगवान शंकर ने मां को अपना त्रिशूल और भगवान विष्णु ने अपना चक्र प्रदान किया. इसके बाद सभी देवी देवताओं ने भी माता को अपना-अपना अस्त्र सौंप दिया. इंद्रदेव ने मां को अपना एक घंटा दिया. इसके बाद मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का संहार कर देवताओं की रक्षा की. Durga Puja 2025 Date And Time :दुर्गा पूजा 2025 कब से होगी शुरू? जानें महत्वपूर्ण तिथियां, घटस्थापना मुहूर्त और पूजा विधि

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Day 2 Navratri Puja Vidhi

Day 2 Navratri Puja Vidhi : नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की होती है पूजा, नोट कर लें पूजन विधि, शुभ

Day 2 Navratri Puja Vidhi : नवरात्रि के दूसरे दिन मां के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान और तप की देवी कहा जाता है। भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए मां पार्वती ने कठोर…. 2nd Day of Navratri Maa brahmacharini : इस समय चैत्र नवरात्रि चल रही हैं। आज चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान और तप की देवी कहा जाता है। भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए मां पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। Day 2 Navratri Puja Vidhi: मां ब्रह्मचारिणी सफेद साड़ी धारण करती हैं। साथ ही उनके दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में कमण्डल है। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से जातक को आदि और व्याधि रोगों से मुक्ति मिलती है। Day 2 Navratri Puja Vidhi शास्त्रों में वर्णित है कि मां ब्रह्मचारिणी के पूजन से भगवान शिव भी प्रसन्न होते हैं। यम, नियम के बंधन से मुक्ति मिलती है। ब्रह्म को प्राप्त करने के लिए भगवती ने तपस्या की, इसलिए उनका नाम ब्रहमचारिणी पढ़ा। शुभ रंग- मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग बहुत प्रिय है। मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन मां दुर्गा को सफेद रंग के पुष्प अर्पित करने चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को खीर, बर्फी, चीनी और पंचामृता का भोग लगा सकते हैं। Day 2 Navratri Puja Vidhi इस दिन आप पूजा के दौरान सफेद रंग के वस्त्रों को पहन सकते हैं। मां ब्रह्मचारिणी का बीज मंत्र: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए उनके बीज मंत्र ‘ह्रीं श्री अम्बिकायै नमः’ का 108 बार जाप कर सकते हैं। इसके अलावा ‘ या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।’ मंत्र का जाप करना भी बेहद शुभ माना जाता है। व्रत कथा – मां ब्रह्मचारिणी ने राजा हिमालय के घर जन्म लिया था। नारदजी की सलाह पर उन्होंने कठोर तप किया, ताकि वे भगवान शिव को पति स्वरूप में प्राप्त कर सकें। कठोर तप के कारण उनका ब्रह्मचारिणी या तपश्चारिणी नाम पड़ा। Day 2 Navratri Puja Vidhi भगवान शिव की आराधना के दौरान उन्होंने 1000 वर्ष तक केवल फल-फूल खाए तथा 100 वर्ष तक शाक खाकर जीवित रहीं। कठोर तप से उनका शरीर क्षीण हो गया। Day 2 Navratri Puja Vidhi उनक तप देखकर सभी देवता, ऋषि-मुनि अत्यंत प्रभावित हुए। Day 2 Navratri Puja Vidhi उन्होंने कहा कि आपके जैसा तक कोई नहीं कर सकता है। आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगा। भगवान शिव आपको पति स्वरूप में प्राप्त होंगे। पूजा-विधि: Day 2 Navratri Puja Vidhi इस दिन सुबह उठकर जल्दी स्नान कर लें, फिर पूजा के स्थान पर गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि कर लें। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें। मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें। अब मां दुर्गा को अर्घ्य दें। मां को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं। धूप और दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर मां की आरती करें। मां को भोग भी लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की आरती:(Maa Brahmacharini Aarti) जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो। ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा। जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए। उसकी विरति रहे ठिकाने। जो ​तेरी महिमा को जाने। रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना। ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी। Navratri 2025 2nd Day Maa Brahmacharini Puja : नवरात्रि के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी पूजा, जाने पूजा विध, महत्व, मंत्र, भोग और पीले रंग का क्या है महत्व

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