August 12, 2025

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Karpanyapanjikastotram:कार्पण्यपञ्जिकास्तोत्रम्

Karpanyapanjikastotram:कार्पण्यपञ्जिकास्तोत्रम् ध्यानः ।कोणेनाक्ष्णोः पृथुरुचिः मिथो हारिणा लिह्यमाना- वेकैकेन प्रचुरपुलकेनोपगुढौ भुजेन । गौरीश्यामौ वसनयुगलं श्यामगौरं वसानौ राधाकृष्णौ स्मरविलसितोद्दामतृष्णौ स्मरामि ॥ १॥ अथ श्रीकार्पण्यपञ्जिकास्तोत्रंश्रीवृन्दावनेशौ जयतः तिष्ठन् वृन्दाटवीकुञ्जे विज्ञप्तिं विदधत्यसौ ।वृन्दाटवीशयोः पादपद्मेषु कृपनो जनः ॥ १॥ नवेन्दीवरसन्दोहसौन्दर्यास्कन्दनप्रभम् ।चारुगोरोचनागर्वगौरवग्रासिगौरभाम् ॥ २॥ शातकुम्भकदम्बश्रीविडम्बिस्फुरदम्बरम् ।हरता किंशुकस्यांशून् अंशुकेन विराजिताम् ॥ ३॥ सर्वकैशोरवद्वृन्दचूडारूढहरिण्मणिम् ।गोष्ठाशेषकिशोरीणां धम्मिल्लोत्तंसमल्लिकाम् ॥ ४॥ श्रीशमुख्यात्मरूपणां रूपातिशयिविग्रहम् ।रमोज्ज्वलव्रजवधूव्रजविस्मापिसौष्ठवाम् ॥ ५॥ Karpanyapanjikastotram सौरभ्यहृतगान्धर्वं गन्धोन्मादितमाधवाम् ।राधारोधनवंशीकं महतीमोहिताच्युताम् ॥ ६॥ राधाधृतिधनस्तेनलोचनाञ्चलचापलम् ।दृगञ्चलकलाभृङ्गीदष्टकृष्णहृदम्बुजाम् ॥ ७॥ राधागूढपरीहासप्रौढिनिर्वचनीकृतम् ।व्रजेन्द्रसुतनर्मोक्तिरोमाञ्चिततनूलताम् ॥ ८॥ दिव्यसद्गुणमाणिक्यश्रेणीरोहणपर्वतम् ।उमादिरमणीव्यूहस्पृहणीयगुणोत्कराम् ॥ ९॥ त्वां च वृन्दावनाधीश त्वां च वृन्दावनेश्वरि ।काकुभिर्वन्दमानोऽयं मन्दं प्राऋथयते जनः ॥ १०॥ ॥ दशभिः कुलकम् ॥योग्यता मे न काचिद् वां कृपालाभाय यद्यपि ।महाकृपालुमौलित्वात् तथापि कुरुतं कृपाम् ॥ ११॥ अयोग्ये सापराधेऽपि दृश्यन्ते कृपयाकुलाः ।महाकृपालवो हन्त लोके लोकेशवन्दितौ ॥ १२॥ भक्तेर्वां करुणाहेतोर्लेशाभासोऽपि नास्ति मे ।महालीलेशरतया तदप्यत्र प्रसीदतम् ॥ १३॥ जने दुष्टेऽप्यभक्तेऽपि प्रसीदन्तो विलोकिताः ।महालीलामहेशाश्च हा नाथौ बहवो भुवि ॥ १४॥ Karpanyapanjikastotram अधमोऽप्युत्तमं मत्वा स्वमज्ञेऽपि मनीषिणम् ।शिष्टं दुष्टोऽप्ययं जन्तुर्मन्तुं व्यधित यद्यपि ॥ १५॥ तथाप्यस्मिन् कदाचिद् वामधीशौ नामजल्पिनि ।अवद्यवृन्दनिस्तारिनामाभासौ प्रसीदतम् ॥ १६॥ यदक्षम्यं नु युवयोः सकृद्भक्तिलवादपि ।तदागः क्वापि नास्त्येव कृताशां प्रार्थये ततः ॥ १७॥ हन्त क्लीबोऽपि जीवोऽयं नीतः कष्टेन धृष्टताम् ।मुहुः प्रार्थयते नाथौ प्रसादः कोऽप्युदञ्चतु ॥ १८॥एष पापी रुदन्न् उच्चैरादाय रदनैस्तृणम् ।हा नाथौ नाथेति प्राणी सीदत्यत्र प्रसीदतम् ॥ १९॥ हाहारावमसौ कुर्वन् दुर्भगो भिक्षते जनः ।एतां मे श‍ृणुतं काकुं काकुं श‍ृणुतमीश्वरौ ॥ २०॥ Karpanyapanjikastotram याचे फुत्कृत्य फुत्कृत्य हा हा काकुभिराकुलः ।प्रसीदतमयोग्येऽपि जनेऽस्मिन् करुणार्णवौ ॥ २१॥ क्रोशत्यार्तस्वरैरास्ये न्यस्याङ्गुष्ठमसौ जनः ।कुरुतं कुरुतं नाथौ करुणाकणिकामपि ॥ २२॥ वाचेह दीनया याचे साक्रन्दमतिमन्दधीः ।किरतं करुणस्वान्तौ करुणोर्मिच्छटामपि ॥ २३॥ मधुराः सन्ति यावन्तो भावाः सर्वत्र चेतसः ।तेभ्योऽपि प्रेममधुरं प्रसादीकुरुतं निजम् ॥ २४॥ सेवामेवाद्य वां देवावीहे किञ्चन नापरम् ।प्रसादाभिमुखौ हन्त भवन्तौ भवतां मयि ॥ २५॥ Karpanyapanjikastotram नाथितं परमेवेदमनाथजनवत्सलौ ।स्वं साक्षाद्दास्यमेवास्मिन् प्रसादीकुरुतं जने ॥ २६॥ अञ्जलिं मूर्ध्नि विन्यस्य दीनोऽयं भिक्षते जनः ।अस्य सिद्धिरभीष्टस्य सकृदप्युपपाद्यताम् ॥ २७॥ अमलो वां पारिमलः कदा परिमलन् वने ।अनर्घेण प्रमोदेन घ्राणं मे घूर्णयिष्यति ॥ २८॥ रञ्जयिस्यति कर्णौ मे हंसगुञ्जितगञ्जनम् ।मञ्जुलं किं नु युवयोर्मञ्जीरकलसिञ्जितम् ॥ २९॥ सौभाग्याङ्करथाङ्गादिलक्षितानि पदानि वाम् ।कदा वृन्दावने पश्यन्न् उन्मदिष्यत्ययं जनः ॥ ३०॥ सर्वसौन्दर्यमर्यादानीराज्यपदनीरजौ ।किमपूर्वाणि पर्वाणि हा ममाक्ष्णोर्विधास्यथ ॥ ३१॥ सुचिराशाफलाभोगपदाम्भोजविलोकनौ ।युवां साक्षाज्जनस्यास्य भवेतामिह किं भवे ॥ ३२॥ कदा वृन्दाटवीकुञ्जकन्दरे सुन्दरोदयौ ।खेलन्तौ वां विलोकिष्ये सुरतौ नातिदूरतः ॥ ३३॥ Karpanyapanjikastotram: गुर्वायत्ततया क्वापि दुर्लभान्योन्यवीक्षणौ ।मिथः सन्देशसीधुभ्यां नन्दयिस्यामि वां कदा ॥ ३४॥ गवेषयन्तावन्योऽन्यं कदा वृन्दावनान्तरे ।सङ्गमय्य युवां लप्स्ये हारिणं पारितोषिकम् ॥ ३५॥ पणीकृतमिथोहारलुञ्चनव्यग्रहस्तयोः ।कलिं द्यूते विलोकिष्ये कदा वां जितकाशिनोः ॥ ३६॥ कुञ्जे कुसुमशय्यायां कदा वामर्पिताङ्गयोः ।पादसंवाहनं हन्त जनोऽयं रचयिष्यति ॥ ३७॥ कन्दर्पकलहोद्घट्टत्रुटितानां लतागृहे ।कदा गुम्फाय हाराणां भवन्तौ मां नियोक्ष्यतः ॥ ३८॥ केलिकल्लोलविस्रस्तान् हन्त वृन्दावनेश्वरौ ।कर्हि बर्हिपतत्रैर्वां मण्डयिष्यामि कुन्तलान् ॥ ३९॥ Karpanyapanjikastotram कन्दर्पकेलिपाण्डित्यखण्डिताकल्पयोरहम् ।कदा वामलिकद्वन्द्वं करिष्ये तिलकोज्ज्वलम् ॥ ४०॥ देवारम्भे वनस्रग्भिर्दृशौ ते देवि कज्जलैः ।अयं जनः कदा कुञ्जमण्डपे मण्डयिष्यति ॥ ४१॥ जाम्बूनदाभताम्बूलीपर्णान्यवदलय्य वाम् ।वदनाम्बुजयोरेष निधास्यति जनः कदा ॥ ४२॥ क्वासौ दुष्कृतकर्माहं क्व वामभ्यर्थनेदृशी ।किं वा कं वा न युवयोरुन्मादयति माधुरी ॥ ४३॥ यया वृन्दावने जन्तुरनर्होऽप्येष वास्यते ।तयैव कृपया नाथौ सिद्धिं कुरुतमीप्सितम् ॥ ४४॥ कार्पण्यपञ्जिकामेतां सदा वृन्दाटवीनटौ ।गिरैव जल्पतोऽप्यस्य जन्तोः सिध्यतु वाञ्छितम् ॥ ४५॥ इति श्रीरूपगोस्वामिविरचितस्तवमालायां श्रीकार्पण्यपञ्जिकास्तोत्रं समाप्तम् ।

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Shri Kartika Damodara Stotram: कार्तिक दामोदर स्तोत्रम्

Shri Kartika Damodara Stotram: कार्तिक दामोदर स्तोत्रम् Kartika Damodara Stotram:। मत्स्यावतार, कूर्मावतार, वराहावतार ।मत्स्याकृतिधरजय देवेश वेदविबोधककूर्मस्वरूप ।मन्दरगिरिधरसूकररूप भूमिविधारक जय देवेश ॥ १॥ । नृसिंहावतार, वामनावतार, परशुरामावतार ।काञ्चनलोचननरहरिरूप दुष्टहिरण्यकभञ्जन जय भोः । जय जय वामन बलिविध्वंसिन् दुष्टकुलान्तकभार्गवरूप ॥ २॥ । रामावतार, कृष्णावतार ।जयविश्रवसः सुतविध्वंसिन् जय कंसारे यदुकुलतिलक ।जयवृन्दावनचर देवेश देवकीनन्दन नन्दकुमार ॥ ३॥ । कृष्णावतार ।जय गोवर्धनधर वत्सारे धेनुकभञ्जन जय कंसारे ।रुक्मिणिनायक जय गोविन्द सत्यावल्लभ पाण्डवबन्धो ॥ ४॥ खगवरवाहन जय पीठारे जय मुरभञ्जन पार्थसखे त्वम् । Kartika Damodara Stotram भौमविनाशक दुर्जनहारिन् सज्जनपालक जय देवेश ॥ ५॥ शुभगुणपूरित जय विश्वेश जय पुरुषोत्तम नित्यविबोध ।भूमिभरान्तककारणरूप जय खरभञ्जन देववरेण्य ॥ ६॥ विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित सच्चरणाम्भुज कञ्जसुनेत्र ।सकलसुरासुरनिग्रहकारिन् पूतनिमारण जय देवेश ॥ ७॥ यद्भ्रूविभ्रममात्रात्तदिदं आकमलासनशम्भुविपाद्यम् । सृष्टिस्थितिलयमृच्चति सर्वं स्थिरचरवल्लभ स त्वं जय भो ॥ ८॥ जय यमलार्जुनभञ्जनमूर्ते गोपीकुचकुङ्कुमाङ्किताङ्ग ।पाञ्चालीपरिपालन जय भो जय गोपीजनरञ्जन जय भो ॥ ९॥ गर्भगतकृष्णस्तुतिः Garbhgatakrishnastutih जय रासोत्सवरत लक्ष्मीश सततसुखार्णव जय कञ्जाक्ष ।जय जननीकरपाशसुबद्ध हरणान्नवनीतस्य सुरेश ॥ १०॥ बालक्रीडानपर जय भो त्वं मुनिवरवन्दितपदपद्मेश ॥ कालियफणिफणमर्दन जय भो द्विजपत्यर्पितमत्सिविभोन्नम् ॥ ११॥ । बुद्धावतार, कल्क्यावतार ।क्षीराम्बुजिकृतनिलयन देव वरद महाबल जय जय कान्त ।दुर्जनमोहक बुद्धस्वरूप सज्जनबोधक कल्किस्वरूप ॥ १२॥ जय युगकृत् दुर्जन विध्वंसिन् ।जय जय जय भोः जय विश्वात्मन् ॥ १३॥ Kartika Damodara Stotram इति मन्त्रं पठन्नेव कुर्यान्नीराजनं बुधः ।घटिकाद्वयशिष्टायां स्नानं कुर्याद्यथाविधि ॥ १४॥ अन्यथा नरकं याति यावदिन्द्राश्चतुर्दश । इति श्री पञ्चरात्रगमे हंसब्रह्म संवादे श्रीकार्तिकदामोदरस्तोत्रम् ॥

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Karana Shatka Gitam: कारणषट्कगीतम्

Karana Shatka Gitam: कारणषट्कगीतम् Karana Shatka Gitam: मम जीवनस्य जीवनंउद्भाषितं नित्यशोभनंत्वमेव देवं त्वमेव सर्वंहृदि स्थिते सदा धारणंहे कृष्ण हे माधव हे देव त्वंसर्व कारणस्य कारणम् ॥ १॥ मम हृदयस्य हृदयंसद्भाषितं नित्य सदयंत्वमेव पूर्णं त्वमेव स्वर्णंप्रेमं आनन्दं अद्भुदयंहे कृष्ण हे माधव हे देव त्वंसर्व कारणस्य कारणम् ॥ २॥ मम विचारस्य विचारंसद्भाव-हॄद्भाव-सञ्चारंत्वमेव सत्यं त्वमेव नित्यंस्मृति-ज्ञानं सर्वाधारंहे कृष्ण हे माधव हे देव त्वंसर्व कारणस्य कारणम् ॥ ३॥ मम शरीरस्य आधारंत्वमेक नित्य निराधारंत्वमेव धर्मं त्वमेव कर्मंसर्वसूत्रस्य सूत्रधारंहे कृष्ण हे माधव हे देव त्वंसर्व कारणस्य कारणम् ॥ ४॥ खण्डिता (रूपगोस्वामिविरचिता) Khandita (Rupagoswamivirchita) मम सर्व सुखदायकंनित्यसुधा वेणु गायकंत्वमेव कर्ता त्वमेव धर्ता माता पिता आत्मनायकंहे कृष्ण हे माधव हे देव त्वंसर्व कारणस्य कारणम् ॥ ५॥ मम दिव्य नन्दनन्दनंआनन्दकन्द सुचन्दनंत्वमेव स्वामी हे अन्तर्यामी सर्व हॄदयस्य स्पन्दनंहे कृष्ण हे माधव हे देव त्वंसर्व कारणस्य कारणम् ॥ ६॥ रचयिता — श्रीकृष्णदासः

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Dream Interpretation: सपने में दिखने वाली ये चीजें देती हैं शुभ संकेत, जल्द मिल सकती है अच्छी खबर

Dream Interpretation: कई बार सपनों में हमें ऐसे संकेत मिल जाते हैं जो हमारे भविष्य के बारे में बताते हैं. जानते हैं कि किन चीजों का सपना देखना जीवन में बहुत अच्छा माना जाता है. Swapna Shastra in Hindi: स्वप्न शास्त्र के अनुसार हर सपने का कोई ना कोई अर्थ जरूर होता है. Dream Interpretation स्वप्न शास्त्र में हर सपने की विस्तार से व्याख्या की गई है. सपने हमें भविष्य में घटित होने वाले घटनाओं का संकेत देते हैं.  स्वप्नशास्त्र में कुछ चीजों का दिखना बहुत शुभ माना जाता है. यह सपने हमें अमीर बनने का संकेत देते हैं. आइए जानते हैं कि उन सपनों के बारे में जो बताते हैं कि आप जल्द ही आपको कुछ अच्छी खबर मिल सकती है. Dream Interpretation: सपने में इन चीजों का दिखना माना जाता है शुभ सपने में फल या फूल देखना शुभ संकेत होता है. यह सपना बतात है कि आपके जीवन में खुशियां और समृद्धि आने वाली है. सपने में पानी देखना भी शुभ माना जाता है. यह सपना संकेत देता है कि जल्द ही आपकी सारी ईच्छाएं पूरी होने वाली हैं. सपने में मंदिर देखना बहुत ही शुभ होता है. यह सपना बताता है कि आप जिस काम के लिए जा रहे हैं उसमें आपको भगवान का आशीर्वाद मिलेगा. सपने में सोना देखना धन प्राप्ति का संकेत है. यह सपना बताता है कि मां लक्ष्मी आप पर मेहरबान हैं. उनकी कृपा से आपको धन कमाने के नए अवसर मिलेंगे. इतना ही नहीं आपको पुराना फंसा धन भी मिलने की संभावना है. सपने में सांप देखना बहुत शुभ माना जाता है. अगर आप सपने में सांप को अपने बिल के पास जाते देखते हैं Dream Interpretation तो इसका मतलब है कि आपको जल्द कहीं से धन मिलने वाला है. सपने में जलता हुआ दीपक दिखना भी बहुत शुभ होता है. यह संकेत देता है कि आपके अच्छे दिन शुरू होने वाले हैं और आपको आर्थिक लाभ होगा. स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में कानों की बाली दिखने का सपना बहुत अच्छा होता है. ये सपना संकेत देता है कि आपको अचानक कहीं से धन लाभ हो सकता है जिसके बारे में आपने सोचा भी नहीं था. स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में खुद को अंगूठी पहने हुए देखना भी बहुत शुभ होता है. यह सपना बताता है कि मां लक्ष्मी की कृपा आपके ऊपर बनी हुई है और आपको कोई आर्थिक समस्या नहीं होगी. सपने में खुद को दूध पीते हुए देखने का मतलब है कि आप जल्द ही मालामाल होने वाले हैं. Dream Interpretation दूध पीने का सपना घर में आने वाली समृद्धि का संकेत देता है. गुलाब और कमल का फूल Dream Interpretation मां लक्ष्मी का प्रिय है. अगर आप सपने में इन फूलों को देखते हैं तो समझ लें कि मां लक्ष्मी की कृपा से आपके धन भंडार भरने वाले हैं. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Krishna Janmashtami Puja Niyam: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की संपूर्ण पूजा विधि, सभी 16 चरणों के सरल वैदिक मंत्रों के साथ

Krishna Janmashtami Puja Vidhi Mantra In Hindi: कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कई भक्त भगवान कृष्ण का षोडशोपचार पूजन करते हैं। ये पूजा सामान्य पूजा से थोड़ी बड़ी होती है। विशेषतौर पर वैष्णव संप्रदाय के लोग इस पूजा को करते हैं। यहां देखें जन्माष्टमी पूजा विधि एवं मंत्र। Krishna Janmashtami Puja Vidhi Mantra In Hindi: कृष्ण जन्माष्टमी का पावन त्योहार हिंदू धर्म के लोगों के लिए बेहद खास होता है। इस शुभ दिन पर लोग रात 12 बजे कृष्ण जी की विधि विधान पूजा करते हैं। इसके बाद उनकी आरती करके भोग लगाते हैं। यहां हम आपको जन्माष्टमी की षोडशोपचार पूजा के बारे में बताने जा रह हैं। जिसमें 16 चरण होते हैं और सभी चरणों में वैदिक मंत्रों होते हैं। यहां देखें कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि एवं मत्र। Krishna Janmashtami: ध्यानम् भगवान श्री कृष्ण का ध्यान पहले से अपने सम्मुख प्रतिष्ठित श्रीकृष्ण की नवीन प्रतिमा में करें। ॐ तमद्भुतं बालकम् अम्बुजेक्षणम्, चतुर्भुज शंख गदायुधायुदम् ।श्री वत्स लक्ष्मम् गल शोभि कौस्तुभं, पीतम्बरम् सान्द्र पयोद सौभगं ।।महार्ह वैदूर्य किरीटकुन्डल त्विशा परिष्वक्त सहस्रकुन्डलम् ।उद्धम कांचनगदा कङ्गणादिभिर् विरोचमानं वसुदेव ऐक्षत ।।ध्यायेत् चतुर्भुजं कृष्णं, शंख चक्र गदाधरम्।पीतम्बरधरं देवं माला कौस्तुभभूषितम् ।।ॐ श्री कृष्णाय नमः। ध्यानात् ध्यानम् समर्पयामि ।। आवाहनं भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करने के बाद नीचे लिखे मंत्र को पढ़ें और Krishna Janmashtami श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने आवाहन मुद्रा दिखाकर, उनका आवाहन करें। ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्।स भूमिं विश्वतो वृत्वा सुत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम् ।।आगच्छ देवदेवेश तेजोराशे जगत्पते ।क्रियमाणां मया पूजां गृहाण सुरसत्तमे ।।आवाहयामि देव त्वां वसुदेव कुलोद्भवम् ।प्रतिमायां सुवर्णादिनिर्मितायां यथाविधि ।।कृष्णम् च बलबनं च वसुदेवं च देवकीम् ।नन्दगोप यशोदाम् च सुभद्राम् तत्र पूजयेत् ।।आत्मा देवानां भुवनस्य गभों यथावशं चरति देवेषः ।घोषा इदस्य शण्विर न रूपं तस्मै वातायहविषा विधेम ।।श्री क्लीं कृष्णाय नमः, सपरिवार सहित, श्री बालकृष्णं आवाहयामि ।। आसनं भगवान श्री कृष्ण का आवाहन करने के बाद नीचे लिखे मंत्र को पढ़ कर उन्हें आसन के लिए पांच पुष्प अञ्जलि में लेकर अपने सामने छोड़ें। पुरुष एवेदगं सर्वम् यद्भुतं यच्छ भव्यम्।उतामृतत्वस्येशानः यदन्नेनातिरोहति ।।राजाधिराज राजेन्द्र बालकृष्ण महीपते।रत्न सिंहासनं तुभ्यं दास्यामि स्वीकुरु प्रभो।।ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। आसनं समर्पयामि।। पाद्य (चरण धोने के लिए जल) भगवान श्री कृष्ण को आसन प्रदान करने के बाद नीचे लिखे मंत्र को पढ़ते हुए पाद्य (चरण धोने के लिए जल) समर्पित करें। एतावानस्य महिमा अतो ज्यायागंश्च पूरुषः ।पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि।।अच्युतानन्द गोविन्द प्रणतार्ति विनाशन।पाहि मां पुन्डरीकाक्ष प्रसीद पुरुषोत्तम ।।ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । पादोयो पाचम् समर्पयामि।। अर्घ्य पाद्य समर्पण के बाद भगवान श्री कृष्ण को अर्घ्य (सिर के अभिषेक के लिए जल) समर्पित करें। त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुषः पादोऽस्येहाभवात्पुनः ।ततो विश्वङ्ग्यक्रामत् साशनानशने अभि ।।परिपूर्ण परानन्द नमो नमो कृष्णाय वेधसे।गृहाणार्ध्वम् मया दत्तम् कृष्णा विष्णोर्जनार्दन ।।ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। अर्घ्यम् समर्पयामि ।। आचमनीयं (भगवान को जल अर्पित करें) निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए आचमन के लिए Krishna Janmashtami श्रीकृष्ण को जल समर्पित करें। तस्माद्विराडजायत विराजो अधि पूरुषः।स जातो अत्यरिच्यत पश्चाद्ध‌मिमथो पुरः ।।नमः सत्याय शुद्धाय नित्याय ज्ञान रूपिणे ।गृहाणाचमनं कृष्ण सर्व लोकैक नायक ।।ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। आचमनीयं समर्पयामि ।। पूजा के बाद भूल से भी न करें ये काम, वरना मिल सकते हैं विपरीत परिणाम स्नानं आचमन समर्पण के बाद ये मंत्र पढ़ते हुए Krishna Janmashtami श्रीकृष्ण को जल से स्नान कराएं। यत्पुरुषेण हविषा देवा यज्ञमतन्वत ।वसन्तो अस्यासीदाज्यम् ग्रीष्म इध्मश्शरद्धविः ।।ब्रह्माण्डोदर मध्यस्थैस्तिथैश्च रघुनन्दन ।स्नापयिश्याम्यहं भक्त्या त्वं गृहाण जनार्दना ।।ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। मलापकर्श स्नानं समर्पयामि ।। वस्त्र स्नान कराने के बाद ये मंत्र पढ़ते हुए Krishna Janmashtami श्रीकृष्ण को मौली के रूप में वस्त्र समर्पित करें। ॐ तं यज्ञं बर्हिषि प्रौक्षन् पुरुषं जातमग्रतः ।तेन देवा अयजन्त साध्या ऋषयश्च ये।।ॐ उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।प्रादुर्भुनोऽस्मि राष्ट्रस्मिन्कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ।।तप्त कान्चन संकाशं पीताम्बरम् इदं हरे।सगृहाण जगन्नाथ बालकृष्ण नमोस्तुते।।ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। वस्त्रयुग्मं समर्पयामि ।। यज्ञोपवीत (जनेऊ) वस्त्र समर्पण के बाद ये मंत्र पढ़ें और श्रीकृष्ण को यज्ञोपवीत समर्पित करें। तस्माद्यज्ञात्सर्वहुतः संभृतं पृषदाज्यम् ।पशुगॅस्तागंश्चक्रे वायव्यान् आरण्यान् ग्राम्याश्चये ।।क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मी नाशयाम्यहम्।अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णदमे गृहात् ।।श्री बालकृष्ण देवेश श्रीधरानन्त राघव ।ब्रह्मसुत्रम्चोत्तरीयं गृहाण यदुनन्दन ।।ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । यज्ञोपवीतम् समर्पयामि ।। गंध (सुगंधित द्रव्य, इत्र चंदन आदि) Krishna Janmashtami ये मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को सुगन्धित द्रव्य समर्पित करें। तस्माद्यज्ञात्सर्वहुतः ऋचः सामानि जज्ञिरे।छन्दांसि जज्ञिरे तस्मात् यजुस्तस्मादजायत ।।गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम् ।।कुम्कुमागरु कस्तूरि कर्पूरं चन्दनं तता।तुभ्यं दास्यामि राजेन्द्र श्री कृष्णा स्वीकुरु प्रभो।।ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । गन्धम् समर्पयामि ।। आभरणं हस्तभूषण निम्नलिखित मंत्र पढ़ते हुए Krishna Janmashtami श्रीकृष्ण के श्रृंगार के लिए आभूषण समर्पित करें। गृहाण नानाभरणानि कृष्णाय निर्मितानि ।ललाट केठोत्तम कर्ण हस्त नितम्ब हस्तांगुलि भूषणानि ।।ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। आभरणानि समर्पयामि ।।ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। हस्तभूषणं समर्पयामि । नाना परिमल द्रव्य निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को विविध प्रकार के सुगन्धित द्रव्य समर्पित करें। ॐ अहिरिव भोगैः पर्येति बाहुं जयाया हेतिं परिबाधमानः ।हस्तघ्नो विश्वा वयुनानि विद्वान्पुमान्पुमांसं परि पातु विश्वतः ।।ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। Krishna Janmashtami नाना परिमल द्रव्यं समर्पयामि ।। पुष्प निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को पुष्प, तुलसी माला समर्पित करें। माल्यादीनि सुगन्धीनि, माल्यतादीनि वैप्रभो।मया हितानि पूजार्थम्, पुष्पाणि प्रतिगृह्यताम् ।।ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । पुष्पाणि समर्पयामि ।। अंग पूजा निम्न लिखित मंत्र पढ़ते हुए भगवन कृष्ण के अंग-देवताओं का पूजन करना चाहिए। इसके लिए बाएं हाथ में चावल, पुष्प और चंदन लेकर प्रत्येक मन्त्र का उच्चारण करते हुए दाहिने हाथ से श्री कृष्ण की मूर्ति के पास छोड़ें। ॐ श्री कृष्णाय नमः। पादी पूजयामि ।।ॐ राजीवलोचनाय नमः । गुल्फौ पूजयामि ।।ॐ नरकान्तकाय नमः। जानुनी पूजयामि ।।ॐ वाचस्पतये नमः। जंघै पूजयामि।।ॐ विश्वरूपाय नमः । ऊरून् पूजयामि ।।ॐ बलभद्रानुजाय नमः। गुहां पूजयामि।। ॐ विश्वमूर्तये नमः। जघनं पूजयामि।।ॐ गोपीजन प्रियाय नमः। कटिं पूजयामि ।।ॐ परमात्मने नमः। उदरं पूजयामि।।ॐ श्रीकण्टाय नमः। हृदयं पूजयामि।।ॐ यज्ञिने नमः। पार्थी पूजयामि।।ॐ त्रिविक्रमाय नमः । पृष्ठदेहं पूजयामि।।ॐ पद्मनाभाय नमः । स्कन्धौ पूजयामि।।ॐ सर्वास्त्रधारिणे नमः। बाहुन् पूजयामि।।ॐ कमलानाथाय नमः । हस्तान् पूजयामि।। ॐ वासुदेवाय नमः । कण्ठं पूजयामि ।।ॐ सनातनाय नमः । वदनं पूजयामि ।।ॐ वसुदेवात्मजाय नमः । नासिकां पूजयामि ।।ॐ पुण्याय नमः । श्रोत्रे पूजयामि ।।ॐ श्रीशाय नमः । नेत्राणि पूजयामि ।।ॐ नन्दगोपप्रियाय नमः। भ्रवौ पूजयामि ।।ॐ देवकीनन्दनाय नमः। भ्रूमध्यं पूजयामि ।।ॐ शकटासुरमर्धनाय नमः । ललाटं पूजयामि ।।ॐ श्री कृष्णाय नमः । शिरः पूजयामि ।।ॐ श्री बालकृष्णाय नमः सर्वांगाणि पूजयामि ।। धूपं निम्न लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को धूप समर्पित करें। वनस्पत्युद्भवो दिव्यो गन्धाढ्यो गन्धवुत्तमः ।बालकृष्ण महिपालो धूपोयं प्रतिगृह्यताम् ।।यत्पुरुषं व्यदधुः कतिधा व्यकल्पयन् ।मुखं किमस्य कौ बाहू कावूरू

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