August 2, 2025

Janmashtami Vrat: जन्माष्टमी पर भूलकर भी न करें ये काम, होगी धन हानि

Janmashtami Vrat: जन्माष्टमी का पर्व बेहद शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है। जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में हर साल धूमधाम के साथ मनाई जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami 2025) भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है तो आइए इस दिन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं। जन्माष्टमी का व्रत। सनातन धर्म में जन्माष्टमी का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त उपवास रखते हैं और अगले दिन या कृष्ण-जन्म के बाद पारण करते हैं। इसके अलावा कुछ साधक विशेष पूजा करने के लिए भगवान कृष्ण के मंदिर भी जाते हैं। जन्माष्टमी के दिन कुछ चीजों को करने से भगवान कृष्ण नाराज हो सकते हैं और आर्थिक स्थिति भी डगमगा सकती है। Janmashtami Vrat par Kya Na kare जन्माष्टमी पर क्या न करें? मास-मदिरा- सावन के महीने में भूलकर भी मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस महीने तामसिक भोजन का सेवन करने से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं। तुलसी की पत्तियां- तुलसी की पत्तियां भगवान शिव को अर्पित नहीं करनी चाहिए। Janmashtami Vrat तुलसी जी माता लक्ष्मी का रूप मानी गयी हैं, जो विष्णु जी की पत्नी हैं। इसलिए शिव पूजा के दौरान भूलकर भी तुलसी की पत्तियों को न तो शिव जी को भोग लगाना चाहिए और न ही तुलसी की माला से शिव मंत्र का जाप करना चाहिए। अपमान- कोशिश करें की इस महीने आप किसी का दिल न दुखाएं और वाद-विवाद से भी बचें। Janmashtami Vrat किसी का भी अपमान करने से बचें और न ही किसी का मजाक उड़ाएं। काले वस्त्र- धर्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ अवसर या फिर पूजा-पाठ के दौरान काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इसलिए कामिका एकादशी के दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। Janmashtami Vrat भगवान विष्णु की असीम कृपा पाने के लिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ रहेगा। भोग लगाते या बनाते समय ध्यान रखें 6 चीजें 1- ध्यान रखें भोग में लहसुन या प्याज का इस्तेमाल न किया गया हो। भोग हमेशा सात्विक चीजों का ही लगाया जाता है। 2- स्नान करने के बाद ही भगवान का भोग तैयार करें। 3- कन्हा जी को भोग लगाने से पहले भोग का सेवन या चखना अच्छा नहीं माना जाता है। 4- बासी चीजों से भोग तैयार नहीं किया जाता है। 5- भोग बिना तुलसी की पत्तियों के नहीं लगता है। 6- आरती कर लेने के बाद भोग लगाकर आचवनी की जाती है और घंटी भी बजाते हैं।

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Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बना शुभ वृद्धि योग: इन 3 राशियों पर बरसेगी श्रीहरि की विशेष कृपा

Krishna Janmashtami: देशभर में 15 अगस्त 2025 को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा, जिसे कृष्ण जन्माष्टमी भी कहते हैं। जन्माष्टमी के पावन दिन वृद्धि योग का भी महासंयोग बन रहा है जिसका शुभ प्रभाव किन तीन राशिवालों के ऊपर पड़ने वाला है, उनके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व और भी विशेष है क्योंकि 15 अगस्त 2025 को ‘वृद्धि योग’ का संयोग बन रहा है। यह योग शुभ कार्यों और साधना के लिए बेहद फलदायी माना जाता है। जो भी भक्त इस दिन विधिपूर्वक व्रत, पूजन और दान करते हैं, उन्हें श्रीकृष्ण की कृपा और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। krishna Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए जन्माष्टमी के पर्व का खास महत्व है, जिसका उत्सव हर साल बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में भाद्रपद महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था, जो जगत के पालनहार भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं। Janmashtami इसलिए हर साल इस तिथि पर जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। कृष्ण जी को प्रसन्न करने के लिए कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। इस साल 15 अगस्त 2025 को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। ज्योतिष दृष्टि से भी जन्माष्टमी का दिन खास है क्योंकि 15 अगस्त 2025 को वृद्धि योग का महासंयोग बन रहा है। चलिए जानते हैं उन तीन राशियों के राशिफल और उपायों के बारे में, जिन्हें इस शुभ दिन कृष्ण जी की विशेष कृपा प्राप्त होगी। वृद्धि योग का समय ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 15 अगस्त की सुबह 9:05 बजे से अगले दिन 16 अगस्त की सुबह 6:32 बजे तक वृद्धि योग रहेगा। इस समय के दौरान श्रीकृष्ण की पूजा, रासलीला, झांकियां, उपवास और दान-पुण्य का विशेष महत्व रहेगा। Janmashtami इस योग में किए गए धार्मिक कार्य अति शुभ फल प्रदान करते हैं। These three zodiac signs will get special blessings on Shri Krishna Janmashtami: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इन तीन राशियों को मिलेगा विशेष आशीर्वाद इस बार की जन्माष्टमी उन लोगों के लिए बेहद लाभकारी रहने वाली है, जिनकी राशि वृषभ, कर्क और सिंह है। आइए जानते हैं इन राशियों का राशिफल और सरल उपाय। वृषभ राशि वृषभ को श्रीकृष्ण की प्रिय राशि माना जाता है, जिसके जातकों के ऊपर भगवान कृष्ण की विशेष कृपा रहती है। इस साल भी जन्माष्टमी के पावन पर्व पर वृषभ राशिवालों को श्रीकृष्ण का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा। साथ ही वृद्धि योग का शुभ प्रभाव पड़ेगा। Janmashtami जहां एक तरफ कारोबारियों को अटके पैसे मिलने से मानसिक शांति मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ सैलरी बढ़ने से नौकरी कर रहे जातकों का मन खुश रहेगा। कृष्ण जी और राधा रानी के आशीर्वाद से विवाहित कपल के बीच प्रेम बढ़ेगा और घर में खुशहाली का आगमन होगा। उपाय- घर में कृष्ण जी और राधा रानी की मूर्ति स्थापित करें। कर्क राशि वृषभ के अलावा कर्क राशि को भी कृष्ण जी की प्रिय राशियों में से एक माना जाता है, जिसके जातकों के ऊपर ये मेहरबान रहते हैं। सिंगल जातकों को इस साल अपने व्रत का पूरा फल मिलेगा। 15 अगस्त के आसपास सच्चे प्यार से मुलाकात हो सकती है। जिन लोगों की शादी हो चुकी है, उनके परिवारवालों के बीच चल रही दुश्मनी खत्म होगी। पुराने निवेश से मुनाफा होने के कारण आर्थिक स्थिति को बल मिलेगा। उपाय- पानी का दान करें। सिंह राशि जन्माष्टमी पर वृद्धि योग के महासंयोग से सिंह राशिवालों के घर में खुशियां पहले से और ज्यादा बढ़ जाएंगी। किसी रिश्तेदार से झगड़ा चल रहा है तो वो सुलझ जाएगा। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे जातकों को सफलता मिलेगी और जिंदगी में थोड़ी स्थिरता आएगी। जिन लोगों का खुद का बिजनेस है या जो जातक नौकरी कर रहे हैं, उनके आर्थिक पक्ष में थोड़ा सुधार होगा। उपाय- पीले रंग की मिठाई का दान करें।

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Heramb Sankashti Chaturthi 2025 Date: कब है भादो माह की हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी, इस तरह करें गणेश जी को प्रसन्न

Heramb Sankashti Chaturthi: गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। भाद्रपद माह में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आने वाले सभी विघ्न दूर हो जाते हैं और साधक पर गणेश जी की कृपा बनी रहती है। संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखा जाता है और चंद्रोदय के बाद ही इस व्रत का पारण किया जाता है। Heramb Sankashti Chaturthi 2025 Subh Muhurat: संकष्टी चतुर्थी मुहूर्त भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 12 अगस्त को सुबह 8 बजकर 40 मिनट पर हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 13 अगस्त को सुबह 6 बजकर 35 मिनट पर होगा। ऐसे में भाद्रपद माह की हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार 12 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन चन्द्रोदय का समय रात 8 बजकर 59 मिनट पर रहेगा। संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि Heramb Sankashti Chaturthi Puja Vidhi संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। Heramb Sankashti Chaturthi पूजा स्थल को साफ करने के बाद गंगाजल का छिड़काव करें। एक चौकी पर हरा या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा के दौरान गणेश जी को चंदन, कुमकुम, हल्दी, अक्षत और फूल आदि अर्पित करें। धूप-दीप जलाएं और गणेश जी को मोदक या फिर लड्डूओं का भोग लगाएं। संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ें और गणेश जी की आरती करें। शाम को चंद्र दर्शन के बाद, चंद्रमा को अर्घ्य दें और अपना व्रत खोलें। संकष्टी चतुर्थी व्रत की महिमा: Heramb Sankashti Chaturthi Vrat Mahima नारद पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए। शाम के समय संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा को सुननी चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं । इतना ही नहीं संकष्टी चतुर्थी का पूजा से घर में शांति बनी रहती है। घर की सारी परेशानियां दूर होती हैं। गणेश जी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस दिन चंद्रमा को देखना भी शुभ माना जाता है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता है, साल भर में 12-3 संकष्टी व्रत रखे जाते हैं। हर संकष्टी व्रत की एक अलग कहानी होती है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में संकष्टी चतुर्थी को गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। ध्यान दें – संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित होता है। जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन रखा जाता है। इसीलिए प्रायः ऐसा देखा गया है कि, कभी-कभी संकष्टी चतुर्थी व्रत, चतुर्थी तिथि से एक दिन पूर्व अर्थात तृतीया तिथि के दिन ही होता है। कहा जाता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत नियमानुसार ही संपन्न करना चाहिए, तभी इसका पूरा लाभ मिलता है। Heramb Sankashti Chaturthi इसके अलावा गणपति बप्पा की पूजा करने से यश, धन, वैभव और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। Ganesh Ji ke Mantra: गणेश जी के मंत्र 1. वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥ 2. एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्ं। विघ्नशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥ 3. ॐ ग्लौम गौरी पुत्र,वक्रतुंड,गणपति गुरु गणेश ग्लौम गणपति,ऋदि्ध पति। मेरे दूर करो क्लेश।। 4. एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्ं। विघ्नशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥

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