April 16, 2025

Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye:वरूथिनी एकादशी इस दिन, जानें इस दिन क्या करें व क्या नहीं

Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye :वरूथिनी एकादशी व्रत के भी कुछ नियम हैं। वरूथिनी एकादशी पर कुछ चीजों को करने से भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं और आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। Varuthini Ekadashi 2025, वरूथिनी एकादशी एकादशी इस दिन :वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरूथिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस तिथि को जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार वैशाख माह में वरूथिनी एकादशी व्रत 24 अप्रैल को किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से साधक को जीवन में किसी भी चीज कमी नहीं होती है। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। वरूथिनी एकादशी के दिन क्या करें (What to do on the day of Varuthini Ekadashi) द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करना चाहिए। वरूथिनी एकादशी (Varuthini ekadashi ke din kya karna chahie) के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। सच्चे मन से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। पीले फल, मिठाई और तुलसी के पत्ते का भोग लगाएं। अन्न और धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। वरूथिनी एकादशी के दिन क्या न करें? तुलसी- तुलसी की पत्तियां विष्णु भगवान को बेहद प्रिय हैं, Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye जिसके बिना भगवान को भोग नहीं लगाया जाता है। इसलिए वरूथिनी एकादशी के दिन तुलसी की पत्तियों को न तो स्पर्श करना चाहिए और न ही इन्हें तोड़ना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तुलसी जी व्रत रखती हैं। इसलिए इन्हें स्पर्श करने से बचना चाहिए। मास-मदिरा- वरूथिनी एकादशी के दिन मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye इस दिन तामसिक भोजन का सेवन करने से भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं। काले वस्त्र- धर्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरूथिनी एकादशी के दिन काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। भगवान विष्णु की कृपा दृष्टि बनाए रखने के लिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ रहेगा। चावल- वरूथिनी एकादशी के दिन चावल का सेवन करने की मनाही है। मान्यता है वरूथिनी एकादशी के दिन चावल का सेवन करने से दोष लगता है। वरूथिनी एकादशी 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Varuthini Ekadashi 2025 Date and Shubh Muhurat) Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 अप्रैल को शाम 04 बजकर 43 मिनट से शुरू होगी और 24 अप्रैल को दोपहर 02 बजकर 32 मिनट पर तिथि खत्म होगी। ऐसे में वरूथिनी एकादशी व्रत 24 अप्रैल को किया जाएगा। वरूथिनी एकादशी पूजा विधि (Varuthini Ekadashi Puja Vidhi) Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye:विष्णु मंत्र 1. शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥2. दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया, लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।। वरूथिनी एकादशी 2025 पारण टाइम (Varuthini Ekadashi 2025 Paran time) Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। वरूथिनी एकादशी का व्रत का पारण 25 अप्रैल को किया जाएगा। Varuthini Ekadashi Per Kya Karna Chahiye इस दिन व्रत पारण का टाइम सुबह 05 बजकर 46 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 23 मिनट तक है। व्रत का पारण करने के बाद विशेष चीजों का दान भी जरूर करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वादशी तिथि दान करने से एकादशी व्रत का पूरा फल मिलता है।

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Adi Shankaracharya Jayanti 2025 Mai Kab Hai:आदि शंकराचार्य जयंती 2025: तिथि, महत्व

Adi Shankaracharya Jayanti 2025 Mai Kab Hai:आदि शंकराचार्य जयंती महान भारतीय दार्शनिक और आध्यात्मिक सुधारक  जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के जन्म की याद में मनाई जाती है , जिन्होंने 8वीं शताब्दी के दौरान अद्वैत वेदांत को पुनर्जीवित किया और हिंदू दर्शन को एकीकृत किया। उनकी शिक्षाएँ भारतीय विचार, आध्यात्मिकता और संस्कृति को प्रभावित करती रहती हैं। 2025 में भारत इस पूज्य संत की 1237वीं जयंती मनाएगा जिन्होंने धर्म और आध्यात्मिक एकता स्थापित करने के लिए पूरे देश का भ्रमण किया था। Adi Shankaracharya Jayanti 2025 Mai Kab Hai:आदि शंकराचार्य जयंती 2025: तिथि और तिथि दिनांक : शुक्रवार, 2 मई 2025 तिथि : पंचमी तिथि , शुक्ल पक्ष , वैशाख मास पंचमी तिथि आरंभ : 1 मई 2025 को सुबह 11:23 बजे से पंचमी तिथि समाप्त : 2 मई 2025 को सुबह 09:14 बजे आदि शंकराचार्य की जीवन गाथा आदि शंकराचार्य (adi shankaracharya) के माता-पिता भगवान शिव के उपासक थे। एक बार भगवान शिव ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। तभी शंकराचार्य के पिता ने भगवान से एक ऐसे पुत्र का वरदान मांगा, जो सर्वज्ञानी हो और सतायु हो। Adi Shankaracharya Jayanti 2025 Mai Kab Hai तब भगवान शिव वे कहा कि तुम्हारा बालक या तो सर्वज्ञ हो सकता है, या फिर सतायु। दोनों नहीं हो सकता। तब शंकराचार्य (adi shankaracharya) के पिता ने सर्वज्ञ संतान का वरदान मांगा। भगवान के आशीर्वाद से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। जिसका नाम शंकर रखा गया। जब वह तीन वर्ष के थे, तभी उनके पिता की मौत हो गई थी। Adi Shankaracharya Jayanti 2025 Mai Kab Hai बालक शंकर ही अपनी बुद्धिमत्ता के कारण आगे जाकर शंकराचार्य कहलाए। बालक शंकर का रूझान संन्यासी बनने की तरफ था। लेकिन इसको लेकर माता राजी नहीं थी। तभी एक दिन नदी में नहाते समय एक मगरमच्छ ने शंकराचार्य जी का पैर पकड़ लिया, इस वक्त का फायदा उठाते शंकराचार्यजी ने अपने मां से कहा कि, माँ मुझे संन्यास लेने की आज्ञा दे दीजिए, नहीं तो यह मगरमच्छ मुझे खा जाएगा। Adi Shankaracharya Jayanti 2025 Mai Kab Hai इससे भयभीत होकर माता ने तुरंत उन्हें संन्यासी होने की आज्ञा प्रदान कर दी। फिर, उन्होंने दुनिया को प्रसिद्ध किया और अपने जीवन पथ पर चले गए। शंकराचार्य ने 16 और 32 वर्ष की आयु के बीच पूरे भारत की यात्रा की। Adi Shankaracharya Jayanti 2025 Mai Kab Hai उन्होंने यात्रा के दौरान वेदों के संदेशों को लोगों तक पहुंचाया। लोगों को हिंदू धर्म के प्रति जागरूक किया, हमारे ग्रंथों के बारे में लोगों को अवगत कराया। शंकराचार्य जी की शिक्षाएं आज भी दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। आदि शंकराचार्य (adi shankaracharya) के कार्य आदि शंकराचार्य (adi shankaracharya) एक अभूतपूर्व कवि थे Adi Shankaracharya Jayanti 2025 Mai Kab Hai और उन्होंने अपने हृदय में एक अति प्रेम के साथ परमात्मा को धारण किया। उनकी रचनाओं में 72 ध्यान और भक्तिपूर्ण भजन शामिल हैं। उनमें निर्वाण शाल्कम, सौंदर्य लहरी, मनीषा पंचकम और शिवानंद लहरी शामिल है। उन्होंने प्राथमिक ग्रंथों जैसे भगवद गीता, ब्रह्म सूत्र और 12 महत्वपूर्ण उपनिषदों पर 18 भाष्य भी लिखे हैं। Adi Shankaracharya Jayanti 2025 Mai Kab Hai शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत दर्शन की मूल बातों पर एक विलक्षण या अविभाजित ब्रह्म के सत्य की व्याख्या करते हुए 23 पुस्तकें भी लिखीं। आत्म बोध, विवेक चूड़ामणि, उपदेश सहस्री और वाक्य वृत्ति उनमें से कुछ हैं। आदि शंकराचार्य के उद्धरण आइए आदि शंकराचार्य (adi shankaracharya) द्वारा दिए गए इन उद्धरणों के साथ उनकी जयंती मनाएं:- धन, सम्बन्ध, मित्र और यौवन पर अभिमान मत करो। पलक झपकते ही ये सब समय के साथ छीन लिया जाता है। इस मायावी संसार को त्याग कर परमात्मा को जानो और प्राप्त करो। किसी को मित्र या शत्रु, भाई या चचेरे भाई की दृष्टि से न देखें। मित्रता या शत्रुता के विचारों में अपनी मानसिक ऊर्जा को नष्ट न करें। Adi Shankaracharya Jayanti 2025 Mai Kab Hai सर्वत्र स्वयं को खोजते हुए, सबके प्रति मिलनसार और समान विचार वाले, सबके साथ समान व्यवहार वाले बनें । आसक्तियों और द्वेषों से भरे स्वप्न के समान जगत् जागरण तक सत्य प्रतीत होता है। यह जानते हुए कि मैं शरीर से भिन्न हूँ, Adi Shankaracharya Jayanti 2025 Mai Kab Hai मुझे शरीर की उपेक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। यह एक ऐसा वाहन है जिसका उपयोग मैं दुनिया के साथ लेन-देन करने के लिए करता हूं। यह वह मंदिर है जिसके भीतर शुद्ध आत्मा है। बंधनों से मुक्त होने के लिए बुद्धिमान व्यक्ति को एक-स्व और अहंकार-स्व के बीच भेदभाव का अभ्यास करना चाहिए। केवल उसी से आप स्वयं को शुद्ध सत्ता, चेतना और आनंद के रूप में पहचानते हुए आनंदमय जीवन जी सकते हैं। आनंद उन्हें ही मिलता है, जो आनंद की तलाश नहीं करते हैं। प्रत्येक वस्तु अपने स्वभाव की ओर बढ़ने लगती है। मैं हमेशा सुख की कामना करता हूं, Adi Shankaracharya Jayanti 2025 Mai Kab Hai जो कि मेरा वास्तविक स्वरूप है। मेरा स्वभाव मेरे लिए कभी बोझ नहीं है। खुशी मेरे लिए कभी बोझ नहीं है, जबकि दुख है। मोती की मां में चांदी की उपस्थिति की तरह, दुनिया तब तक वास्तविक लगती है Adi Shankaracharya Jayanti 2025 Mai Kab Hai जब तक कि आत्मा, अंतर्निहित वास्तविकता का एहसास नहीं हो जाता। शंकराचार्य जयंती का महत्व आदि शंकराचार्य की जयंती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है – यह भारत के आध्यात्मिक पुनर्जागरण का उत्सव है । मुख्य महत्व: बौद्धिक जांच और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देता है । अद्वैत (आत्मा और ब्रह्म की एकता) के माध्यम से विविधता में एकता को सुदृढ़ करता है । वैदिक और उपनिषदिक ज्ञान को सरल रूप में पुनर्जीवित करता है । आदि शंकराचार्य की शिक्षाएँ 1. अद्वैत वेदांत “आत्मा और ब्रह्म में कोई अंतर नहीं है।” 2. ब्रह्म सत्यं जगन मिथ्या “ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है, संसार एक भ्रम है।” 3. आत्म-साक्षात्कार मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को कर्मकाण्डों से ऊपर उठकर आत्मसाक्षात्कार करना होगा। 4. अलगाव संसार में रहो, लेकिन अनासक्त रहो – भौतिकवाद की अपेक्षा ज्ञान पर ध्यान केन्द्रित करो। भारत भर में उत्सव केरल (कालडी) : मंदिर में जुलूस और वैदिक मंत्रोच्चार सहित भव्य आयोजन। कर्नाटक (श्रृंगेरी शारदा पीठम) : शारदा देवी और आचार्य पादुकाओं की औपचारिक पूजा। उत्तराखंड (ज्योतिर्मठ) : हिमालय में जुलूस, आध्यात्मिक सभाएं और हवन। ओडिशा (पुरी गोवर्धन पीठ) और गुजरात (द्वारका) : मठों और जगन्नाथ मंदिर में अनुष्ठान। आदि शंकराचार्य की आधुनिक प्रासंगिकता आध्यात्मिकता के प्रति उनका तर्क-आधारित

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