March 31, 2025

बजरंग बाण | Bajrang Baan

Bajrang Baan (बजरंग बाण) : भौतिक मनोकामनाओं की पूर्ति के लिये बजरंग बाण/Bajrang Baan का अमोघ विलक्षण प्रयोग करे, अपने इष्ट कार्य की सिद्धि के लिए मंगल अथवा शनिवार के दिन हनुमानजी के सामने लाल आसन पर बैठकर 108 बार पाठ करे। जप के प्रारम्भ में यह संकल्प अवश्य लें कि आपका कार्य जब भी होगा, Bajrang Baan अब शुद्ध उच्चारण से हनुमान जी की छवि पर ध्यान केन्द्रित करके बजरंग बाण का जाप प्रारम्भ करें। “श्रीराम” से लेकर “सिद्ध करैं हनुमान” तक एक बैठक में ही इसकी एक माला जप करनी है। गूगुल की सुगन्ध देकर जिस घर में बगरंग बाण/Bajrang Baan का नियमित पाठ होता है, वहाँ दुर्भाग्य, दारिद्रय, भूत-प्रेत का प्रकोप और असाध्य शारीरिक कष्ट आ ही नहीं सकते, समयाभाव में जो व्यक्ति नित्य पाठ करने में असमर्थ हो, Bajrang Baan उन्हें कम से कम प्रत्येक मंगलवार को यह जप अवश्य करना चाहिए। दीप दान Bajrang Baan हनुमान जी के अनुष्ठान मे अथवा पूजा आदि में दीपदान का विशेष महत्त्व होता है। Bajrang Baan पाँच अनाजों (गेहूँ, चावल, मूँग, उड़द और काले तिल) को अनुष्ठान से पूर्व एक-एक मुट्ठी लेकर शुद्ध गंगाजल में भिगो दें। अनुष्ठान वाले दिन इन अनाजों को पीसकर उनका दीया बनाएँ। Bajrang Baan बत्ती के लिए अपनी लम्बाई के बराबर कलावे का एक तार लें अथवा एक कच्चे सूत को लम्बाई के बराबर काटकर लाल रंग में रंग लें। इस धागे को पाँच बार मोड़ लें। इस प्रकार के धागे की बत्ती को सुगन्धित तिल के तेल में डालकर प्रयोग करें। समस्त पूजा काल में यह दिया जलता रहना चाहिए। हनुमानजी के लिये गूगुल की धूनी की भी व्यवस्था रखें। Bajrang Baan:बजरंग बाण ध्यान श्रीराम अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं।दनुज वन कृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्।। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं।रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।। दोहा निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।। चौपाई जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।। जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।। जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।। आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।। जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।। बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा।। अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा।। लाह समान लंक जरि गई। जै जै धुनि सुर पुर में भई।। अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।। जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख करहु निपाता।। जै गिरधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर।। ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारू बज्र सम कीलै।। गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ। महाराज निज दास उबारों।। सुनि हंकार हुंकार दै धावो। बज्र गदा हनि विलम्ब न लावो।। ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा।। सत्य होहु हरि सत्य पाय कै। राम दुत धरू मारू धाई कै।। जै हनुमन्त अनन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।। पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा।। वन उपवन जल-थल गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।। पाँय परौं कर जोरि मनावौं। अपने काज लागि गुण गावौं।। जै अंजनी कुमार बलवन्ता। शंकर स्वयं वीर हनुमंता।। बदन कराल दनुज कुल घालक। भूत पिशाच प्रेत उर शालक।। भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल वीर मारी मर।। इन्हहिं मारू, तोंहि शमथ रामकी। राखु नाथ मर्याद नाम की।। जनक सुता पति दास कहाओ। ताकी शपथ विलम्ब न लाओ।। जय जय जय ध्वनि होत अकाशा। सुमिरत होत सुसह दुःख नाशा।। उठु-उठु चल तोहि राम दुहाई। पाँय परौं कर जोरि मनाई।। ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनु हनुमंता।। ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल।। अपने जन को कस न उबारौ। सुमिरत होत आनन्द हमारौ।। ताते विनती करौं पुकारी। हरहु सकल दुःख विपति हमारी।। ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा। कस न हरहु दुःख संकट मोरा।। हे बजरंग, बाण सम धावौ। मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ।। हे कपिराज काज कब ऐहौ। अवसर चूकि अन्त पछतैहौ।। जन की लाज जात ऐहि बारा। धावहु हे कपि पवन कुमारा।। जयति जयति जै जै हनुमाना। जयति जयति गुण ज्ञान निधाना।। जयति जयति जै जै कपिराई। जयति जयति जै जै सुखदाई।। जयति जयति जै राम पियारे। जयति जयति जै सिया दुलारे।। जयति जयति मुद मंगलदाता। जयति जयति त्रिभुवन विख्याता।। ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा। पावत पार नहीं लवलेषा।। राम रूप सर्वत्र समाना। देखत रहत सदा हर्षाना।। विधि शारदा सहित दिनराती। गावत कपि के गुन बहु भाँति।। तुम सम नहीं जगत बलवाना। करि विचार देखउं विधि नाना।। यह जिय जानि शरण तब आई। ताते विनय करौं चित लाई।। सुनि कपि आरत वचन हमारे। मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे।। एहि प्रकार विनती कपि केरी। जो जन करै लहै सुख ढेरी।। याके पढ़त वीर हनुमाना। धावत बाण तुल्य बनवाना।। मेटत आए दुःख क्षण माहिं। दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं।। पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।। डीठ, मूठ, टोनादिक नासै। परकृत यंत्र मंत्र नहीं त्रासे।। भैरवादि सुर करै मिताई। आयुस मानि करै सेवकाई।। प्रण कर पाठ करें मन लाई। अल्प-मृत्यु ग्रह दोष नसाई।। आवृत ग्यारह प्रतिदिन जापै। ताकी छाँह काल नहिं चापै।। दै गूगुल की धूप हमेशा। करै पाठ तन मिटै कलेषा।। यह बजरंग बाण जेहि मारे। ताहि कहौ फिर कौन उबारे।। शत्रु समूह मिटै सब आपै। देखत ताहि सुरासुर काँपै।। तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई। रहै सदा कपिराज सहाई।। दोहा प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान।। तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।।

बजरंग बाण | Bajrang Baan Read More »

Hanuman Jayanti kab ki hai: हनुमान जयंती कब है? नोट कर लें सही तिथि और पूजा विधि

Hanuman Jayanti kab ki hai: हर साल चैत्र माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बजरंग बली हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान राम और हनुमान जी पूजा करने से जीवन से सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है, तो आइए जानते हैं कि इस साल कब मनाई जाएगी हनुमान जयंती. Hanuman Jayanti Date and Importance: हनुमान जन्मोत्सव हिंदू धर्म में एक पवित्र पर्व है, जो भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार संकट मोचन हनुमान जी आज भी धरती पर विद्यमान हैं और भक्तों के कष्टों को हरने वाले देवता माने जाते हैं। हर साल यह पर्व चैत्र माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। Hanuman Jayanti kab ki hai इस दिन श्री राम और हनुमान जी का सच्चे मन से स्मरण करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। श्री हनुमान जन्मोत्सव या हनुमान जयंती श्री राम भक्त, वानर राज, वीर हनुमान जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्री हनुमंत शक्ति और ऊर्जा के प्रतीक हैं, वह जादुई शक्तियों, भूत, प्रेत एवं बुरी आत्माओं पर विजय प्राप्त करने वाले देव के रूप मे पूजे जाते हैं। Lord Hanuman: मंगलवार के दिन ऐसे करें हनुमान जी की पूजा, जीवन के संकटों से मिलेगा छुटकारा हनुमान जयंती भारत के विभिन्न क्षेत्रों मे अलग-अलग समय पर मनाई जाती है, उत्तर भारत मे यह त्यौहार मुख्य रूप से चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है। हनुमान जयंती के दिन उपवास रखने वाले व्यक्ति को एक दिन ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करना चाहिए। हनुमान जयंती तिथि |Hanuman Jayanti 2025 Date हिंदू पंचांग के अनुसार, हनुमान जयंती यानी चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल को सुबह 3 बजकर 21 मिनट पर होगी. साथ ही तिथि का समापन अगले दिन 13 अप्रैल को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा. Hanuman Jayanti kab ki hai उदया तिथि के अनुसार, हनुमान जयंती 12 अप्रैल को मनाई जाएगी. श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर:गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, भारत Hanuman Jayanti kab ki hai:हनुमान जन्मोत्सव 2025 कब है? इस वर्ष 12 अप्रैल 2025 को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 12 अप्रैल को सुबह 3:21 बजे से शुरू होकर 13 अप्रैल सुबह 5:51 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल को मनाया जाएगा। हनुमान जयंती पूजा विधि |Hanuman Jayanti Puja Vidhi Hanuman Jayanti kab ki hai हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी के साथ भगवान राम और माता सीता की पूजा की जाती है. इस दिन सुबह उठकर स्नान कर लाल रंग के वस्त्र पहने. उसके बाद हनुमान जी को सिंदूर, लाल रंग के फूल, तुलसी दल, चोला और बूंदी के लड्डू का प्रसाद अर्पित करें. उसके बाद मंत्र जाप करें. फिर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें. अंत में आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें. April 2025 vrat tyohar list:अप्रैल 2025 के व्रत त्योहार की लिस्ट, हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया कब जानें हनुमान जयंती का महत्व |Hanuman Jayanti Significance Hanuman Jayanti kab ki hai हिंदू धर्म में हनुमान जी को 8 चिरंजीवियों में से एक माना जाता है. कहते हैं वह आज भी पृथ्वी पर मौजूद हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, Hanuman Jayanti kab ki hai जिससे उसके जीवन के सभी कष्ट और संकट दूर होते हैं. इस दिन पूजा में उन्हें फूल, माला, सिंदूर चढ़ाने के साथ बूंदी या बेसन के लड्डू, तुलसी दल अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं. पूजा विधि         “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्॥” हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें। आरती कर प्रसाद वितरित करें। हनुमान जन्मोत्सव के इस शुभ अवसर पर विधिपूर्वक पूजा करने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है Hanuman Jayanti kab ki hai और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।  Bandi Mochan Hanuman Stotra | बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र

Hanuman Jayanti kab ki hai: हनुमान जयंती कब है? नोट कर लें सही तिथि और पूजा विधि Read More »

Jain Festival 2025 Calendar 2025: में कब-कब मनाए जाएंगे जैन धर्म के प्रमुख त्योहार, महावीर स्वामी के बारे में जानें ये ख़ास बातें

Jain Festival 2025 Calendar 2025 : महावीर जयंती इस साल चार अप्रैल को है. Jain Festival 2025 Calendar 2025 महावीर जयंती जैन समुदाय का विशेष पर्व होता है. इस जयंती को भगवान महावीर स्वामी के जन्म के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. Jain Festival 2025 Calendar 2025 महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे. उनका जन्म ईसा पूर्व 599 वर्ष माना जाता है. Jain Festival 2025 Calendar 2025 उनके पिता राजा सिद्धार्थ और माता रानी त्रिशला थीं और बचपन में उनका नाम वर्द्धमान था. Mahavir Jayanti 2025: महावीर जयंती 2025 कब है? Jain Festival 2025 Calendar 2025 महावीर जयंती हिंदू चंद्र कैलेंडर में चैत्र महीने के 13वें दिन आती है, Jain Festival 2025 Calendar 2025 जो आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर में मार्च या अप्रैल में आती है। इस वर्ष, महावीर जयंती 10 अप्रैल, 2025 (गुरुवार) को मनाई जाएगी। Jain calendar 2025 Festival: जैन धर्म, अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह जैसे महान सिद्धांतों पर आधारित, विश्व के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। इस धर्म के संस्थापक ऋषभदेव माने जाते हैं। जैन धर्म का एक विशेष कैलेंडर होता है, Jain Festival 2025 Calendar 2025 जिसमें उनके सभी व्रत और त्योहारों की जानकारी दी जाती है। जैसे हिंदू कैलेंडर में त्योहारों का उल्लेख होता है, वैसे ही जैन कैलेंडर में भी विभिन्न व्रत और पर्वों की तिथियां निर्धारित होती हैं। यहां 2025 के जैन कैलेंडर में महत्वपूर्ण व्रत और पर्वों के बारे में जानकारी है। जैन कैलेंडर के 12 महीने हिंदू कैलेंडर की तरह ही जैन कैलेंडर में भी 12 महीने होते हैं। प्रत्येक महीना 30 दिनों का होता है। इन 12 महीनों के नाम, कार्तक, मगसर, पोष, महा, फागन, चैत्र, वैशाख, जेठ, आषाढ़, श्रावण, भादरवो और आसो है। Jain Festival 2025 Calendar 2025 जैन धर्म का नववर्ष दिवाली के अगले दिन से शुरू होता है। यह दिन वीर निर्वाण संवत के अनुसार वर्ष का पहला दिन माना जाता है। जैन धर्म के अनुयायी अपने व्रत और त्योहारों को आध्यात्मिक अनुशासन और आत्मिक शुद्धि के लिए मनाते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं साल 2025 में जैन धर्म के कौन से त्योहार किस दिन मनाए जाएंगे।  जैन धर्म किन चीज़ों पर आधारित है? हिंदू धर्म की तरह जैन धर्म का भी कोई संस्थापक नहीं है. जैन धर्म 24 तीर्थंकरों के जीवन और शिक्षा पर आधारित है. तीर्थंकर यानी वो आत्माएं जो मानवीय पीड़ा और हिंसा से भरे इस सांसारिक जीवन को पार कर आध्यात्मिक मुक्ति के क्षेत्र में पहुंच गई हैं. सभी जैनियों के लिए 24वें तीर्थंकर महावीर जैन का ख़ास महत्व है. महावीर इन आध्यात्मिक तपस्वियों में से अंतिम तीर्थंकर थे. लेकिन, जहां औरों की ऐतिहासिकता अनिश्चित है वहीं, महावीर जैन के बारे में पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि उन्होंने इस धरती पर जन्म लिया. अहिंसा के इस उपदेशक का जन्म क्षत्रिय जाति में हुआ. वो गौतम बुद्ध के समकालीन थे. Jain Festival 2025 Calendar 2025:महावीर जयंती का उत्सव  Jain Festival 2025 Calendar 2025:महावीर जयंती को दुनिया भर में जैन धर्मावलंबियों द्वारा जीवंत उत्सव और गहरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस उत्सव में आम तौर पर ये शामिल होते हैं: जुलूस और रथ यात्राएँ : कई शहरों और कस्बों में भव्य जुलूस निकाले जाते हैं, जिन्हें रथ यात्रा के नाम से जाना जाता है। Jain Festival 2025 Calendar 2025 भगवान महावीर की मूर्तियों को भव्य रूप से सजाए गए रथों पर ले जाया जाता है, साथ में भक्त भजन गाते हैं, धार्मिक गीत गाते हैं और पारंपरिक नृत्य करते हैं। मंदिर भ्रमण और प्रार्थना : जैन धर्मावलंबी जैन मंदिरों (देरासार) में प्रार्थना करने और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए जाते हैं। भगवान महावीर की मूर्तियों का विशेष अभिषेक (औपचारिक स्नान) किया जाता है। व्याख्यान और प्रवचन: धार्मिक नेता और विद्वान भगवान महावीर के जीवन और शिक्षाओं पर व्याख्यान और प्रवचन देते हैं। ये सत्र जैन दर्शन के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं और श्रोताओं को अपने दैनिक जीवन में इसके सिद्धांतों को लागू करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। धर्मार्थ गतिविधियाँ और सामुदायिक सेवा: इस शुभ दिन पर, जैन लोग विभिन्न धर्मार्थ गतिविधियों में संलग्न होते हैं, जैसे कि जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और दवाएँ दान करना। वे रक्तदान शिविर और निःशुल्क चिकित्सा जाँच शिविर भी आयोजित करते हैं। पशु आश्रयों को अक्सर सहायता दी जाती है, और जानवरों को बचाने और उनकी रक्षा करने के प्रयास किए जाते हैं। उपवास और ध्यान: कई जैन लोग महावीर जयंती पर उपवास रखते हैं, भोजन से परहेज करते हैं या केवल कुछ प्रकार के भोजन का सेवन करते हैं। वे आंतरिक शांति और आध्यात्मिक विकास की तलाश में ध्यान और चिंतन के लिए भी समय समर्पित करते हैं। बूचड़खानों से पशुओं को मुक्त करना: बूचड़खानों में जाने वाले पशुओं को मुक्त करना एक विशेष रूप से प्रभावशाली प्रथा है। करुणा का यह कार्य अहिंसा के सिद्धांत का प्रतीक है और सभी जीवित प्राणियों की रक्षा के लिए जैन प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। सजावट और रोशनी: जैन मंदिरों और घरों को रंग-बिरंगे झंडों, फूलों और रोशनी से सजाया जाता है, जिससे उत्सव का माहौल बनता है। किसी भी जीव को नुकसान पहुँचाए बिना तैयार किए गए विशेष जैन व्यंजन परोसे जाते हैं। 2025: जैन धर्म के प्रमुख पर्व-त्योहार Jain Festival 2025 Calendar 2025 2 जनवरी 2025 यतीन्द्र सुरेश्वर दिवस   गुरुवार 02 जनवरी 2025 त्रिस्तुति     गुरुवार 06 जनवरी 2025 श्री राजेंद्र सूरीश्वर दिवस सोमवार 26 जनवरी 2025  शीतलनाथ जन्म तप   रविवार 27 जनवरी 2025 मेरु त्रयोदशी     सोमवार 27 जनवरी 2025  आदिनाथ निर्वाण कल्याणक  सोमवार 28 जनवरी 2025 ऋषभदेव मोक्ष   मंगलवार 02 फरवरी 2025  दशलक्षण (3/3) प्रारम्भ रविवार 04 फरवरी 2025 मर्यादा महोत्सव   मंगलवार 11 फरवरी 2025  श्री जीतेन्द्र रथ यात्रा  मंगलवार 11 फरवरी 2025   दशलक्षण (3/3) समाप्त  मंगलवार 07 मार्च 2025   अष्टान्हिका (3/3) प्रारम्भ   शुक्रवार 14 मार्च 2025  अष्टान्हिका (3/3) समाप्त शुक्रवार 02 अप्रैल 2025  दशलक्षण (1/3) प्रारम्भ बुधवार 04 अप्रैल 2025 आयंबिल ओली प्रारंभ शुक्रवार 10 अप्रैल 2025 महावीर जयंती  गुरुवार 11 अप्रैल 2025 दशलक्षण (1/3) समाप्त     शुक्रवार 12 अप्रैल 2025  आयंबिल ओली अंत  शनिवार 07 मई 2025 श्री महावीर स्वामी कैवल्य ज्ञान दिवस बुधवार 13 मई 2025 ज्येष्ठ जिनवार व्रत प्रारंभ मंगलवार 24 मई 2025  श्री अनंतनाथ जन्म तप शनिवार 11 जून 2025 

Jain Festival 2025 Calendar 2025: में कब-कब मनाए जाएंगे जैन धर्म के प्रमुख त्योहार, महावीर स्वामी के बारे में जानें ये ख़ास बातें Read More »

Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai : अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत कब है? जानें डेट, पूजन व व्रत पारण का समय

Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai: कामदा एकादशी व्रत चैत्र नवरात्रि के राम नवमी के बाद की पहली एकादशी है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह एकादशी आमतौर पर मार्च या अप्रैल महीने में आती है। Kamada Ekadashi 2025: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी व्रत रखा जाएगा। यह अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत होगा। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि एकादशी व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। इस बार Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai कामदा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि व रवि योग बनने से इस दिन का महत्व बढ़ रहा है। जानें अप्रैल माह की पहली एकादशी कब है और पूजन व व्रत पारण का शुभ मुहूर्त- कब है कामदा एकादशी | Kamada Ekadashi 2025 Date  Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 7 अप्रैल की शाम 4 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो जाएगी और इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 8 अप्रैल को 5 बजकर 42 मिनट पर होगा. ऐसे में कामदा एकादशी का व्रत 8 अप्रैल, मंगलवार के दिन रखा जाएगा.  कब किया जाएगा कामदा एकादशी का पारण (Kamada Ekadashi Paran Time)  Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai कामदा एकादशी का पारण (Paran) द्वादशी तिथि पर होता है. ऐसे में 9 अप्रैल बुधवार के दिन कामदा एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा. व्रत पारण करने यानी व्रत समाप्त करने का शुभ मुहूर्त 9 अप्रैल सुबह 7 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगा और 9 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. इस समयावधि में एकादशी व्रत का पारण करना शुभ होगा. Ram Navami Kab hai 2025:आने वाले साल में कब है, राम नवमी पर करें इन मंत्रों का जाप, नोट कर लें सही तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त कामदा एकादशी की पूजा विधि | Kamada Ekadashi Puja Vidhi  कामदा एकादशी Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai के दिन सुबह-सवेरे उठकर स्नान पश्चात व्रत का प्रण लिया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूरे मनोभाव से पूजा की जाती है. पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस रंग को श्रीहरि का प्रिय रंग कहा जाता है. पीले रंग के वस्त्र पहनना, चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाना, पीले फूल, पीले फल और पीले फल को पूजा में शामिल करना बेहद शुभ होता है. एकादशी की पूजा (Ekadashi Puja) में भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जाता है. पूजा करते हुए एकादशी की व्रत कथा पढ़ी जाती है, आरती होती है, भोग लगाने के बाद पूजा संपन्न की जाती है और भगवान विष्णु के आशीर्वाद की कामना की जाती है.  April 2025 vrat tyohar list:अप्रैल 2025 के व्रत त्योहार की लिस्ट, हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया कब जानें कामदा एकादशी पूजन मुहूर्त- ब्रह्म मुहूर्त- 04:32 ए एम से 05:18 ए एम अभिजित मुहूर्त- 11:58 ए एम से 12:48 पी एम विजय मुहूर्त- 02:30 पी एम से 03:20 पी एम अमृत काल- 06:13 ए एम से 07:55 ए एम सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:03 ए एम से 07:55 ए एम रवि योग- 06:03 ए एम से 07:55 ए एम कामदा एकादशी का महत्व- हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, कामदा एकादशी व्रत रखने से कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai राक्षस योनि से मुक्ति मिलने की मान्यता है। जगत के पालन हार भगवान विष्णु की कृपा से सभी पाप मिट जाते हैं। कामदा एकादशी व्रत पारण का मुहूर्त- कामदा एकादशी व्रत का पारण 09 अप्रैल 2025 को किया जाएगा। Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 02 मिनट से सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। पारण तिति के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय रात 10 बजकर 55 मिनट है। may 2025 vrat tyohar list: मई 2025 व्रत और त्योहारों की संपूर्ण सूची एवं महत्व (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai : अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत कब है? जानें डेट, पूजन व व्रत पारण का समय Read More »