January 19, 2025

Guru Stotra | गुरु स्तोत्र

गुरु स्तोत्र: गुरु स्तोत्र स्कंद पुराण में पाए जाने वाले गुरु गीता के 14 श्लोकों का संग्रह है। यह गुरु की महिमा पर भगवान शिव और पार्वती के बीच वार्तालाप है। गुरु स्तोत्र सतगुरु की स्तुति है। गुरु अंधकार को दूर करता है। गुरु वह है जो सत्य के अंधकार को दूर करता है और हमें आत्मज्ञान प्रदान करता है। गुरु स्तोत्र सतगुरु की स्तुति है जिसने हमें आत्मदर्शन का आशीर्वाद दिया है। यह हमारे जीवन में गुरु के मार्गदर्शन के लिए गुरु और भगवान के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति भी है। अगर हमारे पास अभी तक कोई गुरु नहीं है, तो गुरु स्तोत्र का जाप भगवान से हमारी सच्ची इच्छा व्यक्त करना है कि हमें सतगुरु से मार्गदर्शन का आशीर्वाद मिले। जब सच्ची मांग होती है, तो भगवान गुरु को भेजते हैं। गुरु स्तोत्र का जाप करने से गुरु भक्ति भी विकसित और मजबूत होगी। हमें अपने गुरु के प्रति आभारी होना चाहिए और गुरु से भक्ति और समर्पण के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण है हमारा अपना प्रयास। मन को शुद्ध करते रहें। जब हम गुरु के योग्य हो जाते हैं, तो वे हम तक पहुँच जाते हैं। गुरु स्तोत्र का जाप हमारा स्वयं का प्रयास है। गुरु स्तोत्र के लाभ: दिन की सबसे अच्छी शुरुआत, स्नान करना भौतिक शरीर को शुद्ध करने और हमें तरोताजा करने का कार्य है। गुरु स्तोत्र का जाप करने से हम अपनी वाणी को शुद्ध करते हैं और अपने हृदय में भक्ति/कृतज्ञता का आह्वान करते हैं।सतगुरु/भगवान के साथ बंधन को मजबूत करता है गुरु स्तोत्र का जाप गुरु को याद करने में मदद करता है और गुरु के साथ हमारे बंधन को मजबूत करता है। संपूर्ण गुरु-परंपरा (महान गुरुओं की वंशावली) की कृपा हमारे माध्यम से प्रवाहित होती है।विनम्रता, प्रत्येक छंद गुरु को नमस्कार है- तस्मै श्री गुरवे नमः। यह विनम्रता की अभिव्यक्ति है। हम जितने विनम्र होंगे, हमारे लिए आत्म-ज्ञान की खोज करना उतना ही आसान होगासमर्पण, हम अपनी अपूर्णता से पैदा हुई इच्छाओं के कारण बार-बार जन्म लेते हैं। केवल आत्म के रूप में मेरी पूर्णता के ज्ञान के माध्यम से, हम इच्छाओं और पुनर्जन्म के बंधन से बाहर निकलने में सक्षम होंगे।बार-बार जप करने से गुरु (गुरु स्तोत्र) में विश्वास मजबूत होता है जो समर्पण और मुक्ति की ओर ले जाता है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए जिस व्यक्ति को वांछित परिणाम नहीं मिल रहे हैं और जिसकी स्थिति में गिरावट आ रही है, उसे नियमित रूप से गुरु स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। गुरु स्तोत्र | Guru Stotra || श्री महादेव्युवाच || गुरुर्मन्त्रस्य देवस्य धर्मस्य तस्य एव वा | विशेषस्तु महादेव ! तद् वदस्व दयानिधे || श्री गुरु स्तोत्रम् श्री महादेवी (पार्वती) ने कहा : हे दयानिधि शंभु ! गुरुमंत्र के देवता अर्थात् श्री गुरुदेव एवं उनका आचारादि धर्म क्या है – इस बारे में वर्णन करें | || श्री महादेव उवाच || जीवात्मनं परमात्मनं दानं ध्यानं योगो ज्ञानम् | उत्कल काशीगंगामरणं न गुरोरधिकं न गुरोरधिकं ||1|| श्री महादेव बोले: जीवात्मा-परमात्मा का ज्ञान, दान, ध्यान, योग पुरी, काशी या गंगा तट पर मृत्यु – इन सबमें से कुछ भी श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है, श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है ||1|| प्राणं देहं गेहं राज्यं स्वर्गं भोगं योगं मुक्तिम् | भार्यामिष्टं पुत्रं मित्रं न गुरोरधिकं न गुरोरधिकं ||2|| प्राण, शरीर, गृह, राज्य, स्वर्ग, भोग, योग, मुक्ति, पत्नी, इष्ट, पुत्र, मित्र – इन सबमें से कुछ भी श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है, श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है ||2|| वानप्रस्थं यतिविधधर्मं पारमहंस्यं भिक्षुकचरितम् | साधोः सेवां बहुसुखभुक्तिं न गुरोरधिकं न गुरोरधिकं ||3|| वानप्रस्थ धर्म, यति विषयक धर्म, परमहंस के धर्म, भिक्षुक अर्थात् याचक के धर्म – इन सबमें से कुछ भी श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है, श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है ||3|| विष्णो भक्तिं पूजनरक्तिं वैष्णवसेवां मातरि भक्तिम् | विष्णोरिव पितृसेवनयोगं न गुरोरधिकं न गुरोरधिकं ||4|| भगवान विष्णु की भक्ति, उनके पूजन में अनुरक्ति, विष्णु भक्तों की सेवा, माता की भक्ति, श्रीविष्णु ही पिता रूप में हैं, इस प्रकार की पिता सेवा – इन सबमें से कुछ भी श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है, श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है ||4|| प्रत्याहारं चेन्द्रिययजनं प्राणायां न्यासविधानम् | इष्टे पूजा जप तपभक्तिर्न गुरोरधिकं न गुरोरधिकं ||5|| प्रत्याहार और इन्द्रियों का दमन, प्राणायाम, न्यास-विन्यास का विधान, इष्टदेव की पूजा, मंत्र जप, तपस्या व भक्ति – इन सबमें से कुछ भी श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है, श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है ||5|| काली दुर्गा कमला भुवना त्रिपुरा भीमा बगला पूर्णा | श्रीमातंगी धूमा तारा न गुरोरधिकं न गुरोरधिकं ||6|| काली, दुर्गा, लक्ष्मी, भुवनेश्वरि, त्रिपुरासुन्दरी, भीमा, बगलामुखी (पूर्णा), मातंगी, धूमावती व तारा ये सभी मातृशक्तियाँ भी श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है, श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है ||6|| मात्स्यं कौर्मं श्रीवाराहं नरहरिरूपं वामनचरितम् | नरनारायण चरितं योगं न गुरोरधिकं न गुरोरधिकं ||7|| भगवान के मत्स्य, कूर्म, वाराह, नरसिंह, वामन, नर-नारायण आदि अवतार, उनकी लीलाएँ, चरित्र एवं तप आदि भी श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है, श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है ||७|| श्रीभृगुदेवं श्रीरघुनाथं श्रीयदुनाथं बौद्धं कल्क्यम् | अवतारा दश वेदविधानं न गुरोरधिकं न गुरोरधिकं ||8|| भगवान के श्री भृगु, राम, कृष्ण, बुद्ध तथा कल्कि आदि वेदों में वर्णित दस अवतार श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है, श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है ||8|| गंगा काशी कान्ची द्वारा मायाऽयोध्याऽवन्ती मथुरा | यमुना रेवा पुष्करतीर्थ न गुरोरधिकं न गुरोरधिकं ||9|| गंगा, यमुना, रेवा आदि पवित्र नदियाँ, काशी, कांची, पुरी, हरिद्वार, द्वारिका, उज्जयिनी, मथुरा, अयोध्या आदि पवित्र पुरियाँ व पुष्करादि तीर्थ भी श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है, श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है ||9|| गोकुलगमनं गोपुररमणं श्रीवृन्दावन-मधुपुर-रटनम्| एतत् सर्वं सुन्दरि ! मातर्न गुरोरधिकं न गुरोरधिकं ||10|| हे सुन्दरी ! हे मातेश्वरी ! गोकुल यात्रा, गौशालाओं में भ्रमण एवं श्री वृन्दावन व मधुपुर आदि शुभ नामों का रटन – ये सब भी श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है, श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है ||10|| तुलसीसेवा हरिहरभक्तिः गंगासागर-संगममुक्तिः | किमपरमधिकं कृष्णेभक्तिर्न गुरोरधिकं न गुरोरधिकं ||11|| तुलसी की सेवा, विष्णु व शिव की भक्ति, गंगा सागर के संगम पर देह त्याग और अधिक क्या कहुं परात्पर भगवान श्री कृष्ण की भक्ति भी श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है, श्री गुरुदेव से बढ़कर नहीं है ||11|| एतत्

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Ganesha Stotra | गणेश स्तोत्र

Ganesha Stotra:गणेश स्तोत्र: भगवान गणेश को सभी देवी-देवताओं में सबसे शक्तिशाली माना जाता है। उन्हें कई उपाधियाँ और विशेषण दिए गए हैं। उन्हें आरंभ के देवता और बाधाओं को दूर करने वाले के रूप में भी जाना जाता है। कई धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष अवसरों पर उनकी पूजा की जाती है, खासकर किसी वाहन को खरीदने या किसी उद्यम को शुरू करने जैसे कामों की शुरुआत में। उन्हें चार भुजाओं और हाथी के सिर वाले एक घड़े के रूप में दर्शाया गया है, जो एक चूहे पर सवार हैं। गणेश स्तोत्र भगवान गणेश की पूजा करने का एक बहुत ही शक्तिशाली तरीका है, भगवान गणेश की पूजा आपकी सभी समस्याओं को हल करने का एक बहुत अच्छा उपाय है। यह सभी के लिए बहुत मददगार है और आप गणेश स्तोत्र की मदद से अपनी सभी समस्याओं को हल कर सकते हैं और इस उपाय की मदद से आप सभी खुशियाँ पा सकते हैं। गणेश स्तोत्र सभी के लिए बेहद फायदेमंद है और आप इस उपाय की मदद से अपनी सभी समस्याओं को हल कर सकते हैं। गणेश स्तोत्र के लाभ भगवान गणेश को ब्रह्मा, विष्णु और शिव से जुड़ा हुआ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अन्य सभी देवता भगवान गणेश से ही प्रेरित हैं। भगवान गणेश की कृपा से व्यक्ति का जीवन स्वस्थ और खुशहाल बनता है। ऐसा व्यक्ति सभी कष्टों पर विजय पाने में सक्षम होता है। भगवान गणेश के पास अपार ज्ञान है और वे सभी कष्टों को दूर करते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए भगवान गणेश की पूजा की जाती है। शास्त्रों में भगवान गणेश की पूजा करने के कई तरीके बताए गए हैं। गणेश स्तोत्र का प्रयोग नारद पुराण में किया गया है और यह भगवान गणेश के सबसे प्रभावशाली स्तोत्रों में से एक है। जैसा कि मैंने पहले भी बताया कि इससे सभी तरह की परेशानियाँ दूर होती हैं। प्रतिदिन गणेश स्तोत्र का जाप करने से व्यक्ति सभी तरह की बाधाओं से मुक्त होता है और सभी दुखों का नाश होता है। भगवान गणेश के भिन्न-भिन्न नामों का उच्चारण करना चाहिए जैसे वक्रतुंड, एकदंत, कृष्ण पिंगाक्ष, गजवक्र, लंबोदर, चतु विकट, विघ्न हर्ता मंगल कर्ता, धूम्रवर्ण, भालचंद्र, विनायक, गणपति आदि। इन बारह नामों का पूजन दिन के प्रत्येक तीन काल में करना चाहिए। इससे मनुष्य को हर प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है, आप अपने सभी भय से मुक्त हो जाते हैं। यह बहुत शक्तिशाली उपाय है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: जो व्यक्ति जीवन में सफल होना चाहता है उसे बेहतर परिणामों के लिए गणेश स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। गणेश स्तोत्र | Ganesha Stotra मुदा करात्त मॊदकं सदा विमुक्ति साधकम् ।कलाधरावतंसकं विलासिलॊक रक्षकम् ।अनायकैक नायकं विनाशितॆभ दैत्यकम् ।नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ 1 ॥नतॆतराति भीकरं नवॊदितार्क भास्वरम् ।नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्ढरम् ।सुरॆश्वरं निधीश्वरं गजॆश्वरं गणॆश्वरम् ।महॆश्वरं तमाश्रयॆ परात्परं निरन्तरम् ॥ 2 ॥समस्त लॊक शङ्करं निरस्त दैत्य कुञ्जरम् ।दरॆतरॊदरं वरं वरॆभ वक्त्रमक्षरम् ।कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करम् ।मनस्करं नमस्कृतां नमस्करॊमि भास्वरम् ॥ 3 ॥अकिञ्चनार्ति मार्जनं चिरन्तनॊक्ति भाजनम् ।पुरारि पूर्व नन्दनं सुरारि गर्व चर्वणम् ।प्रपञ्च नाश भीषणं धनञ्जयादि भूषणम् ।कपॊल दानवारणं भजॆ पुराण वारणम् ॥ 4 ॥नितान्त कान्ति दन्त कान्ति मन्त कान्ति कात्मजम् ।अचिन्त्य रूपमन्त हीन मन्तराय कृन्तनम् ।हृदन्तरॆ निरन्तरं वसन्तमॆव यॊगिनाम् ।तमॆकदन्तमॆव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥ 5 ॥महागणॆश पञ्चरत्नमादरॆण यॊ‌உन्वहम् ।प्रजल्पति प्रभातकॆ हृदि स्मरन् गणॆश्वरम् ।अरॊगतामदॊषतां सुसाहितीं सुपुत्रताम् ।समाहितायु रष्टभूति मभ्युपैति सॊ‌உचिरात् ॥

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Snake Dream Meaning: अगर आपको भी सपने में दिखाई देता है सांप तो हो जाएं सावधान, जानिए क्या होता है मतलब

Snake Dream Meaning: सोते हुए सपनों का दिखना आम बात है. लेकिन स्वपन शास्त्र की मानें तो सपने हमें यूं ही नहीं दिखते है. बल्कि उसका कोई न कोई मतलब जरूर होता है, क्योंकि सपने हमें हमारे भविष्य में घटित होने वाली शुभ अशुभ घटनाओं की तरफ इशारा करती है. ज्यादात्तर  लोगों के सपने में सांप दिखाई देते हैं. किसी को सपने में सांप फन उठाए हुए दिखते हैं तो किसी को डंसते हुए दिखाई देते हैं. ऐसे में आइए स्वपन शास्त्र के हिसाब से जानते हैं कि सपने में अलग-अलग तरीके से सांप दिखने का क्या-क्या मतलब होता है. सपने में सांप मारना Sapne me saap marna अगर आपको सपने में सांप दिखाई देता है और आप उस सपने को मार देते हैं तो स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इस तरह के सपना शुभ संकेत देने वाला होता है। इस तरह के सपने आने का मतलब होता है कि आप जल्द ही अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले हैं। सांप का झुंड देखना sap ka jund dekhna कई लोगों को आपने अक्सर कहते सुना होगा की उन्हे सपने में सांप की झुंड दिखाई देता है। यदि आप सपने में सांप का झुंड देखते हैं तो यह अशुभ संकेत माना जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार इस तरह के सपने का अर्थ होता है कि आपके जीवन में कई सारी परेशानियां आने की आशंका है। सपने में काला सांप देखने का अर्थ sapne me kala sap dekhne ka arth अगर आपको सपने में काला सांप दिखाई देता है को यह शुभ संकेत माना जाता है। सपने में काला सांप देखने का अर्थ है कि आप किसी बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। इसके अलावा आपके मान सम्मान में कमी आना, धन दौलत की हानि होने का भी संकेत इस तरह का सपना देता है। सपने में सांप को भागते हुए देखना sapne me sap ko bhagte huye dekhna यदि नौकरीपेशा वर्ग के जातक सपने में सांप को खुद के पीछे भागते हुए देखते हैं तो इसका अर्थ है कि आने वाले समय में उनके द्वारा किए गए काम की सराहना की जाएगी। साथ ही दिन प्रतिदिन कामयाबी बढ़ती हुई चली जाएगी। वहीं, अगर इस तरह का सपने किसी बीमार व्यक्ति या उसके परिवार वालों को आता है तो इसका अर्थ है कि बीमार व्यक्ति को शारीरिक मानसिक कष्ट से मुक्ति मिलेगी। सपने में भूरा सांप देखना sapne me bhura sap dekhna अगर आप सपने में भूरे रंग का सांप देखते हैं तो इसका अर्थ है कि आपके जीवन में कुछ अच्छा होने वाला है। आपको सफलता मिल सकती है। वहीं, अगर आप सपने में देखते हैं कि भूरे रंग का सांप अपने बिस्तर के नीचे है तो इसका अर्थ है कि आप काफी चिंता में है। वहीं, अगर सपने में भूरे रंग का सांप आप पर हमला करते हैं तो यह इस बात का संकेत है कि आप मुसीबत में फंस सकते हैं। सपने में सांप को हाथ में पकड़े हुए देखना sapne me sap ko hath me pakde huye dekhna अगर आप सपने में किसी सांप को हाथ में पकड़े हुए देखते हैं तो इसका अर्थ है कि आपका जीवन पूरी तरह से बदलने वाला है। इस तरह का सपना शुभ माना जाता है। इस तरह के सपनों में सफेद सांप को हाथ में पकड़े देखना ज्यादा शुभ माना जाता है।

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Magh Mashik Shivratri:कब है साल की पहली मासिक शिवरात्रि? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग

शिवरात्रि व्रत साल मे 12/13 बार आने वाला मासिक व्रत का त्यौहार है, अतः इस व्रत को मासिक शिवरात्रि भी कहा जाता है। जोकि अमावस्या से पहिले कृष्णपक्ष की चतुर्दशी के दिन आता है। मासिक शिवरात्रियों में से दो सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं, फाल्गुन त्रियोदशी महा शिवरात्रि के नाम से प्रसिद्ध है और दूसरी सावन शिवरात्रि के नाम से जानी जाती है। यह त्यौहार भगवान शिव-पार्वती को समर्पित है, इस दिन भक्तभगवान शिव के प्रतीक शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते हैं। यह लोकप्रिय हिंदू व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। कोई भी व्रत या पूजा तभी उत्तम फल देती है जब उसे सही विधि से किया जाता है। तो आइए जानते हैं क्या है मासिक शिवरात्रि व्रत करने की सही विधि और अनुष्ठान। मासिक शिवरात्रि शुभ मुहूर्त (Masik Shivratri Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 27 जनवरी को रात 08 बजकर 34 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 28 जनवरी को शाम 07 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगी। मासिक शिवरात्रि पर निशा काल में शिव-शक्ति की पूजा होती है। अतः 27 जनवरी को माघ माह की शिवरात्रि मनाई जाएगी। मासिक शिवरात्रि शुभ योग (Masik Shivratri Shubh Yog) मासिक शिवरात्रि पर हर्षण योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का संयोग देर रात 28 जनवरी को रात 01 बजकर 57 मिनट तक है। इसके साथ ही भद्रावास का भी संयोग बन रहा है। भद्रावास रात 08 बजकर 34 मिनट से है। इन योग में भगवान शिव की पूजा करने से साधक की हर एक मनोकामना पूरी होगी। पंचांग सूर्योदय – सुबह 07 बजकर 12 मिनट पर सूर्यास्त – शाम 05 बजकर 56 मिनट पर शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 26 मिनट से 06 बजकर 19 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 21 मिनट से 03 बजकर 04 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 54 मिनट से 06 बजकर 20 मिनट तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 07 मिनट से 01 बजे तक मासिक शिवरात्रि व्रत की पूजा विधि क्या है? ❀ चतुर्दशी तिथि पर सुबह उठकर स्नान करें और सफ़ेद रंग के वस्त्र धारण करें।❀ भगवन के सामने द्वीप प्रज्वलित कर व्रत का संकल्प लिया जाता है ।❀ पूरे दिन उपवास करने के बाद प्रदोष काल में किसी मंदिर में जाकर पूजा करनी चाहिए।❀ यदि आप मंदिर नहीं जा सकते हैं तो पूजा स्थल या घर के साफ-सुथरे स्थान पर शिवलिंग स्थापित करके पूजा करनी चाहिए।❀ शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, घी, बेलपत्र और गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए।❀ पूजा और अभिषेक के दौरान शिव जी के पंचाक्षरी मंत्र नमः शिवाय का जाप करते रहें।

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Som Pradosh Vrat 2025:शुभ योग में साल 2025 का पहला सोम प्रदोष व्रत, जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

Som Pradosh Vrat 2025: वैसे तो रोजाना घरों में भोलेनाथ की पूजा की जाती है, लेकिन प्रदोष तिथि विशेष है। मान्यता है कि इस दिन महादेव की पूजा करने से साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है, साथ ही भाग्य में भी वृद्धि होती हैं। माह की त्रयोदशी तिथि का प्रदोष काल मे होना, प्रदोष व्रत होने का सही कारण है। प्रदोष काल सूर्यास्त से 45 मिनट पहिले प्रारम्भ होकर सूर्यास्त के बाद 45 मिनट होता है।प्रदोष का दिन जब साप्ताहिक दिवस सोमवार को होता है उसे सोम प्रदोष कहते हैं, मंगलवार को होने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष तथा शनिवार के दिन प्रदोष को शनि प्रदोष कहते हैं। वैसे तो त्रयोदशी तिथि ही भगवान शिव की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ है। परंतु प्रदोष के समय शिवजी की पूजा करना और भी लाभदायक है। ध्यान देने योग्य तथ्य: प्रदोष व्रत एक ही देश के दो अलग-अलग शहरों के लिए अलग हो सकते हैं। चूँकि प्रदोष व्रत सूर्यास्त के समय, त्रयोदशी के प्रबल होने पर निर्भर करता है। तथा दो शहरों का सूर्यास्त का समय अलग-अलग हो सकता है, इस प्रकार उन दोनो शहरों के प्रदोष व्रत का समय भी अलग-अलग हो सकता है। इसीलिए कभी-कभी ऐसा भी देखने को मिलता है कि, प्रदोष व्रत त्रयोदशी से एक दिन पूर्व अर्थात द्वादशी तिथि के दिन ही हो जाता है। सूर्यास्त होने का समय सभी शहरों के लिए अलग-अलग होता है अतः प्रदोष व्रत करने से पूर्व अपने शहर का सूर्यास्त समय अवश्य जाँच लें, चाहे वो शहर एक ही देश मे क्यों ना हों। प्रदोष व्रत चन्द्र मास की शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष की दोनों त्रयोदशी के दिन किया जाता है। Som Pradosh Vrat 2025:सोम प्रदोष व्रत 2025 तिथि पंचागं के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरूआत 26 जनवरी के दिन रात 8 बजकर 54 मिनट पर होगी, इस तिथि का समापन 27 जनवरी को रात 8 बजकर 34 मिनट पर होगा। ऐसे में 27 जनवरी 2025 को प्रदोष व्रत रखा जाएगा, इस दिन सोमवार होने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा जाएगा। सोम प्रदोष व्रत 2025 मुहूर्त:Som Pradosh Vrat 2025 Muhurat ज्योतिषियों की मानें तो 27 जनवरी को सोम प्रदोष व्रत के दिन महादेव की पूजा के लिए मुहूर्त शाम 5 बजकर 56 मिनट से रात 8 बजकर 34 मिनट तक रहने वाला है, आप इस अवधि में महादेव की आराधना कर सकते हैं। सोम प्रदोष व्रत शुभ योग Som Pradosh Vrat 2025 Subh yoog इस साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मूल नक्षत्र बन रहा है, जो रात 09: 02 मिनट तक रहेगा, इस दौरान हर्षण योग भी बनेगा। प्रदोष व्रत पूजा विधि Pradosh Vrat Puja vidhi प्रदोष व्रत की महिमा Pradosh Vrat ki Mahima प्रदोष व्रत को रखने से दो गायों को दान देने के समान पुन्य फल प्राप्त होता है। प्रदोष व्रत को लेकर एक पौराणिक तथ्य सामने आता है कि एक दिन जब चारों और अधर्म की स्थिति होगी, अन्याय और अनाचार का एकाधिकार होगा, मनुष्य में स्वार्थ भाव अधिक होगी। व्यक्ति सत्कर्म करने के स्थान पर नीच कार्यों को अधिक करेगा। उस समय में जो व्यक्ति त्रयोदशी का व्रत रख, शिव आराधना करेगा, उस पर शिव कृ्पा होगी। इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति जन्म-जन्मान्तर के फेरों से निकल कर मोक्ष मार्ग पर आगे बढता है. उसे उतम लोक की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत का महत्व ❀ मान्यता और श्रध्दा के अनुसार स्त्री-पुरुष दोनों यह व्रत करते हैं। कहा जाता है कि इस व्रत से कई दोषों की मुक्ति तथा संकटों का निवारण होता है. यह व्रत साप्ताहिक महत्त्व भी रखता है।❀ रविवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत से आयु वृद्धि तथा अच्छा स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है।❀ सोमवार के दिन त्रयोदशी पड़ने पर किया जाने वाला व्रत आरोग्य प्रदान करता है और इंसान की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।❀ मंगलवार के दिन त्रयोदशी का प्रदोष व्रत हो तो उस दिन के व्रत को करने से रोगों से मुक्ति व स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।❀ बुधवार के दिन प्रदोष व्रत हो तो, उपासक की सभी कामनाओं की पूर्ति होती है।❀ गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत पड़े तो इस दिन के व्रत के फल से शत्रुओं का विनाश होता है।❀ शुक्रवार के दिन होने वाला प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन की सुख-शान्ति के लिए किया जाता है।❀ संतान प्राप्ति की कामना हो तो शनिवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत करना चाहिए।❀ अपने उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए जब प्रदोष व्रत किए जाते हैं तो व्रत से मिलने वाले फलों में वृ्द्धि होती है। प्रदोष व्रत का उद्यापन ❀ इस व्रत को ग्यारह या फिर 26 त्रयोदशियों तक रखने के बाद व्रत का उद्यापन करना चाहिए।❀ व्रत का उद्यापन त्रयोदशी तिथि पर ही करना चाहिए।❀ उद्यापन से एक दिन पूर्व श्री गणेश का पूजन किया जाता है. पूर्व रात्रि में कीर्तन करते हुए जागरण किया जाता है।❀ प्रात: जल्दी उठकर मंडप बनाकर, मंडप को वस्त्रों और रंगोली से सजाकर तैयार किया जाता है।❀ ‘ऊँ उमा सहित शिवाय नम:’ मंत्र का एक माला यानी 108 बार जाप करते हुए हवन किया जाता है।❀ हवन में आहूति के लिए खीर का प्रयोग किया जाता है।❀ हवन समाप्त होने के बाद भगवान भोलेनाथ की आरती की जाती है और शान्ति पाठ किया जाता है।❀ अंत: में दो ब्रह्माणों को भोजन कराया जाता है और अपने सामर्थ्य अनुसार दान दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।

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