November 27, 2024

Shri Siddhivinayak Aarti:श्री सिद्धिविनायक आरती

Siddhivinayak Aarti:सिद्धिविनायक आरती गणपति जी की विशेष आरती है, जो भक्तों को भगवान गणेश की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम है। भगवान सिद्धिविनायक को विघ्नहर्ता और बुद्धि, विवेक, और समृद्धि के दाता माना जाता है। इस आरती को श्रद्धा से करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। Siddhivinayak Aarti:सिद्धिविनायक आरती के लाभ 1. विघ्नों और बाधाओं का निवारण 2. समृद्धि और आर्थिक लाभ 3. बुद्धि और विवेक की वृद्धि 4. मनोकामनाओं की पूर्ति 5. पारिवारिक सुख और शांति 6. मानसिक शांति और सकारात्मकता 7. शुभ कार्यों में सफलता 8. स्वास्थ्य में सुधार 9. ईश्वरीय कृपा और आशीर्वाद सिद्धिविनायक आरती के शब्द: “जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती,दर्शन मात्रे मन कामना पूर्ति।“ Siddhivinayak Aarti:यह आरती भगवान गणेश की महिमा का गुणगान करती है और उनके भक्तों के जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि लाने का मार्ग प्रशस्त करती है। नियमित रूप से इस आरती का पाठ करने से भक्त गणेश जी की कृपा से अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। Shri Siddhivinayak Aarti:श्री सिद्धिविनायक आरती Siddhivinayak Aarti:श्री सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई का सबसे प्रसिद्ध भगवान श्री गणेश मंदिर है, यहाँ होने वाली पूर्ण आरती मे श्री गणेश की विभिन्न स्तुतियाँ, भगवान शिव एवं देवी दुर्गा की स्तुतियाँ भी जुड़ी हैं। सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची ।नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची ।सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची ।कंठी झलके माल मुकताफळांची ।जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय मंगल मूर्ति ।दर्शनमात्रे मनः,कामना पूर्तिजय देव जय देव ॥ रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा ।चंदनाची उटी कुमकुम केशरा ।हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा ।रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया ।जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय मंगल मूर्ति ।दर्शनमात्रे मनः,कामना पूर्तिजय देव जय देव ॥ लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना ।सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना ।दास रामाचा वाट पाहे सदना ।संकटी पावावे निर्वाणी, रक्षावे सुरवर वंदना ।जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय मंगल मूर्ति ।दर्शनमात्रे मनः,कामना पूर्तिजय देव जय देव ॥ ॥ श्री गणेशाची आरती ॥शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको ।दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको ।हाथ लिए गुड लड्डू सांई सुरवरको ।महिमा कहे न जाय लागत हूं पादको ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय जय श्री गणराज ।विद्या सुखदाताधन्य तुम्हारा दर्शनमेरा मन रमता,जय देव जय देव ॥ अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरि ।विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी ।कोटीसूरजप्रकाश ऐबी छबि तेरी ।गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबिहारि ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय जय श्री गणराज ।विद्या सुखदाताधन्य तुम्हारा दर्शनमेरा मन रमता,जय देव जय देव ॥ भावभगत से कोई शरणागत आवे ।संतत संपत सबही भरपूर पावे ।ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे ।गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय जय श्री गणराज ।विद्या सुखदाताधन्य तुम्हारा दर्शनमेरा मन रमता,जय देव जय देव ॥ ॥ श्री शंकराची आरती ॥लवथवती विक्राळा ब्रह्मांडी माळा,वीषे कंठ काळा त्रिनेत्री ज्वाळालावण्य सुंदर मस्तकी बाळा,तेथुनिया जळ निर्मळ वाहे झुळझुळा ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय श्रीशंकरा ।आरती ओवाळू,तुज कर्पुरगौराजय देव जय देव ॥ कर्पुरगौरा भोळा नयनी विशाळा,अर्धांगी पार्वती सुमनांच्या माळाविभुतीचे उधळण शितकंठ नीळा,ऐसा शंकर शोभे उमा वेल्हाळा ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय श्रीशंकरा ।आरती ओवाळू,तुज कर्पुरगौराजय देव जय देव ॥ देवी दैत्यी सागरमंथन पै केले,त्यामाजी अवचित हळहळ जे उठलेते त्वा असुरपणे प्राशन केले,नीलकंठ नाम प्रसिद्ध झाले ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय श्रीशंकरा ।आरती ओवाळू,तुज कर्पुरगौराजय देव जय देव ॥ व्याघ्रांबर फणिवरधर सुंदर मदनारी,पंचानन मनमोहन मुनिजनसुखकारीशतकोटीचे बीज वाचे उच्चारी,रघुकुलटिळक रामदासा अंतरी ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय श्रीशंकरा ।आरती ओवाळू,तुज कर्पुरगौराजय देव जय देव ॥ ॥ श्री देवीची आरती ॥दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी,अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी ।वारी वारीं जन्ममरणाते वारी,हारी पडलो आता संकट नीवारी ॥जय देवी जय देवी.. जय देवी जय देवी,जय महिषासुरमथनी ।सुरवर-ईश्वर-वरदे,तारक संजीवनीजय देवी जय देवी ॥ त्रिभुवनी भुवनी पाहतां तुज ऎसे नाही,चारी श्रमले परंतु न बोलावे काहीं ।साही विवाद करितां पडिले प्रवाही,ते तूं भक्तालागी पावसि लवलाही ॥जय देवी जय देवी.. जय देवी जय देवी,जय महिषासुरमथनी ।सुरवरईश्वरवरदे,तारक संजीवनीजय देवी जय देवी ॥ प्रसन्न वदने प्रसन्न होसी निजदासां,क्लेशापासूनि सोडी तोडी भवपाशा ।अंवे तुजवांचून कोण पुरविल आशा,नरहरि तल्लिन झाला पदपंकजलेशा ॥जय देवी जय देवी.. जय देवी जय देवी,जय महिषासुरमथनी ।सुरवरईश्वरवरदे,तारक संजीवनीजय देवी जय देवी ॥ ॥ घालीन लोटांगण आरती ॥घालीन लोटांगण, वंदीन चरण ।डोळ्यांनी पाहीन रुप तुझें ।प्रेमें आलिंगन, आनंदे पूजिन ।भावें ओवाळीन म्हणे नामा ॥ त्वमेव माता च पिता त्वमेव ।त्वमेव बंधुक्ष्च सखा त्वमेव ।त्वमेव विध्या द्रविणं त्वमेव ।त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥ कायेन वाचा मनसेंद्रीयेव्रा,बुद्धयात्मना वा प्रकृतिस्वभावात ।करोमि यध्य्त सकलं परस्मे,नारायणायेति समर्पयामि ॥ अच्युतं केशवं रामनारायणं,कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम ।श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं,जानकीनायकं रामचंद्र भजे ॥ हरे राम हर राम,राम राम हरे हरे ।हरे कृष्ण हरे कृष्ण,कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।

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Panch Parmeshthi Aarti:पंच परमेष्ठी आरती

Panch Parmeshthi Aarti:पंच परमेष्ठी आरती जैन धर्म की एक महत्वपूर्ण आरती है, जो पाँच परम पूज्य व्यक्तित्वों को समर्पित है। यह आरती धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा और विशेष अवसरों पर की जाती है। पंच परमेष्ठी में निम्नलिखित पूज्य शामिल होते हैं: Panch Parmeshthi Aarti:पंच परमेष्ठी आरती के लाभ 1. आध्यात्मिक उन्नति 2. धर्म में रुचि और समर्पण 3. मन की शांति और स्थिरता 4. सकारात्मक ऊर्जा का संचार 5. पुण्य और धर्म लाभ 6. सही मार्गदर्शन 7. संपूर्ण समाज के कल्याण की भावना पंच परमेष्ठी आरती (शब्द) “जय जय अरिहंत, जय जय अरिहंत।जय जय सिद्ध, जय जय सिद्ध।जय जय आचार्य, जय जय आचार्य।जय जय उपाध्याय, जय जय उपाध्याय।जय जय साधु, जय जय साधु।“ यह आरती जैन धर्म के पंच परमेष्ठी की महिमा और उनके द्वारा बताए गए मोक्ष मार्ग को अपनाने की प्रेरणा देती है। नियमित रूप से इसे करने से व्यक्ति के जीवन में धार्मिक, मानसिक, और आध्यात्मिक संतुलन बना रहता है। Panch Parmeshthi Aarti:पंच परमेष्ठी आरती इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ पहली आरति श्रीजिनराजा,भव दधि पार उतार जिहाजा ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ दूसरी आरति सिद्धन केरी,सुमिरन करत मिटे भव फेरी ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ तीजी आरति सूरि मुनिंदा,जनम मरन दु:ख दूर करिंदा ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ चौथी आरति श्री उवझाया,दर्शन देखत पाप पलाया ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ पाँचमि आरति साधु तिहारी,कुमति विनाशन शिव अधिकारी ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ छट्ठी ग्यारह प्रतिमाधारी,श्रावक वंदूं आनंदकारी ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ सातमि आरति श्रीजिनवानी,‘द्यानत’ सुरग मुकति सुखदानी ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥

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Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti:श्री सत्यनारायण जी आरती

Satyanarayan Ji Ki Aarti:श्री सत्यनारायण जी की आरती करने से अनेक आध्यात्मिक, मानसिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। यह आरती सत्यनारायण भगवान की कृपा पाने का एक सशक्त माध्यम है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं: 1. Satyanarayan Ji Ki Aarti:संकटों और बाधाओं का निवारण 2. धन, समृद्धि और खुशहाली 3. सकारात्मक ऊर्जा और शांति 4. मनोकामनाओं की पूर्ति 5. पारिवारिक सुख और एकता 6. धार्मिकता और अच्छे संस्कारों का विकास 7. स्वास्थ्य लाभ 8. पुण्य और ईश्वरीय कृपा 9. आध्यात्मिक उन्नति 10. विवाह और अन्य शुभ कार्यों में सफलता आरती के शब्द: नियमित रूप से श्री सत्यनारायण जी की आरती करने से जीवन के सभी क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं। यह आरती भक्तों को ईश्वरीय मार्ग पर चलने और उनके आशीर्वाद से जीवन को सफल बनाने में मदद करती है। Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti:श्री सत्यनारायण जी आरती जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।सत्यनारायण स्वामी,जन पातक हरणा ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । रत्‍‌न जडि़त सिंहासन,अद्भुत छवि राजै ।नारद करत निराजन,घण्टा ध्वनि बाजै ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । प्रकट भये कलि कारण,द्विज को दर्श दियो ।बूढ़ा ब्राह्मण बनकर,कंचन महल कियो ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । दुर्बल भील कठारो,जिन पर कृपा करी ।चन्द्रचूड़ एक राजा,तिनकी विपत्ति हरी ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । वैश्य मनोरथ पायो,श्रद्धा तज दीन्ही ।सो फल भोग्यो प्रभुजी,फिर-स्तुति कीन्हीं ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । भाव भक्ति के कारण,छिन-छिन रूप धरयो ।श्रद्धा धारण कीन्हीं,तिनको काज सरयो ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । ग्वाल-बाल संग राजा,वन में भक्ति करी ।मनवांछित फल दीन्हों,दीनदयाल हरी ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । चढ़त प्रसाद सवायो,कदली फल, मेवा ।धूप दीप तुलसी से,राजी सत्यदेवा ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । श्री सत्यनारायण जी की आरती,जो कोई नर गावै ।ऋद्धि-सिद्ध सुख-संपत्ति,सहज रूप पावे ॥ जय लक्ष्मी रमणा,स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।सत्यनारायण स्वामी,जन पातक हरणा ॥

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Swaminarayan Arti:स्वामीनारायण आरती 

Swaminarayan Arti:स्वामीनारायण आरती का पाठ और इसके दर्शन करने से कई आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं: Swaminarayan Arti:श्री स्वामीनारायण आरती प्रतिदिन सभी BAPS मंदिरों में तथा भक्ति भाव से भरे अनगिनत घरों में और विशेष अवसरों पर गाई जाती है। यह आरती उपासकों के ह्रदय को अक्षरपुरूषोत्तम प्रभु के दिव्य रूपों की महिमा की याद दिलाती है। श्री स्वामीनारायण आरती के बोल हिंदी में इस प्रकार से हैं.. 1. आध्यात्मिक उन्नति 2. मानसिक शांति 3. सकारात्मक ऊर्जा 4. संकटों का निवारण 5. धार्मिक संस्कारों का विकास 6. सामूहिक भक्ति का अनुभव 7. शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार 8. ईश्वरीय कृपा और आशीर्वाद Swaminarayan Arti:स्वामीनारायण आरती के शब्द नियमित रूप से स्वामीनारायण आरती करने से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों ही क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन होता है। Swaminarayan Arti:स्वामीनारायण आरती  जय स्वामीनारायण, जय अक्षरपुरुषोत्तम,अक्षरपुरुषोत्तम जय, दर्शन सर्वोत्तमजय स्वामीनारायण मुक्त अनंत सुपुजित, सुंदर साकारम्,सर्वोपरी करुणाकर, मानव तनुधारम्जय स्वामीनारायण पुरूषोत्तम परब्रह्म, श्रीहरि सहजानन्द,अक्षरब्रह्म अनादि, गुणातीतानंदजय स्वामीनारायण प्रकट सदा सर्वकर्ता, परम मुक्तिदाता,धर्म एकान्तिक स्थापक, भक्ति परित्राताजय स्वामीनारायण दशभाव दिव्यता सह, ब्रह्मरूपे प्रीति,सुह्राद्भाव अलौकिक, स्थापित शुभ रीतिजय स्वामीनारायण धन्य धन्य मम जीवन, तव शरणे सुफलम्,यज्ञपुरुष प्रवर्तित, सिद्धांतम् सुखदम्जय स्वामीनारायण, जय स्वामीनारायण, जय अक्षरपुरुषोत्तम,अक्षरपुरुषोत्तम जय, दर्शन सर्वोत्तमजय स्वामीनारायण भगवान स्वामीनारायण के छठे आध्यात्मिक उत्तराधिकारी परम पूज्य महंत स्वामी महाराज ने अक्षर पुरूषोत्तम प्रभु की महिमा भरी आरती को रचकर इसके गायन की एवं प्रेरणा दी है।

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Tiger in Dream Meaning: सपने में टाइगर का दिखना शुभ या अशुभ? जानें क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

Tiger in Dream Meaning: सपने में बाघ का दिखना हमेशा से शुभ ही माना जाता है. सपने में बाघ आपकी जीत की ओर संकेत कर रहा है. सपने में बाघ को देखना आपके आत्मविश्वास और मजबूत मनोबल की ओर इशारा करता है. Tiger in Dream Meaning: सपनों पर किसी का नियंत्रण नहीं होता. कब किसको क्या सपना आ जाए, मालूम ही नहीं पड़ता. हालांकि, इतनी सहूलियत जरूर है कि इन्हें देखने के बाद हम ये पता लगा सकते हैं कि सपने का अर्थ क्या है. Tiger in Dream Meaning आज हम आपको बताने जा रहे हैं स्पबे मव टाइगर के दिखने का मतलब.  Tiger in Dream:जीत का संकेत सपने में बाघ का दिखना हमेशा से शुभ ही माना जाता है. सपने में बाघ आपकी जीत की ओर संकेत कर रहा है. स्वप्न शास्त्र के मुताबिक, सपने में बाघ को देखना आपके आत्मविश्वास और मजबूत मनोबल की ओर इशारा करता है. Tiger in Dream:सपने में दौड़ता बाघ देखना यदि आप सपने में बाघ को दौड़ते हुए देख रहे हैं, तो इसका स्पष्ट मतलब है कि आप उन्नति करेंगे. Tiger in Dream Meaning आप तेजी से सफलता की ओर बढ़ रहे हैं. अपनी मंजिल को पाने के लिए आपमें ललक है, जिसे बनाए रखें. जल्द ही आप सफलता के सोपान चढ़ेंगे. Tiger in Dream:बाघ का दूसरे जानवरों के पीछे दौड़ना Tiger in Dream Meaning सपने में बाघ को अन्य जानवरों कब पीछे भागते हुए देखने का मतलब है Tiger in Dream Meaning कि आपको अपने दोस्तों के वारे में फिक्र है. वे किसी मुसीबत में फंसे हुए हैं. लिहाजा, आप चाहते हैं कि वे इस परेशानी से निकल आएं. यही कारण है कि आपको ऐसा सपना आया. बाघ को शक्ति, साहस और अदम्य साहस का प्रतीक माना जाता है। Tiger in Dream Meaning यदि आप अपने सपने में बाघ देखते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपके अंदर अद्वितीय ताकत और आत्मविश्वास है। यह सपना आपको जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना करने और अपने लक्ष्य को पाने के लिए प्रोत्साहित करता है। सपने में बाघ देखना कई प्रकार के संकेत देता है, जो आपके जीवन की परिस्थितियों और सपने में आपकी भावनाओं पर निर्भर करता है। यहाँ इसके कुछ मुख्य अर्थ बताए गए हैं: 1. Tiger in Dream:शक्ति और साहस का प्रतीक 2. Tiger in Dream:डर या खतरा 3. अनियंत्रित भावनाएँ 4. रक्षा और संरक्षण 5. जंगली प्रवृत्तियाँ 6. सफलता और आत्मविश्वास बाघ को देखना यह भी दर्शा सकता है कि आप अपने जीवन में सफलता और आत्मविश्वास प्राप्त करने की राह पर हैं। सपने का अर्थ आपकी परिस्थितियों और सपने में बाघ की स्थिति पर निर्भर करता है। यदि यह सपना बार-बार आता है, तो यह किसी महत्वपूर्ण संदेश की ओर संकेत हो सकता है। (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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