November 25, 2024

Guru Nanak Aarti:गुरु नानक आरती

Guru Nanak Aarti:गुरु नानक आरती के फायदे Guru Nanak Aarti:गुरु नानक देव जी की आरती सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, Guru Nanak Aarti बल्कि यह मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरने का एक शक्तिशाली साधन है। इस आरती के नियमित जाप से व्यक्ति को कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। यहां कुछ प्रमुख फायदे दिए गए हैं: Guru Nanak Aarti:गुरु नानक देव जी की आरती का महत्व: Guru Nanak Aarti:गुरु नानक देव जी की आरती का जाप कैसे करें: निष्कर्ष: Guru Nanak Aarti:गुरु नानक देव जी की आरती एक शक्तिशाली साधन है जो व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाने में मदद करता है। यह न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक है। Guru Nanak Aarti:गुरु नानक आरती श्री गुरु नानक देव आरती ॥ धनासरी महला १ आरती ੴ सतिगुर प्रसादि ॥गगन मै थालु रवि चंदु दीपकबने तारिका मंडल जनक मोती ॥ धूपु मल आनलो पवणु चवरो करेसगल बनराइ फूलंत जोती ॥ कैसी आरती होइ भव खंडना तेरी आरती ॥अनहता सबद वाजंत भेरी रहाउ ॥ सहस तव नैन नन नैन है तोहि कउसहस मूरति नना एक तोही ॥ सहस पद बिमल नन एक पद गंध बिनुसहस तव गंध इव चलत मोही ॥ सभ महि जोति जोति है सोइ ॥तिस कै चानणि सभ महि चानणु होइ ॥ गुर साखी जोति परगटु होइ ॥जो तिसु भावै सु आरती होइ ॥ हरि चरण कमल मकरंद लोभित मनोअनदिनो मोहि आही पिआसा ॥ कृपा जलु देहि नानक सारिंगकउ होइ जा ते तेरै नामि वासा ॥ गगन मै थालु, रवि चंदु दीपक बने,तारका मंडल, जनक मोती।धूपु मलआनलो, पवण चवरो करे,सगल बनराइ फुलन्त जोति॥कैसी आरती होइ॥भवखंडना तेरी आरती॥अनहत सबद बाजंत भेरी॥

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Shri Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश – शेंदुर लाल चढ़ायो आरती

Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश – शेंदुर लाल चढ़ायो आरती के फायदे Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश की आरती विशेषकर “शेंदुर लाल चढ़ायो” वाला मंत्र बहुत ही प्रसिद्ध और भक्तों द्वारा प्रिय है। इस आरती के गायन से व्यक्ति को कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। यहां कुछ प्रमुख लाभ दिए गए हैं “शेंदुर लाल चढ़ायो” मंत्र का विशेष महत्व कैसे करें आरती निष्कर्ष श्री गणेश की आरती, विशेषकर “शेंदुर लाल चढ़ायो” वाला मंत्र, भक्तों के लिए एक शक्तिशाली साधन है। यह न केवल आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है बल्कि व्यक्ति के जीवन में समृद्धि और सफलता लाने में भी मदद करता है। क्या आप गणेश जी के बारे में और जानना चाहते हैं? यहां कुछ अन्य प्रश्न पूछे जा सकते हैं: Shri Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश – शेंदुर लाल चढ़ायो आरती शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको ।दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको ।हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवरको ।महिमा कहे न जाय लागत हूं पादको ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय जय श्री गणराजविद्या सुखदाताधन्य तुम्हारा दर्शनमेरा मन रमता,जय देव जय देव ॥ अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरि ।विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी ।कोटीसूरजप्रकाश ऐबी छबि तेरी ।गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबिहारि ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय जय श्री गणराजविद्या सुखदाताधन्य तुम्हारा दर्शनमेरा मन रमता,जय देव जय देव ॥ भावभगत से कोई शरणागत आवे ।संतत संपत सबही भरपूर पावे ।ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे ।गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे ॥ जय देव जय देव,जय जय श्री गणराजविद्या सुखदाताधन्य तुम्हारा दर्शनमेरा मन रमता,जय देव जय देव ॥

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Tulsi Mata Aarti:तुलसी माता आरती

Tulsi Mata Aarti:दत्ताची आरतीचे फायदे Tulsi Mata Aarti:दत्ताची आरती हा एक पवित्र अनुष्ठान आहे जो भक्ती आणि श्रद्धेचे प्रतीक आहे. दत्तगुरुंच्या चरणी ही आरती गाणे हा एक आध्यात्मिक अनुभव आहे जो अनेक प्रकारे फायदेशीर ठरू शकतो. Tulsi Mata Aarti:दत्ताची आरतीचे काही प्रमुख फायदे खालीलप्रमाणे आहेत Tulsi Mata Aarti:दत्ताची आरती करताना काही गोष्टी लक्षात ठेवा अंततः, दत्ताची आरती हा एक वैयक्तिक अनुभव आहे. प्रत्येक व्यक्तीला याचा वेगवेगळ्या प्रकारे अनुभव येतो. जर तुम्ही दत्तगुरुंच्या भक्त असाल तर दत्ताची आरती तुमच्या आध्यात्मिक वाटचालीत एक महत्त्वपूर्ण टप्पा ठरू शकते. Tulsi Mata Aarti:तुलसी माता आरती जय जय तुलसी माता,मैया जय तुलसी माता ।सब जग की सुख दाता,सबकी वर माता ॥॥ जय तुलसी माता…॥ सब योगों से ऊपर,सब रोगों से ऊपर ।रज से रक्ष करके,सबकी भव त्राता ॥॥ जय तुलसी माता…॥ बटु पुत्री है श्यामा,सूर बल्ली है ग्राम्या ।विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे,सो नर तर जाता ॥॥ जय तुलसी माता…॥ हरि के शीश विराजत,त्रिभुवन से हो वंदित ।पतित जनों की तारिणी,तुम हो विख्याता ॥॥ जय तुलसी माता…॥ लेकर जन्म विजन में,आई दिव्य भवन में ।मानव लोक तुम्हीं से,सुख-संपति पाता ॥॥ जय तुलसी माता…॥ हरि को तुम अति प्यारी,श्याम वर्ण सुकुमारी ।प्रेम अजब है उनका,तुमसे कैसा नाता ॥हमारी विपद हरो तुम,कृपा करो माता ॥ [Extra]॥ जय तुलसी माता…॥ जय जय तुलसी माता,मैया जय तुलसी माता ।सब जग की सुख दाता,सबकी वर माता ॥

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Datta Aarti:दत्ताची आरती

Datta Aarti:दत्ताची आरतीचे फायदे Datta Aarti:दत्ताची आरती हा एक पवित्र अनुष्ठान आहे जो भक्ती आणि श्रद्धेचे प्रतीक आहे. दत्तगुरुंच्या चरणी ही आरती गाणे हा एक आध्यात्मिक अनुभव आहे जो अनेक प्रकारे फायदेशीर ठरू शकतो. Datta Aarti:दत्ताची आरतीचे काही प्रमुख फायदे खालीलप्रमाणे आहेत Datta Aarti:दत्ताची आरती करताना काही गोष्टी लक्षात ठेवा अंततः, दत्ताची आरती हा एक वैयक्तिक अनुभव आहे. प्रत्येक व्यक्तीला याचा वेगवेगळ्या प्रकारे अनुभव येतो. जर तुम्ही दत्तगुरुंच्या भक्त असाल तर दत्ताची आरती तुमच्या आध्यात्मिक वाटचालीत एक महत्त्वपूर्ण टप्पा ठरू शकते. Datta Aarti:दत्ताची आरती त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा ।त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्य राणा ।नेती नेती शब्द न ये अनुमाना ॥सुरवर मुनिजन योगी समाधी न ये ध्याना ॥ जय देव जय देव जय श्री गुरुद्त्ता ।आरती ओवाळिता हरली भवचिंता ॥ सबाह्य अभ्यंतरी तू एक द्त्त ।अभाग्यासी कैची कळेल हि मात ॥पराही परतली तेथे कैचा हेत ।जन्ममरणाचाही पुरलासे अंत ॥ दत्त येऊनिया ऊभा ठाकला ।भावे साष्टांगेसी प्रणिपात केला ॥प्रसन्न होऊनि आशीर्वाद दिधला ।जन्ममरणाचा फेरा चुकवीला ॥ दत्त दत्त ऐसें लागले ध्यान ।हरपले मन झाले उन्मन ॥मी तू पणाची झाली बोळवण ।एका जनार्दनी श्रीदत्तध्यान ॥

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Ram Lala Ki Aarti:आरती राम लला की

Ram Lala Ki Aarti:आरती राम लला की के फायदे Ram Lala Ki Aarti:आरती एक धार्मिक अनुष्ठान है जो भक्ति और श्रद्धा को व्यक्त करने का एक माध्यम है। Ram Lala Ki Aarti राम लला भगवान राम का एक रूप हैं, जिन्हें हिंदू धर्म में आदर्श पुरुष माना जाता है। इसलिए, आरती राम लला की करने से कई लाभ मिल सकते हैं। ये लाभ मुख्यतः मानसिक और आध्यात्मिक होते हैं। Ram Lala Ki Aarti:यहां कुछ प्रमुख लाभ दिए गए हैं ध्यान रखें Ram Lala Ki Aarti:आरती राम लला की के फायदे आरती कीजे श्रीरामलला की ।पूण निपुण धनुवेद कला की ॥ धनुष वान कर सोहत नीके ।शोभा कोटि मदन मद फीके ॥ सुभग सिंहासन आप बिराजैं ।वाम भाग वैदेही राजैं ॥ कर जोरे रिपुहन हनुमाना ।भरत लखन सेवत बिधि नाना ॥ शिव अज नारद गुन गन गावैं ।निगम नेति कह पार न पावैं ॥ नाम प्रभाव सकल जग जानैं ।शेष महेश गनेस बखानैं ॥ भगत कामतरु पूरणकामा ।दया क्षमा करुना गुन धामा ॥ सुग्रीवहुँ को कपिपति कीन्हा ।राज विभीषन को प्रभु दीन्हा ॥ खेल खेल महु सिंधु बधाये ।लोक सकल अनुपम यश छाये ॥ दुर्गम गढ़ लंका पति मारे ।सुर नर मुनि सबके भय टारे ॥ देवन थापि सुजस विस्तारे ।कोटिक दीन मलीन उधारे ॥ कपि केवट खग निसचर केरे ।करि करुना दुःख दोष निवेरे ॥ देत सदा दासन्ह को माना ।जगतपूज भे कपि हनुमाना ॥ आरत दीन सदा सत्कारे ।तिहुपुर होत राम जयकारे ॥ कौसल्यादि सकल महतारी ।दशरथ आदि भगत प्रभु झारी ॥ सुर नर मुनि प्रभु गुन गन गाई ।आरति करत बहुत सुख पाई ॥ धूप दीप चन्दन नैवेदा ।मन दृढ़ करि नहि कवनव भेदा ॥ राम लला की आरती गावै ।राम कृपा अभिमत फल पावै ॥

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Utpanna Ekadashi Puja Muhurat : उत्पन्ना एकादशी के दिन क्या करें क्या नहीं? जानें सभी जरूरी नियम

Utpanna Ekadashi 2024 Dos and dont: उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता की उत्पति मानी जाती है। शास्त्र में इस दिन को लेकर कुछ खास नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी के दिन क्या करें और क्या नहीं। Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का एक प्रमुख माध्यम माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है और व्यक्ति को सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से व्यक्ति को हजारों यज्ञ करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. Utpanna Ekadashi 2024 Dos and dont: उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल उत्पन्ना एकादशी का व्रत 26 नवंबर 2024 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्ण की विधि- विधान से पूजा की जाती है। Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पुण्य फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता उत्पन्न हुईं थी, इसलिए इसे उत्पन्ना एकादशी के नाम जाना जाता है। शास्त्रों में उत्पन्ना एकादशी के लिए कुछ खास नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं इस दिन क्या करें क्या नहीं। उत्पन्ना एकादशी तिथि | Utpanna Ekadashi Date पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 26 नवंबर दिन मंगलवार को देर रात 01 बजकर 01 मिनट से लेकर अगले दिन यानी 27 नवंबर दिन बुधवार को देर रात 03 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि तिथि के अनुसार, 26 नवंबर को ही उत्पन्ना एकादशी का व्रत किया जाएगा. वहीं व्रत का पारण 27 नवंबर की दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 18 मिनट तक किया जा सकता है. उत्पन्ना एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त | Utpanna Ekadashi Puja Muhurat पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी पूजा का समय 26 नवंबर सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी के दिन करें ये काम Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी के दिन न करें ये काम उत्पन्ना एकादशी का महत्व | Utpanna Ekadashi Significance मान्यता के अनुसार, एकादशी का पालन करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है. इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से मोक्ष प्राप्ति और विष्णु लोक में स्थान मिलता है. इस व्रत को करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है. यह व्रत करने से न केवल वर्तमान जीवन में सुख-शांति मिलती है, बल्कि अगले जन्म में भी शुभ फल प्राप्त होते हैं. Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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