November 5, 2024

Laxmi Mata Aarti:लक्ष्मीजी आरती

Laxmi Mata Aart:लक्ष्मीजी की आरती का महत्त्व और उसके लाभ विभिन्न समयों पर अलग-अलग होते हैं। Laxmi Mata Aarti इसे करने के सही समय और गलत समय का ध्यान रखना ज़रूरी है ताकि आरती का पूरा लाभ मिल सके और कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। यहाँ कुछ मुख्य जानकारी दी जा रही है: Laxmi Mata Aart:लाभ के लिए कब करें लक्ष्मीजी की आरती कब न करें लक्ष्मीजी की आरती: संक्षेप में: लक्ष्मीजी की आरती करने का समय संध्या का और शुक्रवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। Laxmi Mata Aarti विशेष अवसरों पर या शुभ मुहूर्त में आरती करने से लक्ष्मीजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। लेकिन राहुकाल, ग्रहणकाल, या नकारात्मक मनोदशा में आरती करने से बचें।

Laxmi Mata Aarti:लक्ष्मीजी आरती Read More »

Vishwakarma Aarti(विश्वकर्मा आरती)

Vishwakarma Aarti:विश्वकर्मा आरती का पाठ भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो निर्माण, तकनीकी, या कला से जुड़े होते हैं। विश्वकर्मा जी को भगवान का रूप माना जाता है जो सृष्टि के विभिन्न निर्माणों के देवता हैं। यहां विश्वकर्मा आरती के फायदे और उसे कब करना चाहिए, के बारे में जानकारी दी गई है: Vishwakarma Aarti:विश्वकर्मा आरती के फायदे: Vishwakarma Aarti:कब करें विश्वकर्मा आरती: आरती का पाठ: आरती का पाठ करते समय एक स्वच्छ स्थान पर भगवान Vishwakarma Aarti विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीप जलाना चाहिए और ध्यानपूर्वक आरती करनी चाहिए। इसे परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर करना और प्रसाद वितरण करना भी शुभ माना जाता है। इन बातों का ध्यान रखकर, आप विश्वकर्मा आरती का सही ढंग से लाभ उठा सकते हैं। Vishwakarma Aarti(विश्वकर्मा आरती) जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा ।सकल सृष्टि के करता,रक्षक स्तुति धर्मा ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । आदि सृष्टि मे विधि को,श्रुति उपदेश दिया ।जीव मात्र का जग में,ज्ञान विकास किया ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । ऋषि अंगीरा तप से,शांति नहीं पाई ।ध्यान किया जब प्रभु का,सकल सिद्धि आई ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । रोग ग्रस्त राजा ने,जब आश्रय लीना ।संकट मोचन बनकर,दूर दुःखा कीना ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । जब रथकार दंपति,तुम्हारी टेर करी ।सुनकर दीन प्रार्थना,विपत सगरी हरी ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । एकानन चतुरानन,पंचानन राजे।त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज,सकल रूप साजे ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । ध्यान धरे तब पद का,सकल सिद्धि आवे ।मन द्विविधा मिट जावे,अटल शक्ति पावे ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा । श्री विश्वकर्मा की आरती,जो कोई गावे ।भजत गजानांद स्वामी,सुख संपति पावे ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा ।सकल सृष्टि के करता,रक्षक स्तुति धर्मा ॥

Vishwakarma Aarti(विश्वकर्मा आरती) Read More »

Dev Uthani Ekadashi 2024 Date: कब और क्यों मनाई जाती है देवउठनी एकादशी? इस मुहूर्त में करें पूजा

देवउठनी एकादशी सनातन धर्म में एकादशी तिथि को माह की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक माना जाता है। कार्तिक माह में देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2024) व्रत किया जाता है। इस शुभ तिथि पर भगवान विष्णु की उपासना और व्रत करने का विधान है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जातक को सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और विष्णु जी प्रसन्न होते हैं। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी व्रत करने का विधान है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही प्रिय चीजों का भोग लगाया जाता है। सभी एकादशी तिथि में से देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2024) को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से उपासना करने से साधक को विष्णु जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख-समृद्धि का भी वास रहता है। क्या आप जानते हैं कि देवउठनी एकादशी (Kab Hai Dev Uthani Ekadashi 2024) का पर्व क्यों मनाया जाता है? अगर नहीं पता, तो आइए जानते हैं इसके बारे में। Dev Uthani Ekadashi 2024: इस साल कब है देवउठनी एकादशी? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग देवउठनी एकादशी का धार्मिक महत्व (Dev Uthani Significance) देवउठनी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, इसे भगवान विष्णु के चार महीने की योग-निद्रा से जागने का दिन माना जाता है। इसे ‘प्रबोधिनी एकादशी’ भी कहा जाता है। इस दिन से सभी मांगलिक कार्य, जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि, शुभ माने जाते हैं। देवउठनी एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है, जो वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने वाला माना गया है। भगवान विष्णु की पूजा और तुलसी पूजन से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। देवउठनी एकादशी 2024 डेट और टाइम (Dev Uthani Ekadashi 2024 Shubh Muhurat) पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 11 नवंबर को संध्याकाल 06 बजकर 46 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 12 नवंबर को संध्याकाल 04 बजकर 04 मिनट पर होगा। इस प्रकार 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। इसके अगले दिन तुलसी विवाह का पर्व भी मनाया जाएगा। एकादशी व्रत पारण करने का मुहूर्त इस प्रकार है-देवउठनी एकादशी व्रत का पारण 12 नवंबर को सुबह 06 बजकर 42 मिनट से लेकर 08 बजकर 51 मिनट तक है। करें इन मंत्रों का जप (Mantra on Ekadashi) ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।हे नाथ नारायण वासुदेवाय।। विष्णु के पंचरूप मंत्र – देवउठनी एकादशी पर क्या करें और क्या नहीं करें: क्या करें: क्या न करें: अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

Dev Uthani Ekadashi 2024 Date: कब और क्यों मनाई जाती है देवउठनी एकादशी? इस मुहूर्त में करें पूजा Read More »

Dev Uthani Ekadashi 2024: इस साल कब है देवउठनी एकादशी? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग

 Dev Uthani Ekadashi 2024: हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागृत होते हैं। इससे पूर्व आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी तिथि से भगवान विष्णु क्षीर सागर में चार महीने के लिए विश्राम करने चले जाते हैं। अतः आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि तक चातुर्मास रहता है। शास्त्रों में चातुर्मास के दौरान शुभ कार्य करने की मनाही है। अतः इन चार महीनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। आइए, Dev Uthani Ekadashi देव उठनी एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं- Dev Uthani Ekadashi:शुभ मुहूर्त कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 11 नवंबर को संध्याकाल 06 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और 12 नवंबर को संध्याकाल 04 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। इसके अगले दिन तुलसी विवाह है। तुलसी विवाह तिथि से सभी प्रकार के शुभ कार्य किए जाते हैं। Dev Uthani Ekadashi:पारण समय व्रती तुलसी विवाह यानी 13 नवंबर को सुबह 06 बजकर 42 मिनट से लेकर 08 बजकर 51 मिनट तक व्रत खोल सकते हैं। इस समय में स्नान-ध्यान से निवृत्त होकर विधि-विधान से जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करें। Dev Uthani Ekadashi इसके पश्चात ब्राह्मणों को अन्न दान देकर व्रत खोलें। Dev Uthani Ekadashi 2024:शुभ योग देवउठनी एकादशी को शाम 07 बजकर 10 मिनट तक हर्षण योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण सुबह 07 बजकर 52 मिनट से हो रहा है, जो 13 नवंबर को सुबह 05 बजकर 40 मिनट पर समाप्त हो रहा है। साथ ही रवि योग का संयोग बन रहा है। यह योग सुबह 06 बजकर 42 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 52 मिनट तक है। इन योग के दौरान भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। देवउठनी एकादशी पूजा विधि (Devuthani Ekadashi Puja Vidhi) देवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी Dev Uthani Ekadashi एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग-निद्रा से जागते हैं। इसे विशेष रूप से विष्णु पूजा और तुलसी विवाह के लिए मनाया जाता है। यहाँ पूजा विधि दी गई है: 1. स्नान और स्वच्छता 2. व्रत संकल्प (Vrat Sankalp) 3. भगवान विष्णु की पूजा (Vishnu Puja) 4. तुलसी पूजा (Tulsi Puja) 5. भोग और प्रसाद (Bhog and Prasad) 6. आरती (Aarti) 7. व्रत कथा सुनें (Vrat Katha) 8. व्रत का समापन (End of Fast) देवउठनी एकादशी पर यह पूजा विधि अपनाने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है Dev Uthani Ekadashi और सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

Dev Uthani Ekadashi 2024: इस साल कब है देवउठनी एकादशी? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग Read More »