October 4, 2024

नवरात्रि 2024: मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, मंत्र, भोग, और क्या करें और क्या न करें

नवरात्रि 2024: मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, मंत्र, भोग, और क्या करें और क्या न करें नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, जो साहस, शक्ति और सौम्यता की देवी मानी जाती हैं। इनका रूप बहुत ही अद्भुत और शक्तिशाली है, जो भक्तों को जीवन में साहस और संतुलन बनाए रखने का आशीर्वाद देती हैं। अगर आप मां चंद्रघंटा की पूजा विधि (Puja Vidhi), मंत्र (Mantras), भोग (Offerings), और पूजा के दौरान क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts) के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए है। मां चंद्रघंटा की पूजा विधि (Maa Chandraghanta Puja Vidhi) मां चंद्रघंटा के मंत्र (Mantras for Worship) मंत्रों का जाप करते हुए मां का ध्यान करें और उनसे साहस और संतुलन की प्रार्थना करें। मां चंद्रघंटा को भोग (Prasad to Offer) मां को दूध, खीर, और शहद का भोग विशेष रूप से प्रिय है। इन वस्तुओं को मां को अर्पित करने से स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मां चंद्रघंटा की पूजा में क्या करें (What to Do) मां चंद्रघंटा की पूजा में क्या न करें (What Not to Do) निष्कर्ष (Conclusion) मां की पूजा साहस, शक्ति और मानसिक संतुलन का प्रतीक है। सही विधि से की गई पूजा जीवन में शांति, साहस और संतुलन लाती है। इस नवरात्रि, मां चंद्रघंटा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा विधि, मंत्र जाप, और पूजा के नियमों का पालन करना अति महत्वपूर्ण है। उनकी कृपा से आपके जीवन में समृद्धि, साहस, और शक्ति का संचार होगा। इस नवरात्रि, मां की पूजा से अपने जीवन में साहस और संतुलन लाएं। Tags: Navratri2024 #MaaChandraghanta #PujaVidhi #NavratriThirdDay #ChandraghantaMantra #NavratriBhog #NavratriDoAndDonts #PujaSteps #SpiritualWorship #MantraJap #HinduRituals #NavratriSpecial #ChandraghantaPuja

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Maa Chandraghanta Aarti Navratri नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की करें आरती

चंद्रघंटा नवरात्रि के तीसरे दिन मां के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, मां दुर्गा का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। माता रानी के मस्तक में घण्टे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान हैं, इस वजह से मां का नाम चंद्रघंटा पड़ा। मां चंद्रघंटा की सवारी शेर है। दस हाथों में कमल और कमडंल के अलावा अस्त-शस्त्र हैं। माथे पर अर्ध चंद्र ही इनकी पहचान है। इनके कंठ में श्वेत पुष्प की माला और शीर्ष पर रत्नजड़ित मुकुट विराजमान है। माता युद्ध की मुद्रा में विराजमान रहती हैं। न्यता है कि मां की पूजा करने से मन को शांति प्राप्त होती है। मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप की अराधना करने से परम शक्ति का अनुभव होता है। मान्यता है कि मां की पूजा में दूध का प्रयोग करना परम कल्याणकारी होता है। मां की कृपा से जीवन सुखमय हो जाता है। नवरात्रि के तीसरे दिन पर देवी का आशीर्वाद पाने के लिए विधिवत पूजा करने के साथ माता की आरती जरूर करें। चंद्रघंटा जय मां चंद्रघंटा सुख धाम। पूर्ण कीजो मेरे सभी काम। चंद्र समान तुम शीतल दाती।चंद्र तेज किरणों में समाती। क्रोध को शांत करने वाली। मीठे बोल सिखाने वाली। मन की मालक मन भाती हो। चंद्र घंटा तुम वरदाती हो। सुंदर भाव को लाने वाली। हर संकट मे बचाने वाली। हर बुधवार जो तुझे ध्याये। श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं। मूर्ति चंद्र आकार बनाएं। सन्मुख घी की ज्योति जलाएं। शीश झुका कहे मन की बाता। पूर्ण आस करो जगदाता। कांचीपुर स्थान तुम्हारा। करनाटिका में मान तुम्हारा। नाम तेरा रटूं महारानी। भक्त की रक्षा करो भवानी।

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Vindhyeshvari Chalisa:विन्ध्येश्वरी चालीसा

Vindhyeshvari Chalisa:विन्ध्येश्वरी चालीसा Vindhyeshvari Chalisa:विन्ध्येश्वरी माता को शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। वे विंध्य पर्वत की अधिष्ठात्री देवी हैं और माता पार्वती का एक स्वरूप मानी जाती हैं। विन्ध्येश्वरी माता की पूजा विशेष रूप से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में की जाती है। Vindhyeshvari Chalisa:विन्ध्येश्वरी चालीसा का महत्व विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ करने से मन में शक्ति और शांति का अनुभव होता है। यह माना जाता है कि चालीसा का नियमित पाठ करने से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और वे मोक्ष प्राप्त करते हैं। Vindhyeshvari Chalisa:विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ कैसे करें? Vindhyeshvari Chalisa:विन्ध्येश्वरी चालीसा के लाभ Vindhyeshvari Chalisa:विन्ध्येश्वरी चालीसा ॥ दोहा ॥नमो नमो विन्ध्येश्वरी,नमो नमो जगदम्ब ।सन्तजनों के काज में,करती नहीं विलम्ब ॥ जय जय जय विन्ध्याचल रानी।आदिशक्ति जगविदित भवानी ॥ सिंहवाहिनी जै जगमाता ।जै जै जै त्रिभुवन सुखदाता ॥ कष्ट निवारण जै जगदेवी ।जै जै सन्त असुर सुर सेवी ॥ महिमा अमित अपार तुम्हारी ।शेष सहस मुख वर्णत हारी ॥ दीनन को दु:ख हरत भवानी ।नहिं देखो तुम सम कोउ दानी ॥ सब कर मनसा पुरवत माता ।महिमा अमित जगत विख्याता ॥ जो जन ध्यान तुम्हारो लावै ।सो तुरतहि वांछित फल पावै ॥ तुम्हीं वैष्णवी तुम्हीं रुद्रानी ।तुम्हीं शारदा अरु ब्रह्मानी ॥ रमा राधिका श्यामा काली ।तुम्हीं मातु सन्तन प्रतिपाली ॥ उमा माध्वी चण्डी ज्वाला ।वेगि मोहि पर होहु दयाला ॥ 10 तुम्हीं हिंगलाज महारानी ।तुम्हीं शीतला अरु विज्ञानी ॥ दुर्गा दुर्ग विनाशिनी माता ।तुम्हीं लक्ष्मी जग सुख दाता ॥ तुम्हीं जाह्नवी अरु रुद्रानी ।हे मावती अम्ब निर्वानी ॥ अष्टभुजी वाराहिनि देवा ।करत विष्णु शिव जाकर सेवा ॥ चौंसट्ठी देवी कल्यानी ।गौरि मंगला सब गुनखानी ॥ पाटन मुम्बादन्त कुमारी ।भाद्रिकालि सुनि विनय हमारी ॥ बज्रधारिणी शोक नाशिनी ।आयु रक्षिनी विन्ध्यवासिनी ॥ जया और विजया वैताली ।मातु सुगन्धा अरु विकराली ॥ नाम अनन्त तुम्हारि भवानी ।वरनै किमि मानुष अज्ञानी ॥ जापर कृपा मातु तब होई ।जो वह करै चाहे मन जोई ॥ 20 कृपा करहु मोपर महारानी ।सिद्ध करहु अम्बे मम बानी ॥ जो नर धरै मातु कर ध्याना ।ताकर सदा होय कल्याना ॥ विपति ताहि सपनेहु नाहिं आवै ।जो देवीकर जाप करावै ॥ जो नर कहँ ऋण होय अपारा ।सो नर पाठ करै शत बारा ॥ निश्चय ऋण मोचन होई जाई ।जो नर पाठ करै चित लाई ॥ अस्तुति जो नर पढ़े पढ़अवे ।या जग में सो बहु सुख पावे ॥ जाको व्याधि सतावे भाई ।जाप करत सब दूर पराई ॥ जो नर अति बन्दी महँ होई ।बार हजार पाठ करि सोई ॥ निश्चय बन्दी ते छुट जाई ।सत्य वचन मम मानहु भाई ॥ जापर जो कछु संकट होई ।निश्चय देविहिं सुमिरै सोई ॥ 30 जा कहँ पुत्र होय नहिं भाई ।सो नर या विधि करे उपाई ॥ पाँच वर्ष जो पाठ करावै ।नौरातन महँ विप्र जिमावै ॥ निश्चय होहिं प्रसन्न भवानी ।पुत्र देहिं ता कहँ गुणखानी ॥ ध्वजा नारियल आन चढ़ावै ।विधि समेत पूजन करवावै ॥ नित प्रति पाठ करै मन लाई ।प्रेम सहित नहिं आन उपाई ॥ यह श्री विन्ध्याचल चालीसा ।रंक पढ़त होवे अवनीसा ॥ यह जन अचरज मानहु भाई ।कृपा दृश्टि जापर होइ जाई ॥ जै जै जै जग मातु भवानी ।कृपा करहु मोहि निज जन जानी ॥ 40

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Kali Mata Chalisa-माँ काली चालीसा

Kali Mata Chalisa:माँ काली चालीसा Kali Mata Chalisa:माँ काली को शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। Kali Mata Chalisa वे हिंदू धर्म की दस महाविद्याओं में से एक हैं। माँ काली की शक्ति को असीम माना जाता है और वे अपने भक्तों की रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं। Kali Mata Chalisa:माँ काली चालीसा का महत्व माँ काली की चालीसा का पाठ करने से मन में शक्ति और शांति का अनुभव होता है। Kali Mata Chalisa यह माना जाता है कि चालीसा का नियमित पाठ करने से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और वे मोक्ष प्राप्त करते हैं। Kali Mata Chalisa:माँ काली चालीसा का पाठ कैसे करें? Kali Mata Chalisa:माँ काली चालीसा के लाभ Kali Mata Chalisa -माँ काली चालीसा ॥दोहा॥जयकाली कलिमलहरण,महिमा अगम अपार ।महिष मर्दिनी कालिका,देहु अभय अपार ॥ ॥ चौपाई ॥अरि मद मान मिटावन हारी ।मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥ अष्टभुजी सुखदायक माता ।दुष्टदलन जग में विख्याता ॥ भाल विशाल मुकुट छवि छाजै ।कर में शीश शत्रु का साजै ॥ दूजे हाथ लिए मधु प्याला ।हाथ तीसरे सोहत भाला ॥4॥ चौथे खप्पर खड्ग कर पांचे ।छठे त्रिशूल शत्रु बल जांचे ॥ सप्तम करदमकत असि प्यारी ।शोभा अद्भुत मात तुम्हारी ॥ अष्टम कर भक्तन वर दाता ।जग मनहरण रूप ये माता ॥ भक्तन में अनुरक्त भवानी ।निशदिन रटें ॠषी-मुनि ज्ञानी ॥8॥ महशक्ति अति प्रबल पुनीता ।तू ही काली तू ही सीता ॥ पतित तारिणी हे जग पालक ।कल्याणी पापी कुल घालक ॥ शेष सुरेश न पावत पारा ।गौरी रूप धर्यो इक बारा ॥ तुम समान दाता नहिं दूजा ।विधिवत करें भक्तजन पूजा ॥12॥ रूप भयंकर जब तुम धारा ।दुष्टदलन कीन्हेहु संहारा ॥ नाम अनेकन मात तुम्हारे ।भक्तजनों के संकट टारे ॥ कलि के कष्ट कलेशन हरनी ।भव भय मोचन मंगल करनी ॥ महिमा अगम वेद यश गावैं ।नारद शारद पार न पावैं ॥16॥ भू पर भार बढ्यौ जब भारी ।तब तब तुम प्रकटीं महतारी ॥ आदि अनादि अभय वरदाता ।विश्वविदित भव संकट त्राता ॥ कुसमय नाम तुम्हारौ लीन्हा ।उसको सदा अभय वर दीन्हा ॥ ध्यान धरें श्रुति शेष सुरेशा ।काल रूप लखि तुमरो भेषा ॥20॥ कलुआ भैंरों संग तुम्हारे ।अरि हित रूप भयानक धारे ॥ सेवक लांगुर रहत अगारी ।चौसठ जोगन आज्ञाकारी ॥ त्रेता में रघुवर हित आई ।दशकंधर की सैन नसाई ॥ खेला रण का खेल निराला ।भरा मांस-मज्जा से प्याला ॥24॥ रौद्र रूप लखि दानव भागे ।कियौ गवन भवन निज त्यागे ॥ तब ऐसौ तामस चढ़ आयो ।स्वजन विजन को भेद भुलायो ॥ ये बालक लखि शंकर आए ।राह रोक चरनन में धाए ॥ तब मुख जीभ निकर जो आई ।यही रूप प्रचलित है माई ॥28॥ बाढ्यो महिषासुर मद भारी ।पीड़ित किए सकल नर-नारी ॥ करूण पुकार सुनी भक्तन की ।पीर मिटावन हित जन-जन की ॥15॥ तब प्रगटी निज सैन समेता ।नाम पड़ा मां महिष विजेता ॥ शुंभ निशुंभ हने छन माहीं ।तुम सम जग दूसर कोउ नाहीं ॥32॥ मान मथनहारी खल दल के ।सदा सहायक भक्त विकल के ॥ दीन विहीन करैं नित सेवा ।पावैं मनवांछित फल मेवा ॥17॥ संकट में जो सुमिरन करहीं ।उनके कष्ट मातु तुम हरहीं ॥ प्रेम सहित जो कीरति गावैं ।भव बन्धन सों मुक्ती पावैं ॥36॥ काली चालीसा जो पढ़हीं ।स्वर्गलोक बिनु बंधन चढ़हीं ॥ दया दृष्टि हेरौ जगदम्बा ।केहि कारण मां कियौ विलम्बा ॥ करहु मातु भक्तन रखवाली ।जयति जयति काली कंकाली ॥ सेवक दीन अनाथ अनारी ।भक्तिभाव युति शरण तुम्हारी ॥40॥ ॥दोहा॥प्रेम सहित जो करे,काली चालीसा पाठ ।तिनकी पूरन कामना,होय सकल जग ठाठ ॥

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Santoshi Mata Chalisa:संतोषी माता चालीसा

Santoshi Mata Chalisa:संतोषी माता चालीसा Santoshi Mata Chalisa:संतोषी माता की चालीसा हिंदू धर्म में एक लोकप्रिय स्तुति है, जो विशेष रूप से संतोषी माता की पूजा करने वालों द्वारा पढ़ी जाती है। संतोषी माता को संतोष की देवी माना जाता है और उन्हें सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति देने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। Santoshi Mata Chalisa:चालीसा का पाठ कैसे करें Santoshi Mata Chalisa:क्यों पढ़ें संतोषी माता की चालीसा Santoshi Mata Chalisa:ध्यान दें Santoshi Mata Chalisa:संतोषी माता चालीसा ॥ दोहा ॥बन्दौं सन्तोषी चरण रिद्धि-सिद्धि दातार ।ध्यान धरत ही होत नर दुःख सागर से पार ॥ भक्तन को सन्तोष दे सन्तोषी तव नाम ।कृपा करहु जगदम्ब अब आया तेरे धाम ॥ ॥ चौपाई ॥जय सन्तोषी मात अनूपम ।शान्ति दायिनी रूप मनोरम ॥ सुन्दर वरण चतुर्भुज रूपा ।वेश मनोहर ललित अनुपा ॥ श्‍वेताम्बर रूप मनहारी ।माँ तुम्हारी छवि जग से न्यारी ॥ दिव्य स्वरूपा आयत लोचन ।दर्शन से हो संकट मोचन ॥ 4 ॥ जय गणेश की सुता भवानी ।रिद्धि- सिद्धि की पुत्री ज्ञानी ॥ अगम अगोचर तुम्हरी माया ।सब पर करो कृपा की छाया ॥ नाम अनेक तुम्हारे माता ।अखिल विश्‍व है तुमको ध्याता ॥ तुमने रूप अनेकों धारे ।को कहि सके चरित्र तुम्हारे ॥ 8 ॥ धाम अनेक कहाँ तक कहिये ।सुमिरन तब करके सुख लहिये ॥ विन्ध्याचल में विन्ध्यवासिनी ।कोटेश्वर सरस्वती सुहासिनी ॥ कलकत्ते में तू ही काली ।दुष्ट नाशिनी महाकराली ॥ सम्बल पुर बहुचरा कहाती ।भक्तजनों का दुःख मिटाती ॥ 12 ॥ ज्वाला जी में ज्वाला देवी ।पूजत नित्य भक्त जन सेवी ॥ नगर बम्बई की महारानी ।महा लक्ष्मी तुम कल्याणी ॥ मदुरा में मीनाक्षी तुम हो ।सुख दुख सबकी साक्षी तुम हो ॥ राजनगर में तुम जगदम्बे ।बनी भद्रकाली तुम अम्बे ॥ 16 ॥ पावागढ़ में दुर्गा माता ।अखिल विश्‍व तेरा यश गाता ॥ काशी पुराधीश्‍वरी माता ।अन्नपूर्णा नाम सुहाता ॥ सर्वानन्द करो कल्याणी ।तुम्हीं शारदा अमृत वाणी ॥ तुम्हरी महिमा जल में थल में ।दुःख दारिद्र सब मेटो पल में ॥ 20 ॥ जेते ऋषि और मुनीशा ।नारद देव और देवेशा । इस जगती के नर और नारी ।ध्यान धरत हैं मात तुम्हारी ॥ जापर कृपा तुम्हारी होती ।वह पाता भक्ति का मोती ॥ दुःख दारिद्र संकट मिट जाता ।ध्यान तुम्हारा जो जन ध्याता ॥ 24 ॥ जो जन तुम्हरी महिमा गावै ।ध्यान तुम्हारा कर सुख पावै ॥ जो मन राखे शुद्ध भावना ।ताकी पूरण करो कामना ॥ कुमति निवारि सुमति की दात्री ।जयति जयति माता जगधात्री ॥ शुक्रवार का दिवस सुहावन ।जो व्रत करे तुम्हारा पावन ॥ 28 ॥ गुड़ छोले का भोग लगावै ।कथा तुम्हारी सुने सुनावै ॥ विधिवत पूजा करे तुम्हारी ।फिर प्रसाद पावे शुभकारी ॥ शक्ति-सामरथ हो जो धनको ।दान-दक्षिणा दे विप्रन को ॥ वे जगती के नर औ नारी ।मनवांछित फल पावें भारी ॥ 32 ॥ जो जन शरण तुम्हारी जावे ।सो निश्‍चय भव से तर जावे ॥ तुम्हरो ध्यान कुमारी ध्यावे ।निश्चय मनवांछित वर पावै ॥ सधवा पूजा करे तुम्हारी ।अमर सुहागिन हो वह नारी ॥ विधवा धर के ध्यान तुम्हारा ।भवसागर से उतरे पारा ॥ 36 ॥ जयति जयति जय संकट हरणी ।विघ्न विनाशन मंगल करनी ॥ हम पर संकट है अति भारी ।वेगि खबर लो मात हमारी ॥ निशिदिन ध्यान तुम्हारो ध्याता ।देह भक्ति वर हम को माता ॥ यह चालीसा जो नित गावे ।सो भवसागर से तर जावे ॥ 40 ॥ ॥ दोहा ॥संतोषी माँ के सदा बंदहूँ पग निश वास ।पूर्ण मनोरथ हो सकल मात हरौ भव त्रास ॥॥ इति श्री संतोषी माता चालीसा ॥

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