October 30, 2023

Rama ekadashi vrat katha : रमा एकादशी के दिन जरूर करें व्रत कथा का पाठ, हर मनोकामना होगी पूरी

हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी का व्रत रखा जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत में विधिवत पूजा करने के साथ-साथ इस व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए। रमा एकादशी Vrat katha एक समय की बात है कि मुचकुंद नाम का एक सत्यवादी तथा विष्णु भक्त राजा था। राजा ने अपनी प्यारी सी बेटी चंद्रभागा का विवाह राजा चंद्रसेन के पुत्र सोभन से किया था। राजा मुचुकुंद एकादशी का व्रत विधिवत तरीके से करता है। इतना ही नहीं उसकी प्रजा भी एकादशी के नियमों का अच्छी तरह से पालन करती थी। एक बार कार्तिक मास के दौरान सोभन ससुराल आया। उस दिन रमा एकादशी का व्रत था। राजा ने घोषणा कर दी कि सभी लोग रमा एकादशी का व्रत नियम पूर्वक करें। राजा की पुत्री चंद्रभागा को लगा कि ऐसे में उसके पति को अधिक पीड़ा होगी क्योंकि वह कमजोर हृदय का है। जब सोभन ने राजा का आदेश सुना तो पत्नी के पास आया और इस व्रत से बचने का उपाय पूछा। उसने कहा कि यह व्रत करने से वह मर जाएगा। इस पर चंद्रभागा ने कहा कि इस राज्य में रमा एकादशी के दिन कोई भोजन नहीं करता है। यदि आप व्रत नहीं कर सकते हैं तो दूसरी जगह चले जाएं। इस पर सोभन ने कहा कि वह मर जाएगा लेकिन दूसरी जगह नहीं जाएगा, वह व्रत करेगा। उसने रमा एकादशी व्रत किया, लेकिन भूख से उसका बुरा हाल हो गया था। रमा एकादशी की रात्रि के समय जागर भी ण था, वह रात सोभन के लिए असहनीय थी। अगले दिन सूर्योदय से पूर्व ही भूखे सोभन की मौत हो गई। ऐसे में  राजा मुचकुंद ने अपने दामाद सोभन का शव को जल प्रवाह करा दिया था और अपनी बेटी को सती न होने का आदेश दिया। उसने बेटी से भगवान विष्णु पर आस्था रखने को कहा। पिता की आज्ञा मानकर बेटी ने व्रत को पूरा किया। उधर रमा एकादशी व्रत के प्रभाव से सोभन जीवित हो गया और उसे विष्णु कृपा से मंदराचल पर्वत पर देवपुर नामक उत्तम नगर मिला। राजा सोभन के राज्य में स्वर्ण, मणियों, आभूषण की कोई कमी न थी। एक दिन राजा मुचकुंद के नगर का एक ब्राह्मण तीर्थ यात्रा करते हुए सोभन के नगर में पहुंचा। जहां उसने राजा सोभन से मुलाकात की। राजा ने अपनी पत्नी चंद्रभागा तथा ससुर मुचकुंद के बारे में पूछा। ब्राह्मण ने कहा कि वे सभी कुशल हैं। आप बताएं, रमा एकादशी का व्रत करने के कारण आपकी मृत्यु हो गई थी। अपने बारे में बताएं। फिर आपको इतना सुंदर नगर कैसे प्राप्त हुआ? तब सोभन ने कहा कि यह सब रमा एकादशी व्रत का फल है, लेकिन यह अस्थिर है क्योंकि वह व्रत विवशता में किया था। जिस कारण अस्थिर नगर मिला, लेकिन चंद्रभागा इसे स्थिर कर सकती है। उस ब्राह्मण ने सारी बातें चंद्रभागा से कही। तब चंद्रभागा ने कहा कि यह स्वप्न तो नहीं है। ब्राह्मण ने कहा कि नहीं, वह प्रत्यक्ष तौर पर देखकर आया है। उसने चंद्रभागा से कहा कि तुम कुछ ऐसा उपाय करो, जिससे वह नगर स्थिर हो जाए। तब चंद्रभागा ने उसे देव नगर में जाने को कहा। उसने कहा कि वह अपने पति को देखेंगी और अपने व्रत के प्रभाव से उस नगर को स्थिर कर देगी। तब ब्राह्मण उसे मंदराचल पर्वत पर वामदेव के पास ले गया। वामदेव ने उसकी कथा सुनकर उसे मंत्रों से अभिषेक किया। फिर चंद्रभागा ने व्रत के प्रभाव से दिव्य देह धारण किया और सोभन के पास गई। सोभन ने उसे सिंहासन पर अपने पास बैठाया। फिर चंद्रभागा ने पति को अपने पुण्य के बारे में सुनाया। उसने कहा कि वह अपने मायके में 8 वर्ष की आयु से ही नियम से एकादशी व्रत कर रही हैं। उस व्रत के प्रभाव से यह नगर स्थिर हो जाएगा तथा यह प्रलय के अंत तक स्थिर रहेगा। दिव्य देह धारण किए चंद्रभागा अपने पति सोभन के साथ उस नगर में सुख पूर्वक रहने लगी।

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Rama Ekadashi 2023:रमा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा, जानिए महत्व

कार्तिक माह में 2 एकादशी आती है। रमा एकादशी और देवउठनी एकादशी। रमा एकादशी कृष्ण पक्ष में आती है और देवउठनी एकादशी शुक्ल पक्ष में आती है। इस बार रमा एकादशी का व्रत 09 नवंबर 2023 को गुरुवार को रखी जाएगी। रमा एकादशी को रमा क्यों कहते हैं और क्या है इसका महत्व।  Rama Ekadashi kab hai:रामा एकादशी 2023 कब है रमा एकादशी गुरुवार, 09 नवंबर 2023 को है। एकादशी 08 नवंबर 2023 को सुबह 08:23 बजे से शुरू होकर 09 नवंबर 2023 को सुबह 10:40 बजे समाप्त होगी। माता लक्ष्मी और भगवान् श्री विष्णु की पूजा करने का विधान है, ऐसा माना जाता है की इस व्रत और पूजा के करने से माता लक्ष्मी अति प्रसन्न होती है,और वे अपने भक्तो की सभी मनोकामना को पूर्ण करती है। Rama Ekadashi:रमा एकादशी का महत्व रमा का एकादशी : माता लक्ष्मी के रमा स्वरूप को इस दिन पूजा जाता है। रमा के साथ ही श्री हरि विष्णु के पूर्णावता केशव स्वरूप की पूजा भी होती है। यह चातुर्मास की अंतिम एकादशी है। Rama Ekadashi 2023: कार्तिक माह में 2 एकादशी आती है। रमा एकादशी और देवउठनी एकादशी। रमा एकादशी कृष्ण पक्ष में आती है और देवउठनी एकादशी शुक्ल पक्ष में आती है। इस बार रमा एकादशी का व्रत 09 नवंबर 2023 को गुरुवार को रखी जाएगी। रमा एकादशी को रमा क्यों कहते हैं और क्या है इसका महत्व। 

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