October 25, 2023

October Chandra Grahan 2023: इस ग्रहण से पहले ही बंद हो जाएंगे मंदिर, 12 राशियों में होगी जबरदस्त उथल- पुथल, पढ़ें अपनी राशि का हाल

इस साल अक्टूबर में दो ग्रहण लगने जा रहे हैं। यह साल का दूसरा सूर्य ग्रहण होगा, जो 14 अक्टूबर को लगेगा। इसके बाद 28 और 29 अक्टूबर की रात को चंद्र ग्रहण लगेगा। ग्रहण का ज्योतिषिय दृष्टि से खास महत्व होचा है। यह विभिन्न राशियों पर प्रभाव तो डालता ही है साथ ही धार्मिक नजरिए से भी खास होते हैं। ग्रहण से पहले सूतक लग जाते हैं, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का सूतक अलग-अलग होता है। सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण से 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले लग जाता है। सूतक काल शुरू होते ही पूजा पाठ बंद कर दिए जाते हैं। मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं। मंदिरों में कोई प्रवेश कर पूजा नहीं कर सकता है। आंध्र प्रदेश का तिरूमाला मंदिर भी ग्रहण के कारण 28 अक्टूबर की शाम को बंद हो जाएगा। शाम 7 बजे के बाद किसी को इसमें दर्शन नहीं करने दिए जाएंगे।  इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण 29 अक्टूबर को 01 बजकर 06 रात को शुरू होगा और तड़के 02 बजकर 22 मिनट पर खत्म हो जाएगा। भारत में ग्रहण की अवधि 1 घंटा 16 मिनट की होगी। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा और इसका सूतक काल मान्य होगा। इसलिए एक दिन पहले से सूतक काल लग जाएगा और 28 अक्टूबर को मंदिरों के कपाट शाम 7 बजे से बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद ग्रहण के बाद ही मंदिर खोला जाएगा। कई जगह शाम चंद्र ग्रहण और इसके सूतक 4:05 बजे लग जाएगा, इसलिए इस समय मंदिर में दर्शन करने न जाएं।  यह अगले दिन 29 अक्टूबर को सुबह खोला जाएगा। सूर्य ग्रहण की बात करें तो भारत में यह दिखाई नहीं देगा, इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा। साल का दूसरा सूर्यग्रहण 14 अक्टूबर 2023 को लगेगा। यह ग्रहण भारतीयसमयानुसार, सूर्यग्रहण रात 08 बजकर 34 मिनट से आरंभ होगा और मध्यरात्रि 02 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। यह भारत में नहीं उत्तरी अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको, अर्जेटीना, कोलंबिया, पेरू, क्यूबा, जमैका, हैती, ब्राजील, बहामास, एंटीगुआ, उरुग्वे, उत्तरी अमेरिका, बारबाडोस आदि स्थानों पर नजर आएगा।  Chandra Grahan 2023: कब है साल का आखिरी चंद्र ग्रहण? जानिए सूतक काल का समय और धार्मिक महत्व 12 राशियों में होगी जबरदस्त उथल- पुथल, पढ़ें अपनी राशि का हाल अक्टूबर माह में 15 दिनों के भीतर सूर्य व चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। सूर्य ग्रहण की घटना तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है। अक्टूबर माह में 15 दिनों के भीतर सूर्य व चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। सूर्य ग्रहण की घटना तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है, जबकि चंद्र ग्रहण में पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच से गुजरती है। 14 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण और 28 अक्टूबर को चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। आइए जानते हैं, सूर्य और चंद्र ग्रहण लगने से कैसा रहेगा सभी राशियों का हाल। मेष राशि- वाणी में सौम्यता रहेगी। फिर भी संयत रहें। क्रोध व आवेश के अतिरेक से बचें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में परिवर्तन हो सकता है। बाधा का सामना करना पड़ सकता है। वृष राशि- मन में शांति व प्रसन्नता रहेगी। जीवन साथी के स्वास्थ्य में सुधार होगा। नौकरी में परिवर्तन की संभावना बन रही हैं। किसी दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। मिथुन राशि- मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भी बहुत रहेगा। नौकरी में तरक्की के मौके मिलेंगे। परंतु कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है। परिश्रम अधिक रहेगा। कर्क राशि- मन परेशान रहेगा। धैर्यशीलता बनाए रखने का प्रयास करें। जीवन साथी का साथ मिलेगा। किसी मित्र के सहयोग से आय में वृद्धि हो सकती है। सचेत रहें। सिंह राशि- मन अशांत रहेगा। मानसिक तनाव से बचें। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। परिवार के साथ यात्रा पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है। आय में वृद्धि होगी। कन्या राशि- आत्मविश्वास में कमी रहेगी। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जा सकते हैं। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। कारोबार के लिए विदेश जा सकते हैं। तुला राशि- मन परेशान रहेगा। शैक्षिक कार्यों में बाधा आ सकती हैं। सचेत रहें। कारोबार में लाभ के अवसर मिलेंगे। पिता से धन की प्राप्ति हो सकती है। वृश्चिक राशि- मन परेशान रहेगा। संयत रहें। क्रोध के अतिरेक से बचें। कारोबार में वृद्धि होगी। भागदौड़ भी अधिक रहेगी। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। धनु राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। भावनाओं को वश में रखें। पिता का साथ मिलेगा। वाहन के रख-रखाव तथा वस्त्रों आदि पर खर्च बढ़ सकते हैं। मकर राशि- मन प्रसन्न तो रहेगा। परंतु आत्मविश्वास में कमी भी रहेगी। बातचीत में संतुलित रहें। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। परिश्रम अधिक रहेगा। मित्रों का सहयोग मिलेगा। कुंभ राशि- मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। आत्मविश्वास तो भरपूर रहेगा। माता की सेहत का ध्यान रखें। परिवार का साथ मिलेगा। शैक्षिक कार्यों में बाधा आ सकती है। मीन राशि- आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। परंतु नकारात्मक विचारों से बचें। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्धि भी होगी। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा।

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Chandra Grahan 2023: कब है साल का आखिरी चंद्र ग्रहण? जानिए सूतक काल का समय और धार्मिक महत्व

October 2023: साल 2023 का अंतिम चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा। मान्यतानुसार सूतक काल से चंद्र ग्रहण तक कुछ विशेष कार्यों को नहीं करना चाहिए। Chandra Grahan 2023: अक्टूबर महीने में साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। । साल 2023 का पहला चंद्र ग्रहण 5 मई 2023 को लगा था, लेकिन भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं दिया था। साल का दूसरा चंद्रग्रहण 28 अक्टूबर 2023 को लगने जा रहा है और यह भारत में  दिखाई देगा। इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा। इस दौरान जातकों को कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। बता दें कि जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, तब चंद्र ग्रहण लगता है। इसका ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टि से विशेष महत्व है। चलिए साल के अंतिम चंद्र ग्रहण का समय और सूतक काल के बारे में जानते हैं। चंद्रग्रहण का समय: साल 2023 का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अक्टूबर को रात 11 बजकर 32 मिनट से शुरू होगा और 29 अक्टूबर को सुबह 3 बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगा। सूतक काल का समय: साल का अंतिम चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। इसलिए चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी 9 घंटे पहले से आरंभ हो जाएगा। सूतक काल के दौरान शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है।  कहां-कहां नजर आएगा चंद्र ग्रहण?  भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया,यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, एशिया, हिंद महासागर, अटलांटिक, आर्कटिक और अंटार्कटिका, दक्षिणी प्रशांत महासागर में चंद्रग्रहण दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण से जुड़ी खास बातें: चंद्र ग्रहण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इसलिए इस दौरान गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।ग्रहण के दौरान घर में पके हुए भोजन में तुलसी का पत्ता डाल देना चाहिए। मान्यता है कि तुलसी का पत्ता नहीं डालने से नकारात्मक शक्तियों के कारण खाना दूषित हो जाता है।चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन का सेवन ना करें। हालांकि, बीमार व्यक्ति, बच्चे और बड़े-बुजुर्ग भोजन कर सकते हैं।धार्मिक मान्यता है कि चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद सबसे पहले स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े पहनना चाहिए।इसके बाद घर और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें।

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Valmiki Jayanti 2023: कब है वाल्मिकी जयंती? नोट करें डेट और जानें इसका पौराणिक महत्व

Valmiki Jayanti 2023: सनातन धर्म में महर्षि वाल्मीकी को पहला कवि माना जाता है और उन्होंने ही हिंदूओं के महाकाव्य रामायण की रचना की थी. Valmiki Jayanti 2023: दुनिया की विभिन्न भाषाओं में जो उच्च कोटि के महाकाव्य हैं उनमें महर्षि वाल्मीकी द्वारा रचित रामायण का विशेष स्थान है. हिंदू धर्म में रामायण एक ऐसा ग्रंथ है जो कि लगभग हर घर में मिलेगा और इसका पूजन किया जाता है. कहते हैं कि रामायण का पाठ करने से व्यक्ति को पॉजिटिविटी मिलती है और जीवन में आ रही परेशानियों से बाहर आने में ​मदद मिलती है. इस ग्रंथ की रचना महर्षि वाल्मीकी ने की थी और इसलिए हिंदू धर्म में वाल्मीकी जयंती का खास महत्व माना गया है. इस जयंती को वाल्मीकी समाज सहित सभी वर्गों के लोग बड़ी धूमधाम से मनाते हैं. आइए जानते हैं इस साल कब है वाल्मीकी जयंती? वाल्मीकी जयंती 2023 कब है? हर साल आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन वाल्मीकी जयंती मनाई जाती है और इसी दिन शरद पूर्णिमा भी होती है. पंचांग के अनुसार इस साल आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि 28 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 17 पर शुरू होगी और 29 अक्टूबर को देर रात 1 बजकर 53 पर समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार इस साल 28 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा के दिन वाल्मीकी जयंती मनाई जाएगी. थिरुवनमियूर में है महर्षि वाल्मीकि का मंदिर चेन्नई के थिरुवनमियूर में महर्षि वाल्मीकि मंदिर 1300 साल से भी ज्यादा पुराना एक मंदिर है। इसे मारकंडेश्वर मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर का निर्माण चोल शासनकाल के दौरान किया गया था। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की पूजा करने के लिए ऋषि वाल्मीकि मारकंडेश्वर मंदिर में पूजा की थी। बाद में इस जगह का नाम थिरुवाल्मिकियूर रखा गया, जो अब थिरुवनमियूर में बदल गया है। वाल्मीकी जयंती का महत्व महर्षि वाल्मीकी ने हिंदुओं को सबसे बड़े महाकाव्य रामायण की रचना की थी जो कि हर घर में रखा जाता है. वाल्मीकी जयंती के पर्व को बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस दिन कई सामाजिक व धार्मिक आयो​जन किए जाते हैं. महर्षि वाल्मीकी के जन्म को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं. प्रचलित मान्यता के अनुसार वाल्मी​कि का जन्म महर्षि कश्यप और देवी अदिति के 9वें पुत्र और उनकी पत्नी चर्षिणी से हुआ था. कहा जाता है कि महर्षि वाल्मीकि ने ही दुनिया में सबसे पहले श्लोक ​की रचना की थी. वाल्मीकि जी को एक लेकर एक प्रचलित कहानी ये भी है ​कि जब भगवान राम ने माता सीता का त्याग किया था तो माता सीता ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में ही निवास किया था. इसी आश्रम में ही उन्होंने लव-कुश को जन्म दिया था. इसलिए लोगों के बीच वाल्मीकि जयंती का विशेष महत्व है. मान्यता है कि म​हर्षि वाल्मीकि के पास इतनी मजबूत ध्यान शक्ति थी कि वे एक बार ध्यान में लीन हो गए थे और उनके शरीर के ऊपर दीमन में घर बना लिया था और फिर भी उनका ध्यान भंग नहीं हुआ. महर्षि वाल्मीकि से जुड़ा इतिहास म​हर्षि वाल्मीकि को लेकर इतिहास में कई कहानियां प्रचलित हैं और पौराणिक कथाओं के अनुसार वाल्मीकि का नाम रत्नाकर था और वे एक डाकू थे. लेकिन बाद में जब उन्हें इस बात का ज्ञान हुआ कि वे गलत रास्ते पर हैं तब उन्होंने इस रास्ते को छोड़ धर्म का मार्ग अपनाया था. उन्हें देवर्षि नारद ने राम नाम का जप करने की सलाह दी थी. जिसके बाद वाल्मीकि जी राम नाम में लीन होकर एक तपस्वी बन गए. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ही ब्रह्मा जी ने उन्हें ज्ञान का भंडार दिया और फिर उन्होंने रामायण लिखी.

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Karwa Chauth 2023 Date: इस दिन सुहागिन महिलाएं रखेंगी करवा चौथ का व्रत, जानें सही डेट, मुहूर्त और महत्व

Karwa Chauth 2023: हिंदू धर्म में करवा चौथ व्रत का विशेष महत्व है। इस व्रत को रखने से पति की आयु लंबी होती है। तो आइए जानते हैं इस बार विवाहित महिलाएं कब करवा चौथ का व्रत रखेंगी। सुहागिनों के सबसे बड़े पर्व में से एक करवा चौथ इस साल 1 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं दिनभर बिना अन्न और जल के उपवास रखती हैं और फिर रात में चांद को देखने के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं। इस व्रत में चांद और करवा माता के साथ शिव परिवार की पूजा की जाती है। कहते हैं कि करवा चौथ व्रत को रखने से न केवल पति दीर्घायु होते हैं बल्कि दांपत्य जीवन में भी खुशहाली और मिठास बनी रहती है। करवा चौथ व्रत कथा: पतिव्रता करवा धोबिन की कथा! (Karwa Chauth Vrat Katha) करवा चौथ व्रत 2023 पूजा शुभ मुहूर्त कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आरंभ-  31 अक्टूबर को रात 9 बजकर 30 मिनट से  कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि समाप्त- 1 नवंबर 2023 को रात 9 बजकर 19 तक  करवा चौथ व्रत तिथि-  1 नवंबर 2023 करवा चौथ व्रत पूजा मुहूर्त- 1 नवंबर को शाम 5 बजकर 44 मिनट से 7 बजकर 02 मिनट तक करवा चौथ 2023 चंद्रोदय का समय- 1 नवंबर 2023 को  8 बजकर 26 मिनट पर करवा चौथ व्रत का महत्व करवा चौथ से जुड़ी मान्यताओं के मुताबिक, इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद मिलता है। करवा चौथ के दिन उपवास रखने और विधि विधान से साथ पूजा करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है। साथ ही पति-पत्नी का रिश्ता और अधिक अटूट हो जाता है।  करवा चौथ का व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं रात में चांद को अर्घ्य देकर अपने पति के हाथ से पानी पीकर ही अपना व्रत खोलती हैं। 

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Karwa Chauth 2023: करवा चौथ कब है? सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी चंद्रमा की पूजा, जानें मुहूर्त, अर्घ्य समय और पारण

Karwa Chauth 2023 date: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. उस दिन कार्तिक संकष्टी चतुर्थी होती है, जिसे वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी कहते हैं. करवा चौथ के दिन सुहागन महिलाएं और विवाह योग्य युवतियां अपने जीवनसाथी की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. इस व्रत में चंद्रमा की पूजा करना और अर्घ्य देना जरूरी है. इसके बिना करवा चौथ का व्रत पूरा नहीं होता है. करवा चौथ 2023 कब है?वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अक्टूबर दिन मंगलवार को रात 09 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ हो रही है. य​ह तिथि 01 नवंबर बुधवार को रात 09 बजकर 19 मिनट पर खत्म होगी. उदयातिथि और चतुर्थी के चंद्रोदय के आधार पर करवा चौथ व्रत 1 नवंबर बुधवार को रखा जाएगा. इस दिन व्रती को 13 घंटे 42 मिनट तक निर्जला व्रत रखना होगा. व्रत सुबह 06 बजकर 33 मिनट से रात 08 बजकर 15 मिनट तक होगा. करवा चौथ व्रत कथा | Karwa Chauth Vrat Katha In Hindi करवा चौथ 2023 का पूजा मुहूर्त क्या है?जो महिलाएं 01 नवंबर बुधवार को करवा चौथ का व्रत रखेंगी, उनको शाम में पूजा के लिए 1 घंटा 18 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 36 मिनट से शाम 06 बजकर 54 मिनट तक है. करवा चौथ 2023 पर चंद्रमा पूजन और अर्घ्य का समय क्या है?करवा चौथ के दिन चंद्रोदय रात 08 बजकर 15 मिनट पर होगा. इस समय से आप चंद्रमा पूजन के साथ अर्घ्य दे सकते हैं. चंद्रमा को अर्घ्य देने पर व्रत पूरा होता है. करवा चौथ 2023 पारण समयकरवा चौथ व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है. पति के हाथों जल ​पीकर व्रत को पूरा करते हैं. 1 नवंबर को रात 08:15 बजे के बाद आप कभी भी पारण कर सकती हैं. तीन योग में है करवा चौथ 2023इस साल करवा चौथ पर 3 योग बन रहे हैं. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:33 बजे से प्रारंभ हो रहा है, जो अगले दिन प्रात: 04:36 बजे तक रहेगा. सर्वार्थ सिद्धि को शुभ योग माना जाता हैं. इसमें किए गए कार्य सफल सिद्ध होते हैं. उस दिन प्रात:काल से दोपहर 02 बजकर 07 मिनट तक परिघ योग है, उसके बाद से ​शिव योग प्रारंभ होगा, जो अगले दिन तक रहेगा. करवा चौथ के दिन मृगशिरा नक्षत्र सुबह से लेकर अगले दिन 2 नंवबर को सुबह 04:36 बजे तक है.

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