September 15, 2023

सपने में खुद की मृत्यु देखने का मतलब होता है बेहद खास, जानें-इससे जुड़ी रोचक बातें

सपने आगामी भविष्य के संकेत होते हैं। इसमें कई सपने अच्छे होते हैं तो कई सपने बुरे होते हैं। वहीं कई सपने बेहद डरावने होते हैं। इन सपनों को देख व्यक्ति घबरा जाता है। खासकर सपने में खुद की मृत्यु देखना तो और भी डरावना होता है। सपने का वास्तविक जीवन से गहरा संबंध होता है। ये आगामी भविष्य के संकेत होते हैं। इसमें कई सपने अच्छे होते हैं, तो कई सपने बुरे होते हैं। वहीं, कई सपने बेहद डरावने होते हैं। इन सपनों को देख व्यक्ति घबरा जाता है। खासकर, सपने में खुद की मृत्यु देखना तो और भी डरावना होता है। लोग सपने में खुद की मृत्यु देख डर जाते हैं। अगर आप भी सपने में खुद की मृत्यु या किसी अनजान व्यक्ति की मृत्यु देखते हैं, तो इन सपनों का मतलब बहुत खास होता है। आइए, इन सपनों के बारे में सबकुछ जानते हैं क्या आप ने भी सपने में देखी है खुद की शादी? जानें क्या है इसका मतलब अगर आप सपने में किसी मृत व्यक्ति को देखते हैं, तो ये संकेत है कि उस व्यक्ति से आपका बेहद खास लगाव है। वहीं, बार-बार मृत व्यक्ति का सपना देखना शुभ नहीं होता है। ये संकेत है कि आने वाले समय में कोई बड़ी मुसीबत आ सकती है। अगर आप सपने में खुद की मृत्यु देखते हैं, तो ये शुभ संकेत है। इस सपने का मतलब यह है कि आपकी उम्र लंबी होने वाली है। आसान शब्दों में कहें तो जीवन में व्याप्त सभी परेशानियां दूर होने वाली हैं। अगर आप विषम परिस्थिति से गुजर रहे हैं, तो सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी। साथ ही जीवन में कोई बड़ी खुशखबरी मिलने वाली है। स्वप्न शास्त्र की मानें तो सपने में बीमार व्यक्ति को देखना या बीमार व्यक्ति की मृत्यु के सपने देखना नुकसानदेह नहीं होता है। इस सपने का मतलब होता है कि जल्द बीमार व्यक्ति की सेहत में सुधार होने वाला है। सपने में स्वर्गवासी पिता का देखना सकारात्मक संकेत होता है। सपने में स्वर्गवासी पिता से बात करना या पिता को देखना शुभ होता है। इस सपने का मतलब होता है कि आपके जीवन में खुशियां आने वाली हैं। इस सपने का यह भी अर्थ होता है कि जल्द घर में कोई उत्सव का आयोजन होने वाला है। अगर आप सपने में किसी बीमार व्यक्ति की मौत देखते हैं तो आपको बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है. स्वप्नशास्त्र के अनुसार, यह सपना उस व्यक्ति की सेहत में सुधार होने का संकेत देता है. किसी की मौत का सपना देखना शुभ माना जाता है. अगर सपने में आपको आपके पूर्वज दिखाई देते हैं तो इसका संकेत है कि या तो उनकी कोई इच्छा अतृप्त रह गई है या फिर वो आपको किसी आगामी घटना का आभास करा रहे हैं. अगर आप सपने में खुद को बीमार होते हुए देखता है तो स्वप्न शास्त्र के अनुसार यह सपना अशुभ होता है. इस सपने का अर्थ है कि आने वाले समय में आपको बहुत सारे कष्टों का सामना करना पड़ सकता है. आपको धन की हानि भी ह सकती है.

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Shardiya Navratri 2023 Date: शारदीय नवरात्रि कब से हो रहे शुरू, जानें महत्व, कलश स्थापना का मुहूर्त

सनातन धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शारदीय नवरात्रि में मां शक्ति के 9 स्वरूपों की उपासना करने से साधक को विशेष लाभ प्राप्त होता है। साथ ही जीवन में आ रही सभी समस्या दूर हो जाती है। हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। बता दें कि हर वर्ष दो नवरात्रि पर मनाए जाते हैं। एक चैत्र मास में और दूसरा आश्विन मास में। आश्विन मास में पड़ने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना और नौ दिनों तक देवी दुर्गा की उपासना करने से साधक को सुख, समृद्धि एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं क्या करें, क्या नहीं? जानिए यहां शारदीय नवरात्रि 2023 तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 अक्टूबर रात्रि 11 बजकर 24 मिनट से शुरू होगी और 16 अक्टूबर मध्य रात्रि 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। ऐसे में शारदीय नवरात्रि पर्व का शुभारंभ 15 अक्टूबर 2023, रविवार के दिन होगा। इस विशेष दिन पर चित्रा नक्षत्र और स्वाति नक्षत्र का निर्माण हो रहा है, जिसे शुभ कार्यों के लिए बहुत ही श्रेष्ठ माना जाता है। शारदीय नवरात्रि 2023 घटस्थापना समय शास्त्रों में बताया गया है कि शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर घटस्थापना मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त के दौरन तय होता है। घट स्थापना का समय निश्चित चित्रा नक्षत्र के दौरन ही होता है। ऐसे में इस दिन चित्रा नक्षत्र 14 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 24 मिनट से 15 अक्टूबर शाम 06 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 04 मिनट से सुबह 11 बजकर 50 मिनट के बीच रहेगा, इसलिए घटस्थापना पूजा भी इसी अवधि में की जाएगी। शारदीय नवरात्रि का धार्मिक महत्व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पहले चैत्र नवरात्रि को ही बहुत धूमधाम से मनाया जाता था लेकिन जब भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त की तब वह चैत्र नवरात्रि का इंतजार नहीं करना चाहते थे और आश्विन मास की प्रतिपदा को दुर्गा पूजा आयोजित की। तभी से शारदीय नवरात्रि की धूम होने लगी। देवी भागवत पुराण में भी भगवान श्रीराम द्वारा शारदीय नवरात्रि का व्रत और शक्ति पूजन करने का वर्णन मिलता है। इसके साथ ही आश्विन मास में ही मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस पर आक्रमण कर दिया और उससे नौ दिन तक युद्ध किया और दसवें दिन राक्षस का वध कर दिया इसलिए नौ दिन तक मां दुर्गी की पूजा शक्ति के रूप में की जाती है। कलश स्थापना का मुहूर्त शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि यानी पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा शुरू होती है। शक्ति पूजा से पहले मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 15 अक्टूबर को 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक है। ऐसे में कलश स्थापना के लिए 46 मिनट का समय दिया गया है। नवरात्रि में इस दिन करें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा नवरात्रि का पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा – 15 अक्टूबर 2023नवरात्रि का दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा – 16 अक्टूबर 2023नवरात्रि का तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा – 17 अक्टूबर 2023नवरात्रि का चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा – 18 अक्टूबर 2023नवरात्रि का पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा – 19 अक्टूबर 2023 नवरात्रि का छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा – 20 अक्टूबर 2023नवरात्रि का सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा – 21 अक्टूबर 2023नवरात्रि का आठवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा – 22 अक्टूबर 2023नवरात्रि का नौवें दिन मां महागौरी की पूजा – 23 अक्टूबर 2023विजयदशमी या दशहरा पर्व – 24 अक्टूबर 2023

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Chandra Darshan 2023: आज कब और कैसे करें चंद्र दर्शन, जानें चंद्रमा की पूजा विधि और उपाय

ज्येष्ठ मास की अमावस्या के बाद चंद्र देवता के दर्शन का सौभाग्य कब प्राप्त होगा और क्या है इसकी पूजा विधि, मंत्र और धार्मिक महत्व, विस्तार से जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख. सनातन परंपरा में किसी भी मास की अमावस्या के बाद होने वाले चंद्र दर्शन का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व माना गया है. यही कारण है कि जीवन में शुभता और सौभाग्य की कामना लिए लोग इस दिन का बहुत बेसब्री से इंतजार करते हैं. ज्योतिष में जिस चंद्रमा को मन का कारक माना गया है, उसका दर्शन महीने की 20 तारीख को होगा. चंद्र दर्शन करना किस समय बहुत ज्यादा शुभ रहता है? चंद्र दर्शन की पूजा विधि और मंत्र क्या है? आइए इन सभी बातों के साथ चंद्र देवता की पूजा का पुण्य लाभ दिलाने वाला महाउपाय को विस्तार से जानते हैं. Vishwakarma Jayanti 2023 Date:  कब है विश्वकर्मा जयंती, जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त चंद्र दर्शन की पूजा विधि हिंदू मान्यता के अनुसार चंद्र दर्शन करने के लिए व्यक्ति को शाम के समय तन और मन से पवित्र होकर इस पूजा को करना चाहिए. यदि संभव हो तो चंद्र दर्शन करते समय व्यक्ति को सफेद कपड़े पहनना चाहिए. चंद्र दर्शन की पूजा में सबसे पहले दूध और उसके बाद शुद्ध जल चंद्र देवता को अर्पित करें. इसके बाद उन्हें खीर का भोग लगाकर धूप-दीप दिखाएं और चंद्र देवता के मंत्र ‘ॐ सों सोमाय नम:’ अथवा ‘ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम:’का जप करें. मान्यता है कि यह पूजा और मंत्र जप पति और पत्नी दोनों साथ मिलकर करें तो वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहता है. इसी तरह चंद्र दर्शन से व्यक्ति मन से जुड़ी चिंताएं दूर होती है और घर-परिवार में सुख-सौभाग्य बना रहता है. चंद्र दर्शन का महत्व चंद्र ग्रह को ज्ञान, बुद्धि और मन का स्वामी ग्रह माना जाता है. चंद्र दर्शन के दिन चंद्रमा के दर्शन से विशेष लाभ मिलते हैं. लोग भगवान की कृपा पाने के लिए कठोर व्रत और तपस्या करते हैं. चंद्र दर्शन और पूजा से भक्तों को सौभाग्य और समृद्धि प्राप्त होती है. जीवन से नकारात्मकता को कम करने के लिए चंद्र यंत्र की पूजा करनी चाहिए. ऐसा करने से लाभ मिलता है. इस दिन ब्रह्मणों को दान करने से भी लाभ मिलता है.

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