May 25, 2023

प्रसिद्ध 10 गणेश मंदिर, जहां जाने से होती हैं मुरादें पूर्ण

1. सिद्धि विनायक गणेश मंदिर मुंबई 2. चिंतामन गणपति उज्जैन 3. रॉकफोर्ट उच्ची पिल्लयार मंदिर, तमिलनाडु 4. कनिपकम विनायक मंदिर, चित्तूर 5. मनकुला विनायगर मंदिर, पुडुचेरी 6. मधुर महागणपति मंदिर, केरल 7. डोडा गणपति मंदिर, बेंगलुरु 8. रणथंबौर गणेश मंदिर, राजस्‍थान 9. गणेश टोक मंदिर, गंगटोक (सिक्किम) 10. डोडीताल, उत्तराखंड यूं तो संसार में हजारों गणेश मंदिर हैं। देश-विदेश में भगवान गणेश की कई प्राचीन प्रतिमाएं विराजमान हैं परंतु देश में कुछ ऐसे खास मंदिर हैं जिनकी प्रसिद्धि और प्रताप दूर-दूर तक फैला और जहां लाखों की संख्यां में भक्त एकत्रित होते हैं। आओ जानते हैं ऐसे ही खास 10 मंदिरों की संक्षिप्त जानकारी के अलावा सभी महत्वपूर्ण मंदिरों की भी जानकारी। 1. सिद्धि विनायक गणेश मंदिर मुंबई इस मंदिर का निर्माण 19 नवंबर सन 1801 में गुरूवार के दिन पूर्ण हुआ था। मुंबई प्रभादेवी में काका साहेब गाडगिल मार्ग और एस.के. बोले मार्ग के कोने पर वह मंदिर स्थित है। माटूंगा के आगरी समाज की स्वर्गीय श्रीमती दिउबाई पाटिल के निर्देशों और आर्थिक सहयोग से एक व्यावसायिक ठेकेदार स्वर्गीय लक्ष्मण विथु पाटिल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। आज इस मंदिर को गजानन के विशेष मंदिर का दर्जा प्राप्त है। मंदिर की सिद्ध‍ि और प्रसिद्ध‍ि इतनी है कि आम हो या खास, सभी बप्पा के दर पर खिंचे चले आते हैं। महाराष्‍ट्र में सिद्धि विनायक मंदिर की तरह भी दगड़ू सेठ गणपति का मंदिर भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है यह महाराष्ट्र का दूसरा सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। इसे आम बोलचाल में दगडू सेठ का मंदिर भी कहते हैं। इसे श्रीमंत दग्‍दूशेठ नाम के हलवाई ने अपने बेटे की प्‍लेग से मौत हो जाने के बाद बनवाया था।  जिस प्रकार भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है वैसे ही गणपति उपासना के लिए महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिरों का विशेष महत्व है। महाराष्ट्र में पुणे के समीप अष्टविनायक के आठ पवित्र मंदिर 20 से 110 किलोमीटर के क्षेत्र में स्थित हैं। इन मंदिरों का पौराणिक महत्व और इतिहास है। इनमें विराजित गणेश की प्रतिमाएं स्वयंभू मानी जाती हैं। इन सभी मंदिरों के बारें में गणेश और मुद्गल पुराण में बताया गया। ये मंदिर हैं- 1,मयूरेश्वर या मोरेश्वर मंदिर, पुणे, 2. सिद्धिविनायक मंदिर, अहमदनगर, 3. बल्लालेश्वर मंदिर, रायगढ़, 4. वरदविनायक मंदिर, रायगढ़, 5. चिंतामणी मंदिर, पुणे, 6. गिरिजात्मज अष्टविनायक मंदिर, पुणे, 7. विघ्नेश्वर अष्टविनायक मंदिर, ओझर और 8. महागणपति मंदिर, राजणगांव। 2. चिंतामन गणपति उज्जैन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से करीब 6 किलोमीटर दूर ग्राम जवास्या में भगवान गणेश का प्राचीनतम मंदिर स्थित है। इसे चिंतामण गणेश के नाम से जाना जाता है। गर्भगृह में प्रवेश करते ही गणेश जी की तीन प्रतिमाएं दिखाई देती हैं। पहला चिंतामण, दूसरा इच्छामन और तीसरा सिद्धिविनायक। यह स्वयंभू मूर्तियां हैं। ऐसी मान्यता है कि चिंतामण चिंता से मुक्ति प्रदान करते हैं, इच्छामन अपने भक्तों की कामनाएं पूर्ण करते हैं जबकि सिद्धिविनायक स्वरूप सिद्धि प्रदान करते हैं। चिंतामण गणेश मंदिर परमारकालीन है, जो कि 9वीं से 13वीं शताब्दी का माना जाता है। इस मंदिर के शिखर पर सिंह विराजमान है। वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार अहिल्याबाई होलकर के शासनकाल में हुआ। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चिंतामण गणेश मंदिर माता सीता द्वारा स्थापित षट् विनायकों में से एक हैं।  उज्जैन में बड़ा गणेश का मंदिर भी चमत्कारिकक है। लाल रंग के बड़े से गणेश पत्नियों रिद्धि और सिद्धि के साथ यहां विराजमान हैं। इस मंदिर में पंचमुखी हनुमान भी मौजूद हैं। इस मंदिर की खासियत ये है कि यहां पर ज्योतिष और संस्कृति भाषा का ज्ञान भी दिया जाता है। 7 चमत्कारिक शिव मंदिर, जहां भगवान के दर्शन मात्र से होती है सारी मुरादें पूरी खजराना गणेश मंदिर, इंदौर मध्यप्रदेश में चिंतामण गणपति की तरह इंदौर का खजराना गणेश मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। वक्रतुंड श्रीगणेश की 3 फुट प्रतिमा चांदी का मुकुट धरे रिद्धी-सिद्धी के साथ विराजमान हैं जिनका नित्य पूजन विधि-विधान से होता है। गणेशजी की यह मूर्ति भी मंदिर के सामने बावड़ी से निकाली गई थी। इसके बावड़ी में होने का संकेत मंदिर के पुजारी भट्टजी के पूर्वजों को स्वप्न के माध्यम से मिला। जिसे आपने श्रद्धापूर्वक वर्तमान स्थान पर विराजित किया तब मंदिर काफी छोटा था। बाद में 1735 में मंदिर का पहली बार जीर्णोद्धार देवी अहिल्याबाई ने कराया। इसके बाद 1971 से लगातार इसकी सज्जा का कार्य जारी है। 3. रॉकफोर्ट उच्ची पिल्लयार मंदिर, तमिलनाडु तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली (त्रिचि) में रॉक फोर्ट नामक पहाड़ी के सबसे उपर स्थित उच्ची पिल्लयार मंदिर बहुत ही प्राचीन माना जाता है। इससे जुड़ी एक मान्यता है कि यहां रावण के भाई विभीषण ने एक बार भगवान गणेशजी पर वार किया था। कथा अनुसार राम ने उन्हें विष्णु की मूर्ति लंका में विराजमान करने के लिए दी थी और शर्त यह कि ले जाते वक्त भूमि पर न रखें अन्यथा ये मूर्ति वहीं विराजमान हो जाएगी। इधर, देवता लोग नहीं चाहते थे कि यह मूर्ति राक्षस राज्य में विराजमान हो तब उन्होंने गणेशजी को पाठ पढ़ा दिया। बिचारे गणेश जी एक बालक का वेशधारण करके विभीषण के पीछे हो लिए। रास्त में विभीषण ने सोच थोड़ा स्नान ध्यान कर लिया जाए। उन्होंने उस बालक को देखकर कहा कि ये मूर्ति संभालों इसे नीचे मत रखना मैं अभी नदी में स्नान करके आता हूं। बालरूप में गणेशजी ने वह मूर्ति ले ली और उनके जाने के बाद भूमि पर रख दी और जाकर उक्त पहाड़ी पर छुप गए। जब वि‍भीषण को पता चला तो दिमाग खराब हो गया वह उस बालक को ढूंढते हुए उसी पहाड़ी की चोटी पर पहुंच गए जहां उन्होंने उस बालक को देखकर उसके सिर पर प्रहार किया। तब गणेशजी अपने असली रूप में प्रकट हो गए तो यह देखकर विभीषण पछताए और उन्होंने क्षमा मांगी तभी से इस चोटी पर गणेशजी विराजमान हैं। हालांकि इसका संबंध 7वीं शताब्दी से बताया जाता है। 273 फुट की ऊंचाई पर बसे इस मंदिर में 400 के लगभग सीढ़ियां हैं। 4. कनिपकम विनायक मंदिर, चित्तूर यह मंदिर आंधप्रदेश के चित्‍तूर जिले में तिरूपति मंदिर से 75 किमी दूर स्थित है। यहां दर्शन के लिए आने वाले भक्‍त अपने पाप धोने के लिए मंदिर के पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं। 5. मनकुला विनायगर मंदिर, पुडुचेरी यह भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। इस मंदिर के

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7 चमत्कारिक शिव मंदिर, जहां भगवान के दर्शन मात्र से होती है सारी मुरादें पूरी

भगवान शिव की किसी पर कृपा हो तो वह मनुष्य जीवन के सारे ही सांसारिक सुख भोगता है। इसलिए शिव जी की कृपा पाने के लिए मनुष्य को उनके कम से कम उनके सात मंदिरों का दर्शन जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि यदि शिव जी के इन सात मंदिरों का दर्शन जीवन में मनुष्य कर ले तो उसके सभी पापकर्म नष्ट होते हैं और उसकी कामनाएं जरूर परी होती हैं। भगवान शिव बहुत ही भोले माने गए हैं और वह अपने भक्तों में भी वहीं भोलापन खोजते हैं। यही कारण है कि देश के इन 7 मंदिरों में कहते हैं कि मनुष्य यदि सच्चे और निश्चल भाव से शिवजी का दर्शन कर ले तो उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। अमरनाथ मंदिर जम्मू-कश्मीर में स्थित अमरनाथ मंदिर हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ स्थ्ज्ञल है और यहां दर्शन करना बहुत ही पुण्यदायी माना गया है। यह मंदिर एक गुफा के रूप स्थित है। पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिव लिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक बर्फ से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू बर्फ का शिवलिंग भी कहते हैं यह शिवलिंग लगभग 10 फुट ऊचा बनता है। आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखो लोग यहां आते है। चन्द्रमा के घटने-बढ़ने के साथ-साथ इस बर्फ का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है। श्रावण पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है। मूल अमरनाथ शिवलिंग से कई फुट दूर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग अलग हिमखंड हैं। केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित केदारनाथ का मंदिर चार धाम यात्रा में गिना जाता है। यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। उत्तराखण्ड में बद्रीनाथ और केदारनाथ-ये दो प्रधान तीर्थ हैं, दोनो के दर्शनों का बड़ा ही माहात्म्य है। केदारनाथ के संबंध में लिखा है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन किये बिना बद्रीनाथ की यात्रा करता है, उसकी यात्रा निष्फल जाती है और केदारनापथ सहित नर-नारायण-मूर्ति के दर्शन का फल समस्त पापों के नाश पूर्वक जीवन मुक्ति की प्राप्ति बतलाया गया है। ओंकारेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के खंडवा स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में ओमकारेश्वर मंदिर भी‌ प्रमुख शिव मंदिर में गिना जाता है। चार धाम यात्रा के बाद यहां ओमारेश्वर महादेव का दर्शन करना जरूरी होता है, तभी चार धाम यात्रा का पुण्य मिलता है। सोमनाथ मंदिर गुजरात  के काठियावाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों से एक है। सोमनाथ-ज्योतिर्लिंग की महिमा महाभारत, श्रीमद्भागवत तथा स्कंद पुराणादि में उल्लेखित है। चन्द्रदेव का एक नाम सोम भी है। उन्होंने भगवान शिव को ही अपना नाथ-स्वामी मानकर यहां तपस्या की थी इसीलिए इसका नाम ‘सोमनाथ’ हो गया। त्रयंबकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र में गोदावरी नदी के किनारे स्थित त्रयंबकेश्वर मंदिर हिंदुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। काले पत्थरों से बना ये मंदिर चमत्कारिक माना गया है। कहते हैं यहां शिव जी को कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। दक्षेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित कनखल में दक्षेश्वर मंदिर अपनी आस्था और चमत्कार के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में जगह पर स्थित है। मान्यता है कि आज के दिन जो व्यक्ति दक्षेश्वर महादेव स्थित शिव लिंग का जलाभिषेक करता है, उसे अन्य स्थान पर जल चढ़ाने से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। अन्नामलाई मंदिर आदि अन्नामलाई मंदिर तिरुवन्नमलई सबसे पुराना मंदिर माना गया है। अरुणाचलेश्वर मंदिर का निर्माण को लगभग 2000 साल पुराना माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि आरंभ में यह मंदिर साधारण सी लकड़ी से बना था, जिसमें विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित थी। बाद में गोपुरम जोड़े गए और ईंटों व पत्थरों से एक मंदिर बनाने के लिए इस लकड़ी की संरचना को नीचे लाया गया था। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर कर वर्तमान स्वरूप 1200 सालों से अस्तित्व में है।

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