April 3, 2023

भारत के प्रमुख धार्मिक स्थल और इनकी यात्रा

भारत देश में धर्म, कर्म और क्षमा को प्राथमिकता दी जाती हैं। भारत एक ऐसा देश हैं जहां कई जाति और धर्म को मानने वाले लोग बहुत ही प्रेम से रहते हैं और भाईचारे का परिचय देते हैं। भारत को “विश्वास की भूमि” भी कहा जा सकता है। भारत के धार्मिक स्थलों में कई मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारा के अलावा भी तीर्थ स्थल हैं। भारत के निवासी अपने-अपने धर्म के अनुसार इन पवित्र स्थानों पर जाते हैं और अपने ईस्ट देव, अल्लाह और गॉड से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आज हम आपको अपने आर्टिकल के माध्यम से भारत के खास तीर्थ स्थलों और मंदिरों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। यदि आप इण्डिया के इन पवित्र स्थलों के बारे में जानना चाहते है तो इस लेख को पूरा जरूर पढ़े। 1. भारत का धार्मिक स्थल वैष्णो देवी माता मंदिर भारत के धार्मिक स्थलों में शामिल माता वैष्णो देवी का मंदिर हिन्दू धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। जम्मू कश्मीर की आकर्षित त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है यह पवित्र स्थान 9 देवियों में से एक माता वैष्णो रानी का परम धाम हैं। देवी के दर्शन के लिए आने वाले भक्तो की भीड़ नवरात्री के अवसर पर देखने लायक होती है। श्रद्धालुगण सीढ़ियों पर चलते हुए लम्बा सफर तय करते हैं और माता रानी का जयकारा लगाते है। वैष्णो देवी धाम में कई पावन स्थान हैं। 2. भारत का धार्मिक मंदिर अमृतसर में स्वर्ण मंदिर / स्वर्ण मंदिर / हरमंदिर साहिब  भारत के धार्मिक तीर्थ स्थलों में अमृतसर का स्वर्ण मंदिर / हरमंदिर साहिब सिखों के चौथे गुरु श्री रामदास साहिब जी द्वारा निर्मित किया गया था। भारत में धार्मिक स्थलों की यात्रा करने के लिए गुरुद्वारा हरमंदिर साहिब भारत में सिख तीर्थ स्थल में सबसे ख़ास माना जाता है। स्वर्ण जडित यह पवित्र पर्यटन स्थल अपने में कई ऐतिहासिक घटनाओ को समेटे हुए हैं। अमृतसर का स्वर्ण मंदिर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता हैं। अमृत कलश (झील) और तीर्थ परिसर कि यात्रा टूरिस्टों को बहुत लुभाती हैं। 3. भारत का ऐतिहासिक धार्मिक स्थल कोणार्क सूर्य मंदिर (सन टेम्पल) कोणार्क सूर्य मंदिर भारत में ओडिशा के तट पर पुरी से लगभग 35 किलोमीटर कि दूरी पर उत्तर-पूर्व कोणार्क में स्थित है। हिंदू देवता सूर्य को समर्पित यह एक विशाल मंदिर है और भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हैं। कोणार्क दो शब्दों कोण (कोना) और अर्क (अर्का) से मिलकर बना है। जहां कोण का अर्थ कोना (कॉर्नर) और अर्क का अर्थ सूर्य (सूर्य) है। दोनों को संयुक्त रूप से मिलाने पर यह सूर्य का कोना यानि कोणार्क कहा जाता है। कोणार्क के सन मंदिर को काले पैगोडा के नाम से भी जाना जाता है। 4. हिंदुस्तान के धार्मिक स्थल जगन्नाथ मंदिर पूरी भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में जगन्नाथ मंदिर ओडिशा में सबसे अच्छा धार्मिक स्थल माना जाता हैं। इस मंदिर के प्रमुख देवता भगवान जगन्नाथ, बलभद्रऔर देवी सुभद्रा हैं। जगन्नाथ रथ यात्रा बहुत अधिक प्रसिद्ध हैं, जिसमे मंदिर के तीनो मुख्य देवताओं को एक रथ में बिठाया जाता हैं। इस पवित्र मंदिर को भारतीय संस्कृति का प्रामाणिक प्रतिबिंब माना जाता है। 5. भारत का दर्शनीय स्थल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के धार्मिक स्थलों में शामिल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भगवान शिव का पहले द्वादश ज्योतिर्लिंग (प्रकाश का स्तंभ) हैं। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात राज्य में स्थित हिन्दू धर्म का एक प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। हिन्दू धर्म से सम्बंधित यह पवित्र स्थान पर्यटकों को अपने दरबार में आमंत्रित करता हैं। 6. भारत का प्रसिद्ध तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर  भारत के प्रसिद्ध स्थानों में शामिल तिरुपति का वेंकटेश्वर मंदिर यहाँ का एक प्रमुख दर्शनीय स्थान हैं, जोकि भगवान विष्णु का अवतार हैं। भगवान विष्णु का तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर आंध्र प्रदेश राज्य के तिरुपति में शेषचलम श्रेणी की अंतिम पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर भारत में सबसे अधिक देखे जाने वाले हिंदू मंदिरों में से एक हैं। 7. भारत में देखने लायक जगह हेमकुंड साहिब भारत में देखने वाली जगहों में शामिल हेमकुंड साहिब भारत का प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। हेमकुंड साहिब की संरचना पंचकोणीय है। बर्फ से ढंकी हुई ऊँची पहाड़ियों पर स्थित इस स्थान सुन्दरता देखने लायक होती हैं। पर्यटक हेमकुंड का दौरा करना बहुत अधिक पसंद करते हैं। 8. भारत के पवित्र तीर्थ स्थल अमरनाथ गुफा भारत में देखने वाली पवित्र जगहों में अमरनाथ गुफा भारत के सबसे खूबसूरत राज्य जम्मू और कश्मीर में स्थित है। अमरनाथ गुफा भारत के प्राचीन तीर्थ स्थलों में शुमार हैं। माना जाता है कि भगवान भोले नाथ ने अपनी पत्नी देवी पार्वती की अमरता का रहस्य इसी स्थान पर उजागर किया था। यह स्थान अमरनाथ लिंग के लिए प्रसिद्ध हैं और हिन्दू धर्म का एक परम पूजनीय स्थान हैं। 9. इंडिया के फेमस धार्मिक स्थल वाराणसी भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित वाराणसी भारत में एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, जोकि हिन्दू धर्म की आस्था से सम्बंधित हैं। वाराणसी की सुन्दरता और अखंडता को देखने के लिए देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की लम्बी कतार लगी रहती है। शहर के मध्य से प्रवाहित होने वाली पवित्र गंगा नदी निस्संदेह वाराणसी शहर की सुन्दरता और पवित्रता को बढ़ा देती है। सुबह शाम होने वाली गंगा नदी की आरती से वाराणसी शहर में भक्ति लहर दौड जाती है। 10. इंडिया टूरिज्म में प्रसिद्ध धार्मिक स्थल द्वारका नगरी भारत के धार्मिक स्थलों में शामिल द्वारिका नगरी एक प्रमुख तीर्थ स्थल हैं जिसका निर्माण महाभारत काल में भगवान श्री कृष्ण ने करबाया था। जब श्री कृष्ण और बलराम ने अपनी राजधानी मथुरा से द्वारिका में स्थानांतरित की थी। द्वारिका गुजरात के पश्चिमी छोर पर स्थित है। हिन्दू धर्म से सम्बंधित द्वारिका चार धामों में से एक हैं। 11. भारत में फेमस ऋषिकेश शहर की धार्मिक यात्रा ऋषिकेश भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्राओं में शामिल है। यहां स्थित असंख्य हिंदू मंदिरों और योग केंद्रों की भारी व्यवस्था की गई हैं। ऋषिकेश धाम भारत में यात्रा करने के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। 12. भारत में घूमने वाली जगह मथुरा भारत के दर्शनीय स्थलों में मथुरा एक ऐसी जगह है जोकि भारत की सबसे पवित्र भूमि मानी जाती हैं। दिल्ली से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह पवित्र स्थान भगवान श्री कृष्ण

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जानिए, क्यों मनाते हैं बैसाखी और क्या है महत्व

)बैसाखी का त्योहार 14 अप्रैल 2023 को मनाया जाएगा. पंजाब के लोगों, विशेषकर सिखों के लिये, वैसाखी एक अत्यन्त महत्वपूर्ण पर्व है. वैसाखी को हिन्दु सौर कैलेंडर पर आधारित, सिख नव वर्ष के रूप में भी मनाया जाता है भारत त्योहारों का देश माना जाता है। अलग-अलग धर्मों का पालन करने वाले लोग यहां रहते हैं। हर धर्म के अपने-अपने कुछ खास त्योहार हैं। पूरे साल भर इसी तरह त्योहारों का उत्सव चलता रहता है। हिंदू धर्म में होली, दीपोत्सव और रक्षाबंधन जैसे त्योहार मनाते हैं। उसी तरह सिख लोगों के लिए चैत्र माह में पड़ने वाला बैसाखी का त्योहार खास होता है। यह समय ही कुछ विशेष होता है, खेतों मे रबी की फसल पक कर लहलहाती है। किसान अपनी मेहनत से आई फसलों को देखकर खुश होते हैं। मान्यता है कि इस खुशी का इजहार बैसाखी त्योहार को मनाकर करते हैं। वैसे इस त्योहार के मनाए जाने को लेकर कई मान्यताएं है। हम आपको इसके महत्व और मनाए जाने के पीछे के कारणों के बारे में बताएंगे। बैसाखी के पर्व की शुरुआत भारत के पंजाब प्रांत से हुई है और इसे रबी की फसल की कटाई शुरू होने की सफलता के रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा के अलावा उत्तर भारत में भी बैसाखी के पर्व का बहुत महत्व है। इस दिन गेहूं, तिलहन, गन्ने आदि की फसल की कटाई शुरू होती है। क्यों मनाते हैं बैसाखीदरअसल बैसाखी को मनाए जाने का एक कारण यह भी है कि इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। बैसाखी का पर्व किसानों का खास त्योहार होता है। किसान भाई इसी दिन अपनी अच्छी फसल के लिए भगवान का शुक्रिया करते हैं। इतिहास पर गौर फरमाएं तो सन् 1699 मे इसी दिन सिक्खों के अंतिम गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी ने सिक्खों को खालसा के रूप मे संगठित किया था, यह भी इस दिन को खास बनाने का एक कारण है। कैसे मनाते हैं बैसाखीइस त्योहार की तैयारी भी सबसे बड़े त्योहार दीपावली की ही तरह कई दिनों पहले से शुरू हो जाती है। लोग घरों की सफाई करते है, आंगन में अल्पना और रंगोली बनाई जाती है। शाम को लाइटिंग से घर सजाते हैं, कई तरह के पकवान बनाते हैं। सुबह स्नान आदि के बाद सिक्ख लोग गुरुद्वारे जाते हैं। गुरुद्वारे में गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ होता है, कीर्तन आदि करवाए जाते हैं। नदी के किनारे मेले लगाए जाते हैं जिसमें भारी संख्या में लोग आते हैं। पंजाबी लोग इस दिन विशेष नृत्य भांगड़ा करते हुए खुशी मनाते हैं। बच्चे,बूढ़े और महिलाएं सभी ढोल की आवाज में मदमस्त हो जाते हैं और हर्षोल्लास से नाचते गाते हैं। वैसे तो यह त्योहार पूरे भारत वर्ष मे मनाया जाता है, परंतु पंजाब और हरियाणा राज्यों मे इस त्योहार की चहक अलग ही होती है। यह है महत्वहिंदू धर्म के लोग बैसाखी को नववर्ष के रुप में भी मनाते हैं इस दिन स्नान, भोग आदि लगाकर पूजा की जाती है। हिंदू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार मान्यता यह भी है कि हजारों साल पहले मुनि भागीरथ कठोर तपस्या के बाद देवी गंगा को धरती पर उतारने में इसी दिन कामयाब हुए थे। इसलिये इस दिन हिंदू संप्रदाय के लोग पारंपरिक रूप से गंगा स्नान करने को भी पवित्र मानते हैं व देवी गंगा की स्तुति करते हैं। इस दिन पवित्र नदियोंं में स्नान का अपना अलग महत्व है। ज्योतिषीय दृष्टि से भी बैसाखी का बहुत ही शुभ व मंगलकारी महत्व है क्योंकि इस दिन आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है। वहीं सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने से इसे मेष सक्रांति भी कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि लोगों के राशिफल पर बैसाखी का सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसे सौर नववर्ष भी कहा जाता है। मेष संक्राति के दौरान पर्वतीय इलाकों में भी मेलों का आयोजन होता है व देवी पूजा करने का रिवाज है। लोग इस दिन अपने घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

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