2022

नवरात्रि में 9 दिनों की पूजा विधि और मंत्र

हिंदू धर्म में नवरात्रि के दौरान साधना और उपासना करने के सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। ऐसी मान्यता है की सामान्य दिनों में किसी भी साधना में सिद्धि हासिल करने के लिए कम से कम 40 दिनों की आवश्यकता होती है। वहीं, नवरात्रि में नौ दिन ही अनुष्ठान में सफलता हासिल करने के लिए पर्याप्त होते

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जब तुलसीदास को भगवान जगन्नाथ ने दिये राम रुप में दर्शन

तुलसीदास जी अपने इष्टदेव का दर्शन करने श्रीजगन्नाथपुरी गये। मंदिर में भक्तों की भीड़ देख कर प्रसन्न मन से अंदर प्रविष्ट हुए। जगन्नाथ जी का दर्शन करते ही निराश हो गये। विचार किया कि यह हस्तपादविहीन देव हमारा इष्ट नहीं हो सकता। बाहर निकल कर दूर एक वृक्ष के तले बैठ गये। सोचा कि इतनी

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श्री कृष्ण ने किए थे 8 विवाह, जानिए उनकी कहानियां

पुराणों के अनुसार श्री कृष्ण ने 8 स्त्रियों से विवाह किया था जो उनकी पटरानियां बानी थी। ये थी – रुक्मिणी, जाम्बवती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रविंदा, सत्या(नाग्नजिती), भद्रा और लक्ष्मणा। आइए जानते है श्रीकृष्ण द्वारा इन आठ के साथ किए गए विवाह की कहानियां – 1. रुक्मिणी-विदर्भ राज्य का भीष्म नामक एक वीर राजा था। उसकी

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अपने पुत्रों को ही नदी में बहाया था गंगा ने, पर क्यों?, जानिए गंगा से जुडी ऐसी ही रोचक बातें

हिन्दू धर्म में गंगा को सबसे पूजनीय नदी माना गया है। गंगा के संबंध में अनेक पुराणों में कई कथाएं पढ़ने को मिलती है। महाभारत के सबसे प्रमुख पात्र भीष्म भी गंगा के ही पुत्र थे। आज हम आपको गंगा से जुड़ी कुछ ऐसी रोचक बातें बता रहे हैं, जो बहुत कम लोग जानते हैं-

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वनवास के बाद सीता जी का आगमन, अश्वमेघ यज्ञ का आरम्भ तथा अश्व के पूर्व जन्म की कथा

तदनन्तर लक्ष्मण ने जाकर पुनः जानकी के चरणों में प्रणाम किया। लक्ष्मण को आया देख पुनः अपने को बुलाये जाने की बात सुनकर सीता ने कहा —- ‘लक्ष्मण ! मुझे श्री रामचंद्र जी ने त्याग दिया है अतः अब मैं कैसे चल सकती हूँ? मैं यहीं रहकर श्री राम को स्मरण किया करूँगी।उनकी बात सुनकर

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सीता की निंदा करने वाले धोबी के पूर्व जन्म का वृत्तान्त

मिथिला नाम की नगरी में महाराज जनक राज्य करते थे। उनका नाम था सीरध्वज। एक बार वे यज्ञ के लिए पृथ्वी जोत रहे थे उस समय फाल से बनी गहरी रेखा द्वारा एक कुमारी कन्या का प्रादुर्भाव हुआ। रति से भी सुंदर कन्या को देख कर राजा को बड़ी प्रसन्नता हुई और उन्होंने उस कन्या

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महाशिवरात्रि व्रत कथा

एक बार एक गाँव में एक शिकारी रहता था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधवश साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी। शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव संबंधी धार्मिक

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नाभाग की कथा

मनुपुत्र नभग का पुत्र था नाभाग। जब वह कई वर्ष ब्रह्मचर्य का पालन कर लौटा, तब बड़े भाइयों ने उसे हिस्से में केवल पिता को दिया। सम्पत्ति तो उन्होंने पहले ही आपस में बाँट ली थी। उसने अपने पिता से कहा — पिता जी ! मेरे बड़े भाइयों ने हिस्से में मेरे लिए आपको ही

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भगवान श्री कृष्ण द्वारा मारे गये धेनुकासुर के पूर्व जन्म की कथा

एक समय की बात है। राजा बलि का पुत्र साहसिक देवताओं को परास्त कर गन्धमादन की ओर प्रस्थित हुआ। उसके साथ बहुत बड़ी सेना थी। इसी समय स्वर्ग की अप्सरा तिलोत्तमा उधर से निकली। उसने साहसिक को देखा और साहसिक ने उसको। दोनों आकर्षित हो गये।तिलोत्तमा ने अपने सौन्दर्य से साहसिक को मोहित कर दिया।

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द्रोपदी जन्म कथा, आखिर कैसे मिले ! द्रोपदी को पांच पति ?

प्राचीन काल की बात है। नैमिषारण्य क्षेत्र में देवताओं का एक महान यज्ञ चल रहा था। यमराज ने यज्ञ में दीक्षा ले ली थी, इसलिए वे यज्ञीय पशुओं के अतिरिक्त और किसी का वध नहीं करते थे। इससे मर्त्य-लोक के प्राणियों की मृत्यु का समय बीतने लगा और वे अमर सरीखे हो गये। पृथ्वी पर

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मरते वक़्त बालि ने, अंगद से कही थी ये तीन ज्ञान की बातें। आप भी जानिए  

रामायण में जब श्रीराम ने बालि को बाण मारा तो वह घायल होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा था। इस अवस्था में जब पुत्र अंगद उसके पास आया तब बालि ने उसे ज्ञान की कुछ बातें बताई थीं। ये बातें आज भी हमें कई परेशानियों से बचा सकती हैं। यहां जानिए ये बातें कौन सी हैं…

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पौराणिक रहस्य – सुदामा को गरीबी क्यों मिली?

सुदामा को गरीबी क्यों मिली?- अगर अध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाये तो सुदामा जी बहुत धनवान थे। जितना धन उनके पास था किसी के पास नही था । लेकिन अगर भौतिक दृष्टि से देखा जाये तो सुदामाजी बहुत निर्धन थे ।आखिर क्यों ?एक ब्राह्मणी थी जो बहुत गरीब निर्धन थी। भिच्छा माँग कर जीवन यापन

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