2022

सत्यनारायण की व्रत कथा – तृतीय अध्याय | Satyanarayan Vrat Katha (Chapter Three)

सूत जी आगे की कहानी सुनाते हुए कहते हैं कि सालों पहले उल्कामुख नामक एक राजा था। वह बुद्धिमान होने के साथ-साथ सत्यवादी और शांत स्वभाव का व्यक्ति था। वो रोजाना मंदिरों में जाकर गरीबों को धन दान करके उनके दुखों को दूर करता था। राजा उल्कामुख की पत्नी कमल के फूल के समान थी।

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सत्यनारायण की व्रत कथा – पंचम अध्याय | Satyanarayan Vrat Katha (Chapter Five)

सत्यनारायण कथा के पांचवें और अंतिम अध्याय में सर्व ज्ञाता सूत जी ऋषि और मुनि गणों को एक और कहानी सुनाते हैं। यह कहानी तुंगध्वज नामक एक राजा की थी, जो प्रजापालन में व्यस्त रहता था। कुछ समय बाद राजा तुंगध्वज अपने नगर के पास के जंगल में शिकार के लिए निकले। शिकार के बाद

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हरतालिका तीज व्रत कथा | Hartalika Teej Vrat Katha In Hindi

मान्यता है कि भगवान शिव ने माता पार्वती को उनके पूर्व जन्म के बारे में याद दिलाने के लिए यह कथा सुनाई थी, जो कुछ इस प्रकार है। भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं: हे पार्वती! तुमने मुझे वर के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। तुमने अन्न-जल त्यागकर सूखे पत्ते

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तारा रानी की कथा | Tara Rani Ki Katha In Hindi

मां भगवती को मानने वालों में से एक राजा स्पर्श भी थे। वो दिन-रात उनकी पूजा-अर्चना में लीन रहते थे। राजा को किसी चीज की कमी नहीं थी। बस उन्हें बच्चे की ख्वाहिश थी। सालों से बच्चा न होने के कारण राजा कुछ निराश रहा करते थे। एक दिन राजा की भक्ति से खुश होकर

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ब्रह्म देव की पूजा क्यों नहीं होती ? | Brahma Ji Ko Na Puje Jane Ki Kahani 

एक बार धरती की भलाई के लिए ब्रह्मा जी के मन में यज्ञ करने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने यज्ञ की जगह की तलाश शुरू की। फिर उन्होंने अपनी बांह से निकले हुए एक कमल के फूल को धरती पर गिराया। मान्यता है कि ब्रह्मा जी का फूल जिस जगह पर गिरा वहीं पर

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हनुमान जी व्रत कथा | Mangalwar Vrat Katha In Hindi

केशवदत्त नाम का एक ब्राह्मण था, जो अपनी पत्नी अंजली के साथ ऋषिनगर गांव में खुशी से रहता था। गांव के सभी लोग ब्राह्मण परिवार का बहुत सम्मान करते थे। उनके पास खूब धन-संपत्ति थी, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। इस कारण दोनों पति-पत्नी दुखी थे। पुत्र प्राप्ति के लिए दोनों हनुमान जी की

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राधा अष्‍टमी व्रत की कहानी  | Radha Ashtami Vrat Katha In Hindi

राधा माता गोलोक में श्रीकृष्ण के साथ रहती थीं। एक दफा कृष्ण भगवान को गोलोक में राधा रानी कहीं नजर नहीं आईं। कुछ देर बाद कन्हैया अपनी सखी विराजा के साथ घूमने चले गए। यह बात जब राधा रानी को मालूम हुई, तो उन्हें गुस्सा आया और वो सीधे कन्हैया के पास पहुंची। वहां पहुंचकर

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सत्यनारायण की व्रत कथा – चतुर्थ अध्याय | Satyanarayan Vrat Katha (Chapter Four)

सर्व शास्त्र ज्ञाता सूत जी ऋषियों और मुनियों को आगे की कहानी सुनाते हुए कहते हैं, “राजा की आज्ञा के बाद वो साधु अपने दामाद के साथ घर की तरफ निकल पड़ा। कुछ दूर जाने के बाद रास्ते में उसे एक व्यक्ति मिला, जो डंडे के सहारे चल रहा था। वो व्यक्ति असल में खुद

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सोलह सोमवार व्रत कथा | Solah Somvar Vrat Katha In Hindi

भगवान शिव अपनी पत्नी पार्वती के साथ एक बार घूमते हुए धरती के अमरावती शहर पहुंचे। वहां शिव जी का एक बड़ा-सा मंदिर राजा ने बनवाया था। शिव-पार्वती दोनों को वह मंदिर पसंद आया, इसलिए दोनों वहीं रहने लगे। कुछ दिनों बाद मां पार्वती ने भोले नाथ से कहा, “प्रभु! मुझे चौसर खेलने की इच्छा

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शिव व्रत कथा | Sawan Somvar Vrat Katha In Hindi

एक समय की बात है, अमरपुर नामक नगर में एक धनवान व्यवसायी रहता था। उसका व्यापार बहुत दूर तक फैला हुआ था। यहां के सभी नगरवासी उसका बहुत आदर करते थे। उस व्यापारी के पास किसी भी चीज की कमी नहीं थी, लेकिन फिर भी वह अपने जीवन में सुखी नहीं था। दरअसल, उस व्यापारी

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बृहस्पति व्रत कथा | Brihaspati Vrat Katha In Hindi

सालों पहले एक गांव में ऐसा गरीब धार्मिक ब्राह्मण रहता था, जिसकी को‌ई संतान नहीं थी। वह रोज नहा-धोकर मन से देवताओं की पूजा करते हुए संतान की मांग करता, लेकिन ब्राह्मण की पत्नी खूब आलसी थी। वह न स्नान करती थी और न ही पूजा-पाठ। पत्नी की इस आदत से ब्राह्मण दुखी रहता था।

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राम जन्म की कथा |  Ram Janam Katha In Hindi

एक समय की बात है, अयोध्या के महाराज दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ रखा। इस यज्ञ के लिए राजा दशरथ ने अपनी चतुरंगिणी सेना को काले कान वाले घोड़े को छोड़ने का आदेश भेजा। उनकी इच्छा थी कि इस महान यज्ञ में हर कोई शामिल हो, इसलिए राजा ने सभी ऋषि-मुनियों व विद्वान

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