August 19, 2022

श्रीकृष्ण और राधा की भेंट | जानें राधा और कृष्ण की प्रेम कहानी

एक दिन ग्वालों के मुखिया नंद बाबा को वृषभानु के घर पधारने का निमंत्रण मिला। नंद बाबा अपने परिवार के साथ उनके घर गए। वृषभानु अपने पिछले जन्म में महाराज सुचंद्र थे। एक राजा के रूप में वृषभानु तथा उनकी पत्नी कलावती को ब्रह्मा जी से यह वरदान मिला था कि अगले जन्म में उनके

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कृष्ण भगवान की जन्म कथा | भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पौराणिक कथा

जब भगवान कृष्ण के जन्म का समय निकट आया, तो आकाश में रोहिणी नक्षत्र उभर आया और चमकने लगा। यह सितारा केवल शुभ अवसरों पर ही चमकता है। सारे ग्रह और नक्षत्र अनुकूल हो गए। नदियां शांत होकर ठहर गईं। दिव्य संगीत की लहरी पर अप्सराएं और देवता नाचने लगे।  देवकी सूरज की तरह जगमगा

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हनुमान जी को क्यों चढ़ाते है सिंदूर का चोला ?

हिन्दू धर्म में सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। प्रत्येक सुहागन स्त्री इसे अपनी मांग में लगाती है। सिंदूर का हिन्दू धर्म में पूजा पाठ में भी महत्तव है।  कई देवी देवताओं को सिंदूर चढ़ाया जाता है। लेकिन  गणेश जी, भैरू जी (भैरव जी) और हनुमान जी को तो सिंदूर का पूरा चोला चढाने

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पौराणिक कथा – गणेश चतुर्थी को क्यों नहीं करने चाहिए चंद्र दर्शन ?

 हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार गणेश चतुर्थी को चंद्र दर्शन नहीं करने चाहिए क्योंकि इस रात्रि को चंद्र दर्शन करने से झूठे आरोप लगते हैं। इस सम्बन्ध में हमारे धर्म ग्रंथों में दो कथाएं है। पहली कथा यह बताती है की चंद्र दर्शन क्यों नहीं करना चाहिए जबकि दूसरी कथा को सुनने से भूलवश हुए चंद्र-दर्शन

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कश्यप ऋषि के श्राप के कारण शिवजी ने काटा था बालक गणेश का मस्तक

कहते है की इंसान का वर्तमान, उसके पिछले कर्मो पर और भविष्य वर्तमान कर्मों पर आधारित होता है। लेकिन यह बात केवल इंसानो पर ही नहीं अपितु भगवानों पर भी लागू होती है।  हमारे पुराणों में अनेक ऐसी कथाएँ है जब भगवान द्वारा अतीत में किये गए अनुचित कार्यों के कारण उन्हें आने वाले समय में कष्ट उठाने

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शंख से नहीं चढ़ाते शिवलिंग पर जल, जानिए क्यों ?

हम सब जानते है की पूजन कार्य में शंख का उपयोग महत्वपूर्ण होता है। लगभग सभी देवी-देवताओं को शंख से जल चढ़ाया जाता है लेकिन शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना वर्जित माना गया है। आखिर क्यों शिवजी को शंख से जल अर्पित नहीं करते है ? इस संबंध में शिवपुराण में एक कथा बताई गई

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