August 8, 2022

विक्रम बेताल की इक्कीसवीं कहानी: सबसे ज्यादा प्रेम में अंधा कौन था?

सम्राट विक्रमादित्य ने योगी को दिए वचन को पूरा करने के लिए एक बार फिर बेताल को पेड़ से उतारकर अपने कंधे पर बैठा दिया। इसके बाद वह योगी के पास चल दिए। रास्ता तय करने के लिए बेताल ने एक नई कहानी शुरू की। बेताल बोला… बहुत समय पहले की बात है। विशाला नाम

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विक्रम बेताल की बीसवीं कहानी: बालक क्यों हंसा?

इस बार भी पेड़ पर लटके बेताल को राजा विक्रमादित्य उतारते हैं और कंधे पर लादकर आगे बढ़ते हैं। बेताल हर बार की तरह राजा विक्रमादित्य को फिर से एक कहानी सुनाता है। बेताल कहता है… एक बार की बात है, चित्रकूट नगर में एक चन्द्रवलोक नाम का राजा राज करता था। उसे शिकार करने

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विक्रम बेताल की उन्नीसवीं कहानी: पिण्ड दान का अधिकारी कौन?

हर बार की तरह इस बार भी राजा विक्रमादित्य ने बेताल को अपने कंधे पर लादा और आगे बढ़ने लगे। सफर लंबा था, इसलिए बेताल ने राजा को फिर से एक नई कहानी सुनाई। बेताल कहता है… यह कहानी है विधवा भागवती और उसकी बेटी धनवंती की। भागवती के विधवा होने के बाद उसके पति

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विक्रम बेताल की अठारहवीं कहानी: ब्राह्मण कुमार की कथा

बेताल का पीछा करते हुए राजा विक्रामादित्य शिशपा वृक्ष के पास पहुंचे और किसी तरह बेताल को अपने कंधे पर उठाकर आगे बढ़ने लगे। पहले की तरह ही बेताल रास्ता बड़ा होने की वजह से राजन को कहानी सुनाने लगता है। बेताल कहता है… सालों पहले की बात है, जब उज्जैन नगर में राजा महासेन

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विक्रम बेताल की सत्रहवीं कहानी: अधिक साहसी कौन?

इस बार भी राजा विक्रमादित्य ने बड़े से पेड़ पर लटके बेताल को उतारा और उसे लेकर आगे बढ़ने लगे। खुद को बचाने के लिए बेताल ने फिर से राजा को एक कहानी सुनाई। बेताल कहता है… एक बार की बात है, कनकपुर नाम का एक शहर था, जिसके राजा का नाम यशोधन था। वो

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