April 2022

श्री राम रक्षा स्तोत्रम् (Shri Ram Raksha Stotram)

विनियोग:अस्य श्रीरामरक्षास्त्रोतमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः ।श्री सीतारामचंद्रो देवता ।अनुष्टुप छंदः। सीता शक्तिः ।श्रीमान हनुमान कीलकम ।श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्त्रोतजपे विनियोगः । अथ ध्यानम्‌:ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपदमासनस्थं,पीतं वासो वसानं नवकमल दल स्पर्धिनेत्रम् प्रसन्नम ।वामांकारूढ़ सीता मुखकमलमिलल्लोचनम्नी,रदाभम् नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलम् रामचंद्रम ॥ राम रक्षा स्तोत्रम्:चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् ।एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥1॥ ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् ।जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितं ॥2॥ सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम् ।स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥3॥ रामरक्षां पठेत प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥4॥ कौसल्येयो दृशो पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुति ।घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥5॥ जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः ।स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥6॥ करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित ।मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ॥7॥ सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः ।उरु रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृताः ॥8॥ जानुनी सेतुकृत पातु जंघे दशमुखांतकः ।पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामअखिलं वपुः ॥9॥ एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृति पठेत ।स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ॥10॥ पातालभूतल व्योम चारिणश्छद्मचारिणः ।न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥11॥ रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन ।नरौ न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥12॥ जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम् ।यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥13॥ वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत ।अव्याहताज्ञाः सर्वत्र लभते जयमंगलम् ॥14॥ आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः ।तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥15॥ आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम् ।अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान स नः प्रभुः ॥16॥ तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥17॥ फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥18॥ शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम् ।रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ॥19॥ आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशा वक्ष याशुगनिषङ्गसङ्गिनौ ।रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम ॥20॥ सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा ।गच्छन् मनोरथान नश्च रामः पातु सलक्ष्मणः ॥21॥ रामो दाशरथी शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ॥22॥ वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः ।जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः ॥23॥ इत्येतानि जपन नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः ।अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ॥24॥ रामं दुर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम ।स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नरः ॥25॥ रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं,काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम ।राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शांतमूर्तिं,वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम ॥26॥ रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे ।रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥27॥ श्रीराम राम रघुनन्दनराम राम,श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।श्रीराम राम रणकर्कश राम राम,श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥28॥ श्रीराम चन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि,श्रीराम चंद्रचरणौ वचसा गृणामि ।श्रीराम चन्द्रचरणौ शिरसा नमामि,श्रीराम चन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥29॥ माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः स्वामी,रामो मत्सखा रामचन्द्रः ।सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुर्नान्यं,जाने नैव जाने न जाने ॥30॥ दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मज ।पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥31॥ लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथं ।कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ॥32॥ मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये ॥33॥ कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम ।आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम ॥34॥ आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् ।लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥35॥ भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम् ।तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ॥36॥ रामो राजमणिः सदा विजयते,रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता,निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः ।रामान्नास्ति परायणं परतरं,रामस्य दासोस्म्यहं रामे चित्तलयः,सदा भवतु मे भो राम मामुद्धराः ॥37॥ राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥38॥

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रामनवमी ये आसान उपाय, सुखी एवं खुशहाल होगा जीवन

इस साल राम नवमी 10 अप्रैल दिन रविवार को है. चैत्र शुक्ल नवमी के दिन भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था. भगवान विष्णु ने लंकापति रावण के अत्याचारों से तीनों लोकों को मुक्ति दिलाने के लिए रामावतार लिया था. रामदेव मिश्रा शास्त्री ने बताया कि इस साल 09 अप्रैल की देर रात 01:23 बजे से नवमी तिथि प्रारंभ हो रही है, जो 11 अप्रैल को प्रात: 03:15 बजे तक है. राम नवमी के अवसर पर देशभर के राम मंदिरों में प्रभु श्रीराम की पूजा अर्चना की जाएगी और राम जन्मोत्सव मनाया जाएगा. राम नवमी के अवसर पर आप कुछ आसान उपायों से अपने जीवन को खुशहाल और सुखी बना सकते हैं. संकटों से बचाव का उपाय: यदि आप जीवन में किसी संकट से घिरे हुए हैं तो रामनवमी के दिन राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें. ऐसा करना आपको कष्‍टों से राहत देगा. रक्षा स्तोत्र पढ़ने हेतु करें क्लिक करें KARMASU राम नवमी के दिन शुभ मुहूर्त में प्रभु श्रीराम की पूजा करें. ​उस दौरान राम स्तुति श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन…करें. इसका पाठ करने से व्यक्ति के दुख और कष्ट दूर होते हैं. दुखों से निजात पाने का उपाय: दुख के समय में प्रभु की आराधना करना व्‍यक्ति को सकारात्‍मकता और धैर्य देती है. रामनवमी के दिन शुभ मुहूर्त में प्रभु श्रीराम की पूजा करना और राम स्तुति ‘श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन…’ करना दुख-कष्‍टों से निजात दिलाता है मनोकामनाएं पूरी करने का उपाय: रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम के परम भक्‍त हनुमान जी की आराधना करने से भगवान राम प्रसन्‍न होते हैं. लिहाजा रामनवमी के दिन हनुमान चालीसा का संपूर्ण पाठ करें, ऐसा करने से भक्‍तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. राम नवमी के दिन रामायण या रामचरितमानस का पाठ करना या कराना बहुत ही शुभ होता है. इससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. सुख-समृद्धि पाने का उपाय: राम नाम में बहुत शक्ति होती है. रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम का पूजन करना और राम नाम का जप करना जीवन में सुख-समृद्धि लाता है.  राम नवमी पूजा मुहूर्त 202210 अप्रैल को राम नवमी का शुभ मुहूर्त दिन में 11 बजकर 06 मिनट पर शुरु हो रहा है, जो दोपहर 01 बजकर 39 मिनट तक है. इस मुहूर्त में रामलला का जन्म होगा और मंदिरों में राम जन्मोत्सव मनाया जाएगा. इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक है. इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. KARMA इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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Chaitra Navratri 2022: चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को लगाएं इन चीजों का भोग

आदिशक्ति मां दुर्गा की उपासना का पर्व चैत्र नवरात्रि 2 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की भक्ति भाव के साथ पूजा करने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां अंबे को अगर भक्त नवरात्रि के समय राशिनुसार भोग लगाते हैं तो उन्हें दोगुना फल मिलता है। जानें माता रानी को कौन-सा भोग लगाना चाहिए। पहला स्वरूप मां शैलपुत्री पहला दिन मां शैलपुत्री का माना जाता है। आरोग्य और धन लाभ के लिए मां को गाय के घी का भोग लगाना शुभ होगा। मेष- मेष राशि वालों के लिए जातक स्कंद माता की उपासना करें और रोज दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें। इसके अलावा मां शैलपुत्री को सफेद चीजों का भोग लगाएं। माता रानी को नारियल चढ़ाएं। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को लगाएं ये भोग नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन मां ब्रह्मचारिणी को चीनी का भोग लगाना चाहिए। इससे अच्छी सेहत के साथ दीर्घायु का वरदान मिलता है। वृषभ- वृषभ राशि के लोग नवरात्रि में घर में मोर पंख लगाएं। सौभाग्य की प्राप्ति के लिए नवरात्रि के समय माता को मिश्री व पंचामृत का भोग लगाएं। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को लगाएं ये भोग तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है। इस दिन मां को भोग लगाने के साथ जरूरतमंद को दान देना शुभ माना जाता है। इसलिए तीसरे दिन मां को दूध या इससे संबंधी बनी हुई चीजों का भोग लगा सकते हैं। इससे धन लाभ होगा। मिथुन– नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के शक्कर का भोग लगाना शुभ रहेगा। मान्यता है कि इससे धन व वैभव की प्राप्ति होती है। चौथे दिन मां कुष्मांडा देवी को लगाएं ये भोग नवरात्रि के चौथे दिन माता कुष्मांडा देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन मां को मालपुआ का नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। इससे जातक के ऊपर मां का आशीर्वाद बना रहता है। कर्क- कर्क राशि वालों को गाय का घी अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भक्त को मां दुर्गा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। पांचवें दिन माता स्कंदमाता को लगाएं ये भोग नवरात्रि के पांचवे दिन माता स्कंदमाता को केले का भोग लगाना चाहिए। इससे व्यक्ति के बिजनेस, करियर में उन्नति होती है और हर काम बनने लगते है। सिंह- सिंह राशि के जातक माता रानी को मालपुए का भोग लगाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से बुद्धि व कौशल का विकास होता है। छठे स्वरूप मां कात्यायनी को लगाएं ये भोग नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठवें अवतार मां कात्यायनी की पूजा की जाती हैं। इस दिन मां को शहद का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इससे जातक को धन, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। कन्या- कन्या राशि वालों को मां दुर्गा को शक्कर का भोग लगाना चाहिए। इससे धन व वैभव की प्राप्ति होती है। सातवें स्वरूप मां कालरात्रि को लगाएं ये भोग नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा करने का विधान है। रोग मुक्त होने के लिए मां कालरात्रि को गुड़ से बनाई हुई चीज का भोग लगाएं। तुला– तुला राशि वालों को मिठाई का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-शांति व खुशहाली आती है। आठवें स्वरूप मां महागौरी को लगाएं ये भोग नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा का आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा करने का विधान है। मां का आशीर्वाद पाने और हर इच्छा पूर्ण करने के लिए मां को नारियल का भोग लगाएं वृश्चिक- वृश्चिक राशि वालों को नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा को रोज 1 नारियल चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से मां दुर्गा के प्रसन्न होने की मान्यता है। नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री को लगाएं ये भोग नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूड़ी और खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इस दिन ये भोग लगाने से मां की कृपा हमेशा जातक के ऊपर बनी रहती है। धनु- धनु राशि वालों को मां दुर्गा को दूध व उससे बनी चीजों का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से दुख व भय दूर होते हैं।मकर– मकर राशि वालों को नवरात्रि के दिनों में दूध व खीर का भोग लगाना चाहिए। सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।कुंभ- कुंभ राशि वालों को मां दुर्गा को गुड़ का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।मीन- मीन राशि वाले मां दुर्गा को खीर या दूध से बनी चीजों का भोग लगाएं। ऐसा करने से घर में खुशहाली आने की मान्यता है।

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आज से शुरू होंगे इन राशियों के अच्छे दिन, देखें क्या आप भी हैं 

शुक्र ग्रह कल राशि परिवर्तन करने जा रहा है।  इस दिन शुक्र देव कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। शुक्र देव को ज्योतिष में विशेष स्थान प्राप्त है।  ज्योतिष में शुक्र को भौतिक सुख, वैवाहिक सुख, भोग-विलास, शुक्र ग्रह आज राशि परिवर्तन करने जा रहा है। इस दिन शुक्र देव कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। शुक्र देव को ज्योतिष में विशेष स्थान प्राप्त है।  ज्योतिष में शुक्र को भौतिक सुख, वैवाहिक सुख, भोग-विलास, शौहरत, कला, प्रतिभा, सौन्दर्य, रोमांस, काम-वासना और फैशन-डिजाइनिंग के कारक ग्रह हैं। शुक्र, वृष और तुला राशि के स्वामी होते हैं और मीन इनकी उच्च राशि है, जबकि कन्या इनकी नीच राशि है। शुक्र के राशि परिवर्तन करते ही कुछ राशि वालों का भाग्योदय होना तय है। आइए जानते हैं शुक्र के राशि परिवर्तन से किन राशि वालों के अच्छे दिन शुरू होंगे….  मिथुन राशि-  वाणी में सौम्यता रहेगी।  परिवार में हंसी खुशी का माहौल बना रहेगा। किसी पुराने मित्र एवं भाइयों के सहयोग से आय के स्रोत विकसित होंगे। आय में वृद्धि की संभावना है। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए समय शुभ रहेगा। कर्क राशि-  मन में शांति व प्रसन्नता के भाव रहेंगे।  आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा।  माता व परिवार की किसी बुजुर्ग महिला से धन की प्राप्ती के योग बन रहे हैं। नौकरी में अफसरों का सहयोग।  स्थान परिवर्तन की संभावना भी बन रही है। धनु राशि-  धर्म के प्रति श्रद्धाभाव रहेगा।  आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कला व संगीत के प्रति रूझान बढ़ेगा। परिवार के साथ यात्रा देशाटन के लिए जाना हो सकता है। अनियोजित खर्चों में वृद्धि हो सकती है। कार्यक्षेत्र में परिश्रम की अधिकता रहेगी। मकर राशि-  कला व संगीत के प्रति रूझान बढ़ेगा।  पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। संपत्ति से आय में वृद्धि हो सकती है।  संतान की ओर से सुखद समाचार मिल सकते हैं। नौकरी में तरक्की की संभावनएं बन रही हैं।  अफसरों का सहयोग मिलेगा। आय में वृद्धि होगी।  वाहन सुख का विस्तार संभव है। (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

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नवसंवत्सर में इन राशि वालों पर रहेगी मां लक्ष्मी की विशेष कृपा, नौकरी में प्रमोशन के बनेंगे प्रबल योग

नवसंवत्सर की शुरुआत में मंगल और राहु-केतु अपनी उच्च राशि में रहेंगे वहीं, शनि खुद की ही राशि मकर में होगा। नववर्ष के सूर्योदय की कुंडली में शनि-मंगल की युति से धन, भाग्य और लाभ का शुभ योग बन रहा है। इस योग के प्रभाव से ये साल मिथुन, तुला और धनु राशि वाले लोगों के लिए बहुत शुभ रहेगा। वहीं, अन्य राशियों के लिए बड़े बदलाव का समय रहेगा। ग्रहों का ऐसा संयोग 1563 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 22 मार्च 459 को ये ग्रह स्थिति बनी थी। ग्रह-नक्षत्रों के लिहाज से अप्रैल का महीना खास होने वाला है। इस महीने कई ग्रहों का राशि परिवर्तन होगा। ग्रहों का राशि परिवर्तन का प्रभाव मेष से लेकर मीन राशि तक वालों पर पड़ेगा। ग्रहों की स्थिति से कुछ राशि वालों को धन संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जबकि कुछ राशि वालों की परेशानी दूर होगी। जानें अप्रैल में किन ग्रहों का होगा राशि परिवर्तन व किन राशि वालों को होगा जबरदस्त लाभ- अप्रैल 2022 में ग्रहों का राशि परिवर्तन- 07 अप्रैल 2022 को मंगल का कुंभ राशि में गोचर होगा। इसके अगले दिन यानी 08 अप्रैल को बुध का मेष राशि में प्रवेश होगा। 12 अप्रैल को राहु-केतु राशि परिवर्तन करेंगे। राहु मेष राशि में और केतु का तुला राशि में गोचर होगा। 13 अप्रैल को गुरुदेव बृहस्पति का मीन राशि में गोचर होगा। 14 अप्रैल को सूर्य का मेष राशि में गोचर होगा। 25 अप्रैल को बुध का वृषभ राशि में गोचर होगा। 27 अप्रैल को शुक्र का मीन राशि में गोचर होगा। 29 अप्रैल को शनि का कुंभ राशि में गोचर होगा। मिथुन- अप्रैल का महीना मिथुन राशि वालों के लिए लाभकारी रहेगा। इस समय आपकी राशि में शनि ढैय्या का प्रभाव बना है। शनि के राशि परिवर्तन के साथ ही आपको शनि ढैय्या से मुक्ति मिल जाएगी। इस महीने आपके रुके हुए कार्य पूरे होंगे। नए समाचार मिल सकते हैं। शादी-विवाह में आने वाली बाधाएं दूर हो सकती हैं। आय के साधनों में वृद्धि होगी। कन्या-  कन्या राशि वालों के लिए नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग बन रहे हैं। सरकारी नौकरी करने वाले जातकों का स्थान परिवर्तन संभव है। ऑफिस में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय के साधनों में वृद्धि होगी।  नौकरी पेशा करने वाले जातकों के तरक्की के योग बनेंगे। इस समय आप खुद का कारोबार शुरू करने की सोच सकते हैं। घर में कोई महत्वपूर्ण चीज खरीद कर ला सकते हैं। मकर- मकर राशि में शनिदेव विराजमान हैं। 29 अप्रैल को शनि कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। शनि का राशि परिवर्तन धन के मामले में आपके लिए लाभकारी रहेगा। भाग्य में वृद्धि होगी। इस दौरान आपको नए अवसरों का लाभ मिलेगा। गुस्से पर काबू रखें। 

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भारतीय नवसंवत्सर 2079 : 1563 साल बाद दुर्लभ संयोग में शुरू होगा हिंदू नव वर्ष जानें इस साल कौन होगा राजा- मंत्री,

नवसंवत्सर की शुरुआत में मंगल और राहु-केतु अपनी उच्च राशि में रहेंगे वहीं, शनि खुद की ही राशि मकर में होगा। नववर्ष के सूर्योदय की कुंडली में शनि-मंगल की युति से धन, भाग्य और लाभ का शुभ योग बन रहा है। इस योग के प्रभाव से ये साल मिथुन, तुला और धनु राशि वाले लोगों के लिए बहुत शुभ रहेगा। वहीं, अन्य राशियों के लिए बड़े बदलाव का समय रहेगा। ग्रहों का ऐसा संयोग 1563 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 22 मार्च 459 को ये ग्रह स्थिति बनी थी। इस बार नव संवत्सर 2079 शनिवार, 2 अप्रैल से शुरू हो रहा है। चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होगी। नवरात्रि के दौरान मां आदिशक्ति की मंदिरों के साथ घर घर में आराधना होगी। मां इस बार नव संवत्सर 2079 शनिवार, 2 अप्रैल से शुरू हो रहा है। चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होगी। रामदेव मिश्र शास्त्री ने बताया कि नए संवत्सर का नाम नल है और राजा शनि देव तो मंत्री वृहस्पति रहेंगे। शनिवार से ही चैत्र नवरात्र भी शुरू हो जाएगी। नवरात्र व्रत का पारण 11 अप्रैल सोमवार को प्रातः काल में किया जाएगा। इसी दिन धर्मराज दशमी भी मनाया जाएगा। ये नववर्ष रेवती नक्षत्र में शुरू होगा। इसके स्वामी बुध हैं। बुध के कारण कारोबार में फायदा होता है इसलिए इस नक्षत्र में खरीदी-बिक्री करना शुभ माना जाता है। व्यापार का कारक बुध भी इस नक्षत्र में रहेगा। जिससे बड़े लेन-देन और निवेश के लिए पूरा साल शुभ रहेगा। साल की शुरुआत मीन राशि में हो रही है। जिसके स्वामी गुरु है। इसलिए ये समय सबके लिए शुभ रहेगा। पूरे नवरात्र में मंगल अपने ही नक्षत्र में रहेगा। साथ ही 5 दिन उच्च राशि में रहेगा। जिससे प्रॉपर्टी के कारोबार में तेजी आने के योग हैं। वहीं, बृहस्पति के कारण खरीदारी से सुख-समृद्धि बढ़ेगी। इस बार नव वर्ष की शुरुआत सरल, सत्कीर्ति और वेशि राजयोगों में हो रही है। इससे नवरात्र में खरीदारी लेन-देन निवेश और नए कामों की शुरुआत शुभ रहेगी। इन योगों का शुभ फल पूरे साल दिखेगा।देश के लिए सुख समृद्धि के साथ आर्थिक मजबूती और व्यापार बढ़ाने वाला रहेगा ।रेवती नक्षत्र और बुध से बड़े लेन-देन व निवेश के लिए पूरा साल शुभ रहेगा। प्रॉपर्टी के कारोबार में तेजी आएगी। वृहस्पति के कारण खरीदारी से सुख-समृद्धि बढ़ेगी। नए संवत्सर में ग्रहों की खगोलीय मंत्री परिषद के 10 विभागों में राजा और मंत्री सहित पांच विभाग पाप ग्रहों के पास तथा 5 शुभ ग्रहों के पास रहेंगे। इस वर्ष राजा-शनि, मंत्री गुरु, सस्पेश सूर्य, दुर्गेश बुध, धनेश-शनि, रसेश मंगल, धान्येश-शुक्र, नीरसेश-शनि, फलेश मेघेश-बुध होंगे।

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