December 6, 2021

“वेदो में बताया है, कि मन की शक्ति अपार है। लोग उस से लाभ लेना नहीं जानते।”

“वेदो में बताया है, कि मन की शक्ति अपार है। लोग उस से लाभ लेना नहीं जानते।” आपने बहुत से वीडियोस में देखा होगा, कि “उस विकलांग व्यक्ति के हाथ नहीं हैं, अथवा पांव नहीं हैं, अथवा आंखें नहीं हैं, अथवा और कोई अंग स्वस्थ नहीं है। फिर भी वह बहुत विशेष योग्यताएं रखता है। यहां तक कि ओलंपिक जैसे ऊंचे खेलों तक भी वह पुरस्कार लेता है। और भी अनेक क्षेत्रों में बहुत अच्छी ऊंची प्रगति कर लेता है। विश्व कीर्तिमान में भी उसका नाम आ जाता है।” इस सबका कारण क्या है? “मन की विचित्र शक्तियां। मन में बहुत अधिक विचित्र शक्तियां हैं।”संसार के लोग उन शक्तियों को नहीं जानते। उनका लाभ उठाना नहीं जानते। “इसलिए सब कुछ होते हुए भी अर्थात शरीर के अंग स्वस्थ होते हुए भी, धन संपत्ति, उत्तम परिवार होते हुए भी, अपने आलस्य प्रमाद पुरुषार्थ हीनता आदि दोषों के कारण शिकायतें करते रहते हैं, कि भगवान ने मुझे यह नहीं दिया, वह नहीं दिया इत्यादि।”और सृजनात्मक कार्य कुछ नहीं करते, जिससे कि उनकी विशेष उन्नति नहीं हो पाती, और बस शिकायतें ही चलती रहती हैं।इसके अतिरिक्त अनेक बार जीवन में कुछ समस्याएं भी आ जाती हैं। “कभी व्यक्ति रोगी हो जाता है, कभी कोई उस पर झूठा आरोप लगा देता है, उसे अपमानित करता है, कभी दुर्घटना हो जाती है, आदि आदि अनेक आपत्तियां आने पर भी व्यक्ति उन समस्याओं का समाधान ढूंढने में परिश्रम नहीं करता, शिकायतें ही करता रहता है। यह जीवनशैली अच्छी नहीं है।”ईश्वर ने आपको बहुत कुछ दिया है। जैसे कि, “अच्छे-अच्छे माता-पिता दिए हैं। विद्वान गुरुजन दिए हैं। आपका शरीर स्वस्थ है, बलवान है। आपके मित्र संबंधी भी अच्छे हैं, बहुत सहयोग करते हैं। स्वास्थ्य भी आपका अच्छा है। खाना-पीना सारी सुविधाएं पूरी हैं। बस एक मन में कमजोरी है। आपका मन ढीला है।” मन को बलवान बनाएं। उत्साह उत्पन्न करें। “ईश्वर ने जो आपको सुविधाएं दी हैं, उन सुविधाओं की सूची बनाएं। कागज पर लिखें, कि ईश्वर ने आपको क्या-क्या दिया है?” जैसा कि कुछ सुविधाएं मैंने ऊपर लिखी हैं, ये सारी सुविधाएं; और इसके अलावा और भी जो ईश्वर ने आपको सुविधाएं दी हैं, उन सब को लिखकर एक सूची बनाएं।“उस सूची को 100 दिन तक प्रतिदिन, दिन में तीन बार पढ़ें। आपके अंदर उत्साह भर जाएगा। आपका मन प्रफुल्लित, बलवान हो जाएगा। इस प्रकार से अपने मन को बलवान बनाएं।” “सुबह शाम बैठकर ईश्वर का ध्यान करें। गायत्री मंत्र से ईश्वर की स्तुति प्रार्थना करें। उससे और शक्ति मांगें। विद्या बल बुद्धि मांगें। आपके अंदर मन की विचित्र शक्तियां जाग जाएंगी, और आप बहुत कुछ कर डालेंगे। यदि आपने अपने मन को इस प्रकार से बलवान बना लिया, और समस्याओं से लड़ने का विचार ठान लिया, तो कोई समस्या आपके सामने टिक नहीं पाएगी, सब की सब भाग खड़ी होंगी।”

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आप के नाम में छुपा है राम का नाम

आप के नाम में छुपा है राम का नाम अदभुत गणितज्ञ “श्री.तुलसीदासजी से एक भक्त ने पूछा कि महाराज आप श्रीराम के इतने गुणगान करते हैं , क्या कभी खुद श्रीराम ने आपको दर्शन दिए हैं ?..तुलसीदास बोले :- ” हां “भक्त :- महाराज क्या आप मुझे भी दर्शन करा देंगे ???तुलसीदास :- ” हां अवश्य ” ….तुलसीदास जी ने ऐसा मार्ग दिखाया कि एक गणित का विद्वान भी चकित हो जाए !!!तुलसीदास जी ने कहा , “”अरे भाई यह बहुत ही आसान है !!! तुम श्रीराम के दर्शन स्वयं अपने अंदर ही प्राप्त कर सकते हो.””हर नाम के अंत में राम का ही नाम है. इसे समझने के लिए तुम्हे एक “सूत्रश्लोक ” बताता हूं .यह सूत्र किसी के भी नाम में लागू होता है !!!भक्त :-” कौनसा सूत्र महाराज ?” तुलसीदास :- यह सूत्र है …||”नाम चतुर्गुण पंचतत्व मिलन तासां द्विगुण प्रमाण || || तुलसी अष्ट सोभाग्ये अंत मे शेष राम ही राम || “ इस सूत्र के अनुसार★ अब हम किसी का भी नाम ले और उसके अक्षरों की गिनती करें…१)उस गिनती को (चतुर्गुण) ४ से गुणाकार करें.२) उसमें (पंचतत्व मिलन) ५ मिला लें.३) फिर उसे (द्विगुण प्रमाण) दुगना करें.४)आई हुई संख्या को (अष्ट सो भागे) ८ से विभाजित करें .*”” संख्या पूर्ण विभाजित नहीं होगी और हमेशा २ शेष रहेगा!!! …यह २ ही “राम” है। यह २ अंक ही ” राम ” अक्षर हैं… ★विश्वास नहीं हों रहा है ना???चलिए हम एक उदाहरण लेते हैं …आप एक नाम लिखें , अक्षर कितने भी हों !!!★ उदा. ..निरंजन… ४ अक्षर१) ४ से गुणा करिए ४x४=१६२)५ जोड़िए १६+५=२१३) दुगने करिए २१×२=४२४)८ से विभाजन करने पर ४२÷८= ५ पूर्ण अंक , शेष २ !!!शेष हमेशा दो ही बचेंगे,यह बचे २ अर्थात् – “राम” !!! विशेष यह है कि सूत्रश्लोक की संख्याओं को तुलसीदासजी ने विशेष महत्व दिया है!!!★1) चतुर्गुण अर्थात् ४ पुरुषार्थ :- धर्म, अर्थ, काम,मोक्ष !!!★2) पंचतत्व अर्थात् ५ पंचमहाभौतिक :- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु , आकाश!!!★3) द्विगुण प्रमाण अर्थात् २ माया व ब्रह्म !!!★4) अष्ट सो भागे अर्थात् ८ * आठ प्रकार की लक्ष्मी (आग्घ, विद्या, सौभाग्य, अमृत, काम, सत्य, भोग आणि योगलक्ष्मी ) अथवा तो अष्ठधा प्रकृति. ★अब यदि हम सभी अपने नाम की जांच इस सूत्र के अनुसार करें तो आश्चर्यचकित रह जाएंगे कि हमेशा शेष २ ही प्राप्त होगा …इसी से हमें श्री तुलसीदास जी की बुद्धिमानी और अनंत रामभक्ति का ज्ञान होता है !!!

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