Stotram hindi list

Shani Dashrath Stotra | शनि दशरथ स्तोत्र

Shani Dashrath Stotra:शनि दशरथ स्तोत्र: जब किसी जातक की कुंडली में शनि ग्रह गोचर में या शनि के गोचर में तथा शनि ग्रह की खराब स्थिति में बुरा प्रभाव दे रहा हो, तो शनि दशरथ स्तोत्र का प्रतिदिन जाप करने, प्रतिदिन पाठ करने से शनि अपना बुरा प्रभाव छोड़कर अच्छे परिणाम देने लगते हैं। जो

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Daridrta Naashak Stotra | दरिद्रता नाशक स्तोत्र

Daridrta Naashak Stotra:दरिद्रता नाशक स्तोत्र: दरिद्रता नाशक स्तोत्र महर्षि वशिष्ठ द्वारा रचित है। संकट बहुत अधिक हो तो शिव मंदिर में या शिव प्रतिमा के सामने प्रतिदिन तीन बार इसका पाठ करने से विशेष लाभ होगा। क्लेशग्रस्त व्यक्ति यदि स्वयं पाठ करे तो उसे उत्तम फल की प्राप्ति होती है, किन्तु यदि कोई स्वजन, पत्नी

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Dattatreya Stotra | दत्तात्रेय स्तोत्र

Dattatreya Stotra:दत्तात्रेय स्तोत्र: भगवान दत्तात्रेय भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव के अवतार हैं। वे अनुसूया और महर्षि अत्रि के पुत्र थे। दत्तात्रेय के नाम को दो शब्दों में विभाजित किया जा सकता है, दत्त (साधन) और अत्रि (ऋषि अत्रि)। भगवान दत्तात्रेय को पर्यावरण शिक्षा का शिक्षक माना जाता है। भगवान दत्तात्रेय को हिंदू त्रय ब्रह्मा,

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Tulsi Stotra | तुलसी स्तोत्र

Tulsi Stotra:तुलसी स्तोत्र: यह तुलसी स्तोत्र संस्कृत में है और यह ब्रह्मा और पुराण से है। तारकासुर एक बहुत क्रूर राक्षस था और उसने देवताओं को पराजित किया था। उसे भगवान ब्रह्मा ने वरदान दिया था। वरदान के अनुसार तारकासुर अमर हो गया था क्योंकि उसे युद्ध में देवताओं, मनुष्यों या देवी-देवताओं से कोई भय

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Tantra Shanti Stotra | तन्त्र शान्ति स्तोत्र

तन्त्र शान्ति स्तोत्र (Tantra Shanti Stotra): समस्त प्रकार के तंत्र दोषों को दूर करने का मंत्र… इस विघ्न-विनाशक तन्त्र शान्ति मंत्र के पाठ मात्र से भयानक से भयानक तान्त्रिक प्रयोग नष्ट हो जाता है! Tantra Shanti Stotra:तन्त्र शान्ति स्तोत्र पाठ कैसे करे? किसी भी शुक्रवार Tantra Shanti Stotra शाम के समय 5 से 9 के बीच

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Chatushloki Bhagwat | चतु:श्लोकी भगवत्

Chatushloki Bhagwat:चतुश्लोकी भागवत: हिन्दू धर्म के अनुसार, “ॐ” इस संसार की प्रत्येक सृष्टि का मूल प्राण है। चतुश्लोकी भागवत के चार श्लोकों में भगवत गीता की संपूर्ण शिक्षाओं का सार है। श्रीमद्भागवत भगवान का स्वरूप है, इसलिए इसकी भक्तिपूर्वक पूजा की जाती है। इसके पठन और श्रवण से भोग और मोक्ष दोनों सुलभ हो जाते

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Chakra Raj Stotra | चक्र राज स्तोत्र

Chakra Raj Stotra श्री गरुड़ पुराण में चक्र राज स्तोत्र का वर्णन है। चक्र राज स्तोत्र भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र को समर्पित है। सुदर्शन चक्र के पाठ का नियमित पाठ करने से व्यक्ति की समस्त बाधाएं कट जाती हैं, जैसे सुदर्शन चक्र दुष्टों को काटता है, समस्त पीड़ाएं कट जाती हैं। Chakra Raj Stotra:जीवन

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Govind Damodar Stotra | गोविन्द दामोदर स्तोत्र

Govind Damodar Stotra:गोविंद दामोदर स्तोत्र: भगवान गोविंदा की सेवा में आसक्त होने से आपको शाश्वत आनंद और संतुष्टि मिलेगी। पूर्ण संतुष्टि और शाश्वत आनंद पाने के लिए वृंदावन जाएँ। “वृंदावन के रास्ते में बिल्वमंगलाचार्य एक बार फिर एक ब्राह्मण की सुंदर पत्नी को देखकर वासना से ग्रसित हो गए। अपनी वासना से लज्जित होकर उन्होंने

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गोपिकाविरहगीतम् | Gopika Viraha Gitam

गोपिकाविरहगीतम् | Gopika Viraha Gitam Gopika Viraha Gitam (गोपिकाविरहगीतम्) गोपिका विरह गीतएहि मुरारे कुंजविहरे एहि प्रणत जन बन्धोहे माधव मधुमथन वरेण्य केशव करुणा सिंधोरास निकुंजे गुन्जित नियतम भ्रमर शतम किल कांतएहि निभ्रित पथ पंथत्वमहि याचे दर्शन दानम हे मधुसूदन शान्तसुन्यम कुसूमासन मिह कुंजे सुन्यम केलि कदम्बदीनः केकि कदम्बमृदु कल ना दम किल सवि षदम रोदित यमुना

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Gopal Hridaya Stotra | गोपाल ह्रदय स्तोत्र

Gopal Hridaya Stotra:गोपाल हृदय स्तोत्र: देवी भागवत के अनुसार श्री कृष्ण देवी माता महाकाली के अवतार हैं। और राधा भगवान शिव का अवतार हैं। देवी महाकाली ने देवी भागवत में कहा है कि मैं कृष्ण नामक पुरुष अवतार में जन्म लूंगी। मैं Gopal Hridaya Stotra भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र और प्रतीकों को धारण करती

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Gopal Vishanti Stotram | गोपाल विशंति स्तोत्रम्

गोपाल विशांति स्तोत्रम् : हमारे भगवान कृष्ण का जन्मदिन (श्री जयंती) सिंह श्रावण मास (आवनी) को होता है। जब कृष्ण पक्ष की अष्टमी रोहिणी नक्षत्र से संयुक्त होती है, तब हमारे भगवान का जन्म हुआ था। स्वामी देसिकन ने उनकी स्तुति में 20 श्लोक रचे और प्रार्थना की कि इस धरती पर अपने अंतिम क्षणों

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Gajendra Moksha Stotram:गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र

गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र (Gajendra Moksha Stotram) श्रीशुक उवाच एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो ह्रदि । जजाप परमं जाप्यं प्राक्जन्मन्यनुशिक्षितम् ॥  १ ॥ गजेन्द्र उवाच ॐ नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम् । पुरुषायादिबीजाय परेशायाभीधीमहि ॥  २ ॥ यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयम् । योऽस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्दे स्वयंभुवम् ॥ ३ ॥ यः स्वात्मनीदं निजमाययार्पितम् । क्वचिद्विभांतं

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