गोपिकाविरहगीतम् | Gopika Viraha Gitam

गोपिकाविरहगीतम् | Gopika Viraha Gitam Gopika Viraha Gitam (गोपिकाविरहगीतम्) गोपिका विरह गीतएहि मुरारे कुंजविहरे एहि प्रणत जन बन्धोहे माधव मधुमथन वरेण्य केशव करुणा सिंधोरास निकुंजे गुन्जित नियतम भ्रमर शतम किल कांतएहि निभ्रित पथ पंथत्वमहि याचे दर्शन दानम हे मधुसूदन शान्तसुन्यम कुसूमासन मिह कुंजे सुन्यम केलि कदम्बदीनः केकि कदम्बमृदु कल ना दम किल सवि षदम रोदित यमुना

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