गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र

Gajendra Moksha Stotram:गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र

गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र (Gajendra Moksha Stotram) श्रीशुक उवाच एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो ह्रदि । जजाप परमं जाप्यं प्राक्जन्मन्यनुशिक्षितम् ॥  १ ॥ गजेन्द्र उवाच ॐ नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम् । पुरुषायादिबीजाय परेशायाभीधीमहि ॥  २ ॥ यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयम् । योऽस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्दे स्वयंभुवम् ॥ ३ ॥ यः स्वात्मनीदं निजमाययार्पितम् । क्वचिद्विभांतं

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Gajendra Moksha Stotram:गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र

गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र (Gajendra Moksha Stotram) श्रीशुक उवाच एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो ह्रदि । जजाप परमं जाप्यं प्राक्जन्मन्यनुशिक्षितम् ॥  १ ॥ गजेन्द्र उवाच ॐ नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम् । पुरुषायादिबीजाय परेशायाभीधीमहि ॥  २ ॥ यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयम् । योऽस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्दे स्वयंभुवम् ॥ ३ ॥ यः स्वात्मनीदं निजमाययार्पितम् । क्वचिद्विभांतं

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