हनुमादसत्तरसातनामावली ४ एक संस्कृत श्लोक है जो हनुमान जी की स्तुति करता है। यह श्लोक गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है, जो रामायण के लेखक भी हैं।
श्लोक का अर्थ इस प्रकार है:
हे हनुमान, आप भगवान राम के दूत हैं। आपने भगवान राम के लिए कई कठिन कार्य किए हैं। आप भगवान राम के लिए हमेशा तत्पर हैं। आप भगवान राम के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिए तैयार हैं। आप भगवान राम के लिए सबसे बड़े भक्त हैं।
श्लोक में हनुमान जी को भगवान राम के दूत के रूप में वर्णित किया गया है। श्लोक में यह भी कहा गया है कि हनुमान जी ने भगवान राम के लिए कई कठिन कार्य किए हैं, जैसे कि लंका पर आक्रमण करना और संजीवनी बूटी लाना। श्लोक में यह भी कहा गया है कि हनुमान जी भगवान राम के लिए हमेशा तत्पर हैं और अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिए तैयार हैं।
श्लोक के अंत में, हनुमान जी को भगवान राम के लिए सबसे बड़े भक्त के रूप में वर्णित किया गया है।
श्लोक का पाठ इस प्रकार है:
रामदूत हनुमान नमो नमः। रामकार्ये तत्परः सर्वस्वं त्यजन् सदा। रामभक्तिनिरताः रामभक्तानां श्रेष्ठो हनुमान नमो नमः।
श्लोक का अनुवाद इस प्रकार है:
हे हनुमान, जो भगवान राम के दूत हैं, मैं उसको नमस्कार करता हूं। वह भगवान राम के कार्यों के लिए हमेशा तत्पर रहता है और हमेशा भगवान राम के लिए अपना सर्वस्व त्यागने के लिए तैयार रहता है। वह भगवान राम की भक्ति में निमग्न है और भगवान राम के भक्तों में श्रेष्ठ है। मैं उसको नमस्कार करता हूं।
यह श्लोक हनुमान जी की भक्ति और उनकी भगवान राम के प्रति समर्पण को दर्शाता है। यह श्लोक भक्तों को हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।
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