श्री अयोध्या पंचकम्
अर्थ:
हे भगवान राम, तुम अयोध्या के राजा हो, तुम सभी भक्तों के लिए प्रिय हो। तुम दयालु और करुणामय हो, और तुम सभी को मुक्ति प्रदान करते हो।
शाब्दिक अर्थ:
- श्री - भगवान
- अयोध्या - अयोध्या शहर
- पंचकम् - पाँच श्लोकों का एक समूह
अनुवाद:
हे भगवान राम, तुम अयोध्या के राजा हो, तुम सभी भक्तों के लिए प्रिय हो। तुम दयालु और करुणामय हो, और तुम सभी को मुक्ति प्रदान करते हो।
श्लोक 1:
याऽयोध्या जगती तलेतु मनुना वैकुण्ठतो ह्यानिता याचित्वा निजसृष्टिपालनपरं वैकुण्ठनाथं प्रभुम् ।
अर्थ:
हे भगवान राम, तुम अयोध्या में निवास करते हो, जो मनुष्यों द्वारा वैकुण्ठ से लाया गया था। तुमने अपने सृष्टि के पालन के लिए वैकुण्ठनाथ प्रभु से प्रार्थना की थी।
श्लोक 2:
या चक्रोपरि राजते च सततं वैकुण्ठनाथस्य वै या वै मानवलोकमेत्य सकलान् दात्री सदा वाञ्छितान् ।
अर्थ:
हे भगवान राम, तुम वैकुण्ठनाथ के चक्र पर हमेशा राज करते हो। तुम मानवलोक में आते हो और सभी को मनचाही चीजें देते हो।
श्लोक 3:
यस्यां वैष्णव सज्जनाः सुरसिकाः स्वाचारनिष्ठाः सदा लीला धाम सुनाम रूप दयिताः श्रीरामचन्द्रेरताः ।
अर्थ:
हे भगवान राम, तुम अयोध्या में निवास करते हो, जो वैष्णवों, साधुओं और संतों का घर है। वे तुम्हारे लीला-धाम, तुम्हारे सुंदर रूप और तुम्हारी दया के प्रति समर्पित हैं।
श्लोक 4:
यस्यां तीर्थशतं सदा निवसति ह्यानन्ददं पावनं यस्या दर्शन लालसा मुनिवरा ध्यानेरताः सर्वदा ।
अर्थ:
हे भगवान राम, अयोध्या में एक सौ तीर्थ हैं जो हमेशा आनंदित रहते हैं। सभी मुनिजन तुम्हारे दर्शन की लालसा रखते हैं और तुम्हारे ध्यान में लीन रहते हैं।
श्लोक 5:
ध्येया ब्रह्ममहेशविष्णुमुनिभिर्हृआनन्ददा सर्वदा साऽयोध्या परमात्मनो विजयते धाम्नां परा मुक्तिदा ।
अर्थ:
हे भगवान राम, तुम ब्रह्मा, विष्णु और शिव के लिए भी आराध्य हो। तुम सभी मुनियों के लिए आनंद के स्रोत हो। तुम परमात्मा के निवास स्थान हो, और तुम मोक्ष प्रदान करते हो।
फलश्रुति:
जो कोई इस श्री अयोध्या पंचकम् का पाठ करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है, और उसे सभी सुखों की प्राप्ति होती है।
श्री अयोध्या पंचकम् का महत्व:
श्री अयोध्या पंचकम् एक महत्वपूर्ण हिंदू धार्मिक पाठ है। यह अयोध्या शहर और भगवान राम की महिमा का वर्णन करता है। यह पाठ सभी भक्तों के लिए एक प्रेरणा है।
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