Shreesundarabhaktastutih
श्रीसुन्दरभक्तस्तुति एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव के एक भक्त, श्रीसुन्दर की प्रशंसा करता है। यह स्तोत्र 2 श्लोकों में विभाजित है, प्रत्येक श्लोक श्रीसुन्दर के एक विशेष गुण या स्वरूप की प्रशंसा करता है।
स्तोत्र का प्रारंभिक श्लोक श्रीसुन्दर के रूप की प्रशंसा करता है:
गौरीशप्रतिबिम्बमद्भुततनुं चाष्टादशाब्दाकृतिं श्रीजम्बूपुरजन्मभाजमनिशं त्यागेशसेवापरम् । गानैर्ग्राहविमुक्तबालजनकानन्दप्रदं वाग्मिनं वन्दे सुन्दरमूर्तिमीशसुहृदं कैलासवासं सदा ॥ १ ॥
अर्थ:
गौरीश के प्रतिबिम्ब के समान अद्भुत शरीर वाले, अठारह वर्ष के रूप वाले, श्रीजम्बूपुर में जन्मे, नित्य त्यागेश की सेवा करने वाले, गान से ग्राह विमुक्त बालकों को आनंद देने वाले, वाग्मी, सुन्दर मूर्ति वाले, ईश के सुहृद, कैलासवासी, सदा वन्दनीय श्रीसुन्दर को मैं प्रणाम करता हूं।
अगला श्लोक श्रीसुन्दर के गुणों की प्रशंसा करता है:
Shreesundarabhaktastutih
शैवब्राह्मणवंशजः शिवपरब्रह्मानुबिम्बात्मना जातो भूगतशाम्भवस्थलवरानेकानटन् सूक्तिभिः । स्तावं स्तावममर्त्यगीतविभवोऽमर्त्यात्मनैरावतं ह्यारूढो रजताद्रिशृङ्गमगमत् श्रीसुन्दरः सेव्यताम् ॥ २ ॥
अर्थ:
शैवब्राह्मण वंशज, शिव परब्रह्म के अनुबिम्ब आत्मा से उत्पन्न, भूगत शाम्भव स्थल वरानेकनटन् सूक्तियों से युक्त, अमर्त्य गीतों के विभव से युक्त, अमर्त्य आत्मा का निवास स्थान, रजताद्रि शिखर पर विराजमान श्रीसुन्दर को हम सेवा करते हैं।
श्रीसुन्दरभक्तस्तुति एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव के भक्तों की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र अक्सर प्रार्थना और ध्यान में किया जाता है।
श्रीसुन्दरभक्तस्तुति के प्रमुख प्रसंग:
- स्तोत्र का प्रारंभिक श्लोक श्रीसुन्दर के रूप की प्रशंसा करता है।
- स्तोत्र का अगला श्लोक श्रीसुन्दर के गुणों की प्रशंसा करता है।
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