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Published November 8, 2023
Updated November 8, 2023

श्रीसरवेश्वरप्रणतिपादावली एक संस्कृत ग्रन्थ है जो भगवान शिव की स्तुति में लिखी गई है। इस ग्रन्थ की रचना 14वीं शताब्दी में श्रीपादाचार्य नामक एक संत ने की थी।

श्रीसरवेश्वरप्रणतिपादावली में, श्रीपादाचार्य भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हैं। वे भगवान शिव को सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी, और सर्वज्ञ मानते हैं। वे भगवान शिव को सभी जीवों के कल्याणकर्ता मानते हैं।

श्रीसरवेश्वरप्रणतिपादावली में, श्रीपादाचार्य भगवान शिव की स्तुति करते हुए कहते हैं:

shreesarveshvaraprantipadyaavalee

नमस्ते रुद्राय नमस्ते शम्भवे नमस्ते महेश्वराय।

नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते शिवाय शंभो।

अर्थ:

हे रुद्र, हे शम्भु, हे महेश्वर, हे शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्रीसरवेश्वरप्रणतिपादावली एक सुंदर और भावपूर्ण ग्रन्थ है जो भगवान शिव की भक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

श्रीसरवेश्वरप्रणतिपादावली की कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:

नमस्ते त्रिपुरांतकारी, नमस्ते त्रिलोकेशाय।

नमस्ते करुणाकराय, नमस्ते सर्वाधाराय।

अर्थ:

हे त्रिपुर का अंत करने वाले, हे त्रिलोक के स्वामी, हे करुणा के सागर, हे सभी का आधार, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्रीसरवेश्वरप्रणतिपादावली एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रन्थ है जो भगवान शिव के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है।

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