श्रीशिवस्तुति:
नमो महादेवाय, शिवाय परमात्मने। नमस्तेऽस्तु योगिने, चंद्रशेखराय मुनीन्द्रार्चिताय।
नमस्तेऽस्तु योगनिद्रिहराय, परब्रह्म स्वरूपाय शंकाय। नमस्तेऽस्तु त्रिगुणात्मकाय, सर्वदेवमनोहारिणे।
नमस्तेऽस्तु त्रिनेत्राय, सर्वशत्रु विनाशनाय। नमस्तेऽस्तु त्रिपुरांतकाय, भक्तवत्सल त्रिनेत्राय।
नमस्तेऽस्तु त्रिलोकनाथाय, सर्वलोकहिताय। नमस्तेऽस्तु त्रिशूलधारकाय, ब्रह्मा विष्णु महेश्वराय।
नमस्तेऽस्तु सर्वभूतानां, माता शरणमाश्रिता। तस्यै नमो नमस्तेऽस्तु, पार्वत्यै परमेश्वरि।
अर्थ:
हे महादेव, हे परमात्मा, हे योगिराज, हे चंद्रशेखर, हे मुनियों द्वारा पूजित, हे योगनिद्रा को हराने वाले, हे परब्रह्म के स्वरूप, हे शिव, हे त्रिगुणात्मक, हे सभी देवताओं के मनोहारिणी, हे तीन नेत्रों वाले, हे सभी शत्रुओं को नष्ट करने वाले, हे त्रिपुरांतक, हे भक्तवत्सल, हे तीन नेत्रों वाले, हे तीन लोकों के स्वामी, हे सभी लोकों के लिए कल्याणकारी, हे त्रिशूलधारी, हे ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर, हे सभी प्राणियों की माता, हे शरण देने वाली, तुमको नमस्कार।
श्रीशिवस्तुति एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 10 श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक भगवान शिव के एक अलग गुण या रूप का वर्णन करता है।
श्रीशिवस्तुति के 10 श्लोकों का अर्थ है:
- हे भगवान शिव, आपको नमस्कार। आप महादेव हैं, जो परमात्मा हैं। आप योगिराज हैं, जो योग में निपुण हैं। आप चंद्रशेखर हैं, जो चंद्रमा के मुकुट वाले हैं। आप मुनियों द्वारा पूजित हैं। आप योगनिद्रा को हराने वाले हैं। आप परब्रह्म के स्वरूप हैं। आप शिव हैं, जो सभी देवताओं के स्वामी हैं।
- आप त्रिगुणात्मक हैं, जो सत्व, रज और तम के तीन गुणों से मिलकर बने हैं। आप सभी देवताओं के मनोहारिणी हैं। आप तीन नेत्रों वाले हैं। आप सभी शत्रुओं को नष्ट करने वाले हैं। आप त्रिपुरांतक हैं, जिन्होंने त्रिपुरासुर का वध किया था। आप भक्तवत्सल हैं, जो अपने भक्तों से बहुत प्यार करते हैं। आप तीन नेत्रों वाले हैं।
- आप तीन लोकों के स्वामी हैं, जो स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल हैं। आप सभी लोकों के लिए कल्याणकारी हैं। आप त्रिशूलधारी हैं, जो आपका एक प्रमुख प्रतीक है। आप ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर के रूप में तीन देवताओं के स्वरूप हैं। आप सभी प्राणियों की माता हैं, जो सभी को जन्म देती हैं। आप शरण देने वाली हैं, जो सभी को दुखों से बचाती हैं।
श्रीशिवस्तुति एक शक्तिशाली भक्ति भजन है जो भक्तों के दिलों में भगवान शिव के लिए प्रेम और भक्ति को जगा सकता है। यह भजन भगवान शिव की महिमा और गुणों को भी दर्शाता है।
श्रीशिवस्तुति एक लोकप्रिय स्तोत्र है जिसे अक्सर पूजा और अनुष्ठानों के दौरान पढ़ा जाता है। यह भजन भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन में आध्या
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