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Published October 14, 2023
Updated July 29, 2024

श्रीरामष्टोत्तरशतनामास्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान राम के 108 नामों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 17वीं शताब्दी के कवि, श्रीधर स्वामी द्वारा रचित है।

श्रीरामष्टोत्तरशतनामास्तोत्रम् में, श्रीधर स्वामी भगवान राम के कई दिव्य गुणों और उपलब्धियों का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान राम सर्वव्यापी हैं, सभी गुणों से संपन्न हैं, और सभी का कल्याण करते हैं।

श्रीरामष्टोत्तरशतनामास्तोत्रम् की कुछ पंक्तियों का अनुवाद इस प्रकार है:

प्रथम श्लोक:

हे राम, आप सर्वव्यापी हैं, और आप सभी में हैं। आप सभी गुणों से संपन्न हैं, और आप सभी का कल्याण करते हैं।

दूसरा श्लोक:

हे राम, आप दयालु हैं, और आप करुणामय हैं। आप न्यायप्रिय हैं, और आप हमेशा सत्य की रक्षा करते हैं।

तीसरा श्लोक:

हे राम, आप एक आदर्श राजा हैं, और आप एक आदर्श पुत्र हैं। आप एक आदर्श पति हैं, और आप एक आदर्श भाई हैं।

श्रीरामष्टोत्तरशतनामास्तोत्रम् एक शक्तिशाली और प्रेरणादायक स्तोत्र है जो सभी को प्रभावित कर सकता है। यह एक ऐसा स्तोत्र है जो मनुष्य को भगवान राम के प्रेम और करुणा से जोड़ता है।

श्रीरामष्टोत्तरशतनामास्तोत्रम् के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • यह एक स्तोत्र है जो भगवान राम के 108 नामों की स्तुति करता है।
  • यह श्रीधर स्वामी द्वारा रचित है।
  • यह अक्सर धार्मिक अनुष्ठानों और समारोहों में पढ़ा जाता है।
  • यह कई हिंदू द्वारा रोजाना आध्यात्मिक लाभों के लिए जपा जाता है।
  • यह भगवान राम के कई दिव्य गुणों और उपलब्धियों का वर्णन करता है।
  • यह उनकी भूमिका को भी उजागर करता है कि वह अच्छे की रक्षा करते हैं और बुराई का नाश करते हैं।

श्रीरामष्टोत्तरशतनामास्तोत्रम् एक शक्तिशाली और प्रेरणादायक स्तोत्र है जो सभी को प्रभावित कर सकता है। यह एक ऐसा स्तोत्र है जो मनुष्य को भगवान राम के प्रेम और करुणा से जोड़ता है।

यहां श्रीरामष्टोत्तरशतनामास्तोत्रम् का संस्कृत पाठ दिया गया है:

श्रीरामष्टोत्तरशतनामास्तोत्रम्

॥ श्रीरामष्टोत्तरशतनामास्तोत्रम् ॥

॥ श्रीगणेशाय नमः ॥

॥ श्रीरामाय नमः ॥

॥ अथ श्रीरामष्टोत्तरशतनामास्तोत्रम् ॥

॥ 1 ॥

राम रामेति रघुपति रामेति सकलमनोरथ पूरयेति रामेणाभिहृतं कलत्रं धनं पुत्रं दास्यो गणश्चेच्छन्ति ॥ १ ॥

॥ 2 ॥

रामचंद्रो दशरथोनन्दनो दशरथतनयः श्रीमानः सीतापती लखनप्रियः कोकदानो लोकपाला ॥ २ ॥

॥ 3 ॥

रामो राजाधिराजो दशरथोनन्दनो दशरथतनयः श्रीमानः सीतापती लखनप्रियः कोकदानो लोकपाला ॥ ३ ॥

॥ 4 ॥

रामो दाशरथी दयालुः करुणावतारः सदा मम रक्षकः सदा मम त्राता ॥ ४ ॥

॥ 5 ॥

रामो वीरः शूरः पराक्रमी सर्वशत्रुजित् सदा मम प्रियः सदा मम नाथः ॥ ५ ॥

॥ 6 ॥

रामो सर्वज्ञो वेदविद् सर्वधर्मविद् सदा मम गुरुः सदा मम पथप्रदर्शकः ॥ ६ ॥

॥ 7 ॥

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