श्रीरामसुप्रभातम एक संस्कृत काव्य है जो भगवान राम की प्रातःकालीन स्तुति का वर्णन करता है। यह काव्य 17वीं शताब्दी के संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है। काव्य में, तुलसीदास भगवान राम के गुणों का वर्णन करते हैं और उनके भक्तों को भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।
श्रीरामसुप्रभातम में कुल 12 श्लोक हैं, जो विभिन्न विषयों पर आधारित हैं, जैसे कि भगवान राम का जन्म, उनका बचपन, उनका विवाह, उनका वनवास, उनका रावण पर विजय और उनका राज्याभिषेक। काव्य में भगवान राम के गुणों का भी वर्णन किया गया है, जैसे कि उनकी सुंदरता, उनकी बुद्धि, उनकी शक्ति और उनकी करुणा।
श्रीरामसुप्रभातम एक अत्यधिक लोकप्रिय काव्य है और इसे हिंदी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ काव्यों में से एक माना जाता है। काव्य का भक्तों के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है और उन्हें भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया है।
श्रीरामसुप्रभातम के कुछ प्रमुख श्लोक निम्नलिखित हैं:
- छंद 1:
उठु उठु हे राम, जय जय राम। दिनकर उग्यो आयो, जय जय राम।
इस छंद में तुलसीदास भगवान राम को सुबह उठने के लिए कहते हैं। वे कहते हैं कि सूर्य निकल आया है और यह समय भगवान राम की पूजा करने का है।
- छंद 2:
रामचंद्र कृपालु भज मन मोरा। सब दुःख भय हरहु, सुख उपजाओ।
इस छंद में तुलसीदास भगवान राम की भक्ति के महत्व का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान राम की भक्ति से सभी दुख और भय दूर हो जाते हैं और सुख आता है।
- छंद 3:
राम नाम जपहिं दिन रात, मन तन होय सुखदाई। राम भगति से भव सागर तरहिं, पावैं बैकुंठ धाम।
इस छंद में तुलसीदास भगवान राम के नाम के जाप के महत्व का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान राम के नाम का जाप करने से मन और तन को सुख मिलता है। भगवान राम की भक्ति से मनुष्य भव सागर को पार कर सकता है और बैकुंठ धाम को प्राप्त कर सकता है।
श्रीरामसुप्रभातम एक अत्यधिक प्रेरणादायक काव्य है जो भक्तों को भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। काव्य भगवान राम के गुणों का वर्णन करता है और भक्तों को उनकी भक्ति में दृढ़ रहने के लिए प्रोत्साहित करता है।
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