श्रीरामभद्र मंगलाशासनं एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान राम के भक्त श्रीरामभद्राचार्य की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 14वीं शताब्दी के संत और कवि तुलसीदास ने लिखा था।
श्रीरामभद्र मंगलाशासनं के 8 श्लोक निम्नलिखित हैं:
श्लोक 1:
जय जय श्रीरामभद्र ! रामभक्तिविरुद्धदोष निवारक ! श्रीरामचरितमानस प्रणेता ! सर्व भक्तजनों के नाथ !
अर्थ:
जय हो, जय हो, श्रीरामभद्र ! जो रामभक्ति के विरुद्ध दोषों को दूर करते हैं ! श्रीरामचरितमानस के प्रणेता ! सभी भक्तजनों के नाथ !
श्लोक 2:
आपका जन्म अयोध्या में हुआ था, आपके पिता का नाम लक्ष्मणदास था, आपकी माता का नाम चम्पा देवी था, आपने रामभक्ति का प्रचार किया।
अर्थ:
आपका जन्म अयोध्या में हुआ था, आपके पिता का नाम लक्ष्मणदास था, आपकी माता का नाम चम्पा देवी था, आपने रामभक्ति का प्रचार किया।
श्लोक 3:
आपने रामभक्ति के प्रचार के लिए, अनेक ग्रंथों की रचना की, जिसमें श्रीरामचरितमानस सबसे प्रसिद्ध है, जो रामभक्ति का एक उत्कृष्ट ग्रंथ है।
अर्थ:
आपने रामभक्ति के प्रचार के लिए, अनेक ग्रंथों की रचना की, जिसमें श्रीरामचरितमानस सबसे प्रसिद्ध है, जो रामभक्ति का एक उत्कृष्ट ग्रंथ है।
श्लोक 4:
आपके दर्शन से, भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं, आपके आशीर्वाद से, भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
अर्थ:
आपके दर्शन से, भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं, आपके आशीर्वाद से, भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
श्लोक 5:
आपकी कृपा से, भक्तों का जीवन सफल होता है, आपकी कृपा से, भक्तों को सभी सुख प्राप्त होते हैं।
अर्थ:
आपकी कृपा से, भक्तों का जीवन सफल होता है, आपकी कृपा से, भक्तों को सभी सुख प्राप्त होते हैं।
श्लोक 6:
आपकी स्तुति करने से, भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, आपकी स्तुति करने से, भक्तों के सभी पाप दूर हो जाते हैं।
अर्थ:
आपकी स्तुति करने से, भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, आपकी स्तुति करने से, भक्तों के सभी पाप दूर हो जाते हैं।
श्लोक 7:
हे श्रीरामभद्र ! आप हमारे गुरु हैं, आप हमारे आराध्य हैं, आपकी कृपा से, हमारा जीवन सफल हो।
अर्थ:
हे श्रीरामभद्र ! आप हमारे गुरु हैं, आप हमारे आराध्य हैं, आपकी कृपा से, हमारा जीवन सफल हो।
श्लोक 8:
जय जय श्रीरामभद्र ! जय जय श्रीरामभद्र ! जय जय श्रीरामभद्र !
अर्थ:
जय हो, जय हो, श्रीरामभद्र ! जय हो, जय हो, श्रीरामभद्र ! **
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