श्रीराम प्रातः स्मरणम्
प्रातर्भजामि रघुनाथकरारविन्दं रक्षोगणाय भयदं वरदं निजेभ्यः। यद्राजसंसदि विभज्य महेशचापं सीताकरग्रहणमङ्गलमाप सद्यः ॥
अर्थ:
मैं प्रातःकाल भगवान राम के चरण कमलों की पूजा करता हूँ, जो राक्षसों के लिए भयंकर और अपने भक्तों के लिए वर देने वाले हैं।
जो चरण कमल अयोध्या के राजसभा में विभाजित होकर शिव के धनुष को तोड़ने वाले हैं, वे आज भी सीता के हाथ को ग्रहण करने के लिए मंगलकारी हैं।
इस श्लोक में, भक्त भगवान राम के चरणों की पूजा करते हैं और उनकी महिमा का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान राम के चरण कमल राक्षसों के लिए भयंकर हैं, लेकिन उनके भक्तों के लिए वर देने वाले हैं। वे कहते हैं कि भगवान राम के चरण कमल अयोध्या के राजसभा में विभाजित होकर शिव के धनुष को तोड़ने वाले थे, और वे आज भी सीता के हाथ को ग्रहण करने के लिए मंगलकारी हैं।
श्रीराम प्रातः स्मरणम् एक बहुत ही शक्तिशाली स्तोत्र है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को भगवान राम की कृपा प्राप्त होती है और वे अपने जीवन में सुख और शांति प्राप्त करते हैं।**
इस स्तोत्र का पाठ करने का तरीका निम्नलिखित है:
- सबसे पहले, एक स्वच्छ स्थान पर बैठें और अपने सामने एक चित्र या मूर्ति रखें।
- फिर, अपने हाथों को जोड़कर भगवान राम को प्रणाम करें।
- अब, इस श्लोक का पाठ करें।
- अंत में, भगवान राम से अपने जीवन में सुख और शांति प्रदान करने की प्रार्थना करें।
आप इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह उठकर कर सकते हैं।
KARMASU