श्रीरामचंद्रस्तवः भगवान राम की स्तुति में एक संस्कृत भजन है। इसकी रचना 16वीं शताब्दी के कवि-संत गोस्वामी तुलसीदास ने की थी।
यह भजन 108 छंदों में विभाजित है, जिनमें से प्रत्येक भगवान राम के एक अलग गुण या गुण का गुणगान करता है। छंदों को व्यवस्थित तरीके से व्यवस्थित किया गया है, ताकि वे भगवान राम के व्यक्तित्व का व्यापक विवरण दे सकें।
श्रीरामचंद्रस्तवः हिंदुओं के बीच एक लोकप्रिय भजन है, और अक्सर धार्मिक समारोहों और त्योहारों के दौरान इसका पाठ किया जाता है। यह व्यक्तिगत आध्यात्मिक विकास के लिए गाया जाने वाला एक लोकप्रिय भजन भी है।
यहाँ श्रीरामचंद्रस्तवः के पहले श्लोक का अनुवाद है:
> **श्री रामचन्द्र कृपालु भजमानो**,
> **नासति दुक्खलज्जा भयं कुटश्चन**।
> **नास्ति मृत्युः सर्व पाप विमोचनात्**,
> **रामचंद्र कृपालु भजमानो**।
**अनुवाद:**
> हे राम, दयालु, जो आपकी पूजा करते हैं,
> दु:ख, लज्जा या भय का भय कहीं से भी नहीं है।
> सभी पापों से मुक्ति से मृत्यु नहीं होती,
> हे राम, दयालु, जो आपकी पूजा करते हैं।
श्रीरामचंद्रस्तवः एक शक्तिशाली भजन है जो भक्तों को भगवान राम के प्रति अपनी भक्ति विकसित करने और आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त करने में मदद कर सकता है।
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