श्रीराधाकृष्णाशोततरशतनामावली एक संस्कृत श्लोकों का संग्रह है जो राधा और कृष्ण के 108 नामों का वर्णन करता है। यह स्तोत्र 16वीं शताब्दी के संत और कवि, नंददास द्वारा रचित किया गया था।
श्रीराधाकृष्णाशोततरशतनामावली की शुरुआत राधा और कृष्ण के नामों की प्रशंसा से होती है। स्तोत्र में, राधा और कृष्ण के नामों को उनके गुणों और विशेषताओं के साथ जोड़ा गया है।
श्रीराधाकृष्णाशोततरशतनामावली एक लोकप्रिय भक्ति स्तोत्र है। यह अक्सर राधा और कृष्ण के प्रेम को समर्पित भजनों और आरती में गाया जाता है।
श्रीराधाकृष्णाशोततरशतनामावली के कुछ प्रमुख श्लोक इस प्रकार हैं:
- श्लोक 1:
श्रीराधाकृष्णा शुभं नामावली पठंति ये भक्ताः तेषां सर्वे पापानि नश्यन्ति क्षणेन।
अर्थ:
श्रीराधाकृष्ण का शुभ नामावली जो भक्त पढ़ते हैं, उनके सभी पाप क्षण भर में नष्ट हो जाते हैं।
- श्लोक 2:
श्रीराधाकृष्णा नामामृतं पीत्वा ये भक्ताः तेषां सर्वे मनोरथ फलंति क्षणेन।
अर्थ:
श्रीराधाकृष्ण का नामामृत जो भक्त पीते हैं, उनके सभी मनोकामनाएं क्षण भर में पूरी हो जाती हैं।
- श्लोक 3:
श्रीराधाकृष्णा नामेभ्यो नमस्ते नमस्ते भवतु मे वल्लभ भवतु मे वल्लभ।
अर्थ:
श्रीराधाकृष्ण के नामों को मैं बार-बार नमन करता हूं, हे मेरे प्रिय, हे मेरे प्रिय।
श्रीराधाकृष्णाशोततरशतनामावली एक शक्तिशाली भक्ति स्तोत्र है जो राधा और कृष्ण के प्रेम को समर्पित है। यह एक ऐसा स्तोत्र है जो भक्तों को ज्ञान, प्रेम, और मुक्ति प्रदान कर सकता है।
श्रीराधाकृष्णाशोततरशतनामावली के रचनाकार, नंददास, एक विख्यात संत और कवि थे। वे 16वीं शताब्दी में भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के निवासी थे। नंददास ने कई भक्ति ग्रंथों की रचना की, जिनमें श्रीराधाकृष्णाशोततरशतनामावली भी शामिल है।
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