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Published October 11, 2023
Updated October 11, 2023

श्री राधवेन्द्र प्रार्थना

अहीशांशमीशं समीरेण युक्तं सरोजायताक्षं सुदासैकपूज्यम् । वदान्यं सुमान्यं वरेण्यं शरण्यं गुरुं राघवेन्द्रं सदाऽहं नमामि ॥ १ ॥

अर्थ:

हे भगवान राघवेन्द्र, आपके सिर पर सिंह का मुकुट है, और आपके नेत्र कमल के समान हैं। आप सभी दयालु हैं, और सभी आपको पूजते हैं। आप वक्ता हैं, और आपके गुणों की कोई सीमा नहीं है। आप मेरे स्वामी हैं, और मैं आपकी शरण में हूं। मैं आपको हमेशा प्रणाम करता हूं।

सदा मन्दहासं सुपूर्णेन्दुवक्त्रं लसच्चेलभूषं स्मरस्यातिदूरम् । नमत्कामधेनुं हरन्तं मनो मे अघध्वंसिनं राघवेन्द्रं भजामि ॥ २ ॥

अर्थ:

हे भगवान राघवेन्द्र, आप हमेशा मुस्कुराते रहते हैं, और आपके होंठों पर पूर्णिमा का चांद जैसा है। आपके शरीर पर सुंदर गहनें हैं, और आप बहुत दूर से भी याद आते हैं। आप मेरे मन की इच्छाओं को पूरी करने वाले हैं, और आप मेरे पापों को दूर करने वाले हैं। मैं आपको भजता हूं।

भजत्कल्पवृक्षं भवाब्ध्येकपोतं महानन्दतीर्थं कवीन्द्राब्जमित्रम् । धरादेवपालं रमानाथलोलं त्यजत्कामजालं भजे राघवेन्द्रम् ॥ ३ ॥

अर्थ:

हे भगवान राघवेन्द्र, आप सभी भक्तों के लिए एक कल्पवृक्ष हैं। आप संसार सागर के एकमात्र नाव हैं। आप कवियों के राजा के मित्र हैं। आप पृथ्वी के स्वामी हैं, और आप श्रीराम की पत्नी हैं। मैं आपकी भक्ति में लीन होकर अपने कामनाओं के जाल को छोड़ देता हूं।

न याचे गजेन्द्रं नरेन्द्राधिपत्यं न याचेऽमरत्वं न लोकाधिपत्यम् । न याचे सुभद्रां न पुत्रान् न धनम् । त्यजत्कामजालं भजे राघवेन्द्रम् ॥ ४ ॥

अर्थ:

मैं हाथी, राजा, अमरता, या संसार का स्वामी नहीं चाहता। मैं सुभद्रा, पुत्र, या धन नहीं चाहता। मैं अपनी कामनाओं के जाल को छोड़कर भगवान राघवेन्द्र की भक्ति करता हूं।

घनानन्दसारं नवाम्भोदनीलं मुरारिमीशं त्रिलोकीशं । भजत्कल्पवृक्षं भवाब्ध्येकपोतं महानन्दतीर्थं कवीन्द्राब्जमित्रम् । धरादेवपालं रमानाथलोलं त्यजत्कामजालं भजे राघवेन्द्रम् ॥ ५ ॥

अर्थ:

मैं भगवान राघवेन्द्र की भक्ति करता हूं, जो आनंद के सागर हैं, जिनका रंग नवीन आकाश के समान है, जो भगवान विष्णु हैं, जो तीनों लोकों के स्वामी हैं। मैं उनको कल्पवृक्ष मानता हूं, जो संसार सागर के एकमात्र नाव हैं, और जो महान आनंद के तीर्थ हैं, और जो कवियों के राजा के मित्र हैं। मैं पृथ्वी के स्वामी और श्रीराम की पत्नी की भक्ति में लीन होकर अपने कामनाओं के जाल को छोड़ देता हूं।

श्री राघवेन्द्र प्रार्थना का महत्व और प्रभाव:

श्री राघवेन्द्र प्रार्थना एक महत्वपूर्ण हिंदू धार्मिक पाठ है। यह एक भक्ति स्तोत्र है जो भगवान राघवेन्द्र की महिमा का वर्णन करता है। यह पाठ सभी भक्तों के लिए एक प्रेरणा है।

यह पाठ भगवान राघवेन्द्र को एक आदर्श पुरुष के रूप में चित्रित करता है। वे सत्य, धर्म, और करुणा के प्रतीक हैं। यह पाठ भक्तों को भगवान राघवेन्द्र की भक्ति करने के लिए प्रेरित करता है।

श्री राघवेन्द्र प्रार्थना एक सुंदर और भावपूर्ण पाठ है। यह पाठ सभी भक्तों के लिए

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