श्रीमद्भगवद्गीता के द्वितीयकांड में कंस वध का वर्णन आता है। कंस, मथुरा का अधर्मी राजा था, जिसने अपनी बहन देवकी और उसके पति वसुदेव को कैद कर लिया था। कंस ने भविष्यवाणी सुनी थी कि उसकी बहन के आठवें पुत्र से उसकी मृत्यु होगी। इसलिए उसने देवकी के सभी बच्चों को मार डाला।
Srimad Bhagavatam - 02 - Dwitiyaskandha
जब देवकी के आठवें पुत्र कृष्ण का जन्म हुआ, तो वसुदेव उसे गोकुल में नंद और यशोदा के पास छोड़ आए। कंस ने जब यह सुना कि कृष्ण अभी भी जीवित है, तो उसने गोकुल के सभी शिशुओं को मार डालने का आदेश दिया। लेकिन कृष्ण ने कंस के सैनिकों को पराजित कर दिया और गोकुल में शांति स्थापित की।
द्वितीयकांड में कृष्ण के बाल्यकाल के कई अन्य प्रसंगों का भी वर्णन है। इनमें कृष्ण और बलराम का मथुरा में प्रवेश, कृष्ण की बाल लीलाएं, और कृष्ण और सुदामा की मित्रता शामिल हैं।
द्वितीयकांड के मुख्य विषय हैं:
- कंस वध
- कृष्ण के बाल्यकाल के प्रसंग
- कृष्ण और सुदामा की मित्रता
द्वितीयकांड श्रीमद्भगवद्गीता का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह कंस वध के माध्यम से भगवान कृष्ण के महानता और शक्ति का वर्णन करता है। साथ ही, यह कृष्ण के बाल्यकाल के प्रसंगों के माध्यम से उनका मानवीय पक्ष भी दिखाता है।
Srimad Bhagavatam - 02 - Dwitiyaskandha
KARMASU