श्रीगणपतिस्तोत्रम् के पाँचवें श्लोक में, भक्त भगवान गणेश को सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला बताते हैं। वे गणेश से प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें सभी प्रकार की सफलता और समृद्धि प्रदान करें।
श्लोक इस प्रकार है:
श्लोक 5:
नमस्ते गणेशाय सर्वाभीष्टफलप्रदाय। सर्वाभीष्टफलप्रदाय नमः॥
अर्थ:
सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाले गणेश को नमस्कार। सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाले को नमस्कार।
श्लोक में, भक्त गणेश को "सर्वाभीष्टफलप्रदाय" कहते हैं, जिसका अर्थ है "सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला"। वे गणेश से प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें सभी प्रकार की सफलता और समृद्धि प्रदान करें। वे चाहते हैं कि गणेश उन्हें अपने जीवन में सभी प्रकार की इच्छाओं को प्राप्त करने में मदद करें, चाहे वे भौतिक हों, आध्यात्मिक हों, या दोनों।
श्लोक का अर्थ यह भी है कि भक्त गणेश को एक शक्तिशाली देवता के रूप में देखते हैं जो उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकता है। वे गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए आशा और विश्वास रखते हैं।
श्लोक का महत्व यह है कि यह भक्तों को यह याद दिलाता है कि भगवान गणेश सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाले हैं। वे उन भक्तों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार हैं जो उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए प्रयास करते हैं।
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