Shrikaalbhairavpancharatnastutih
श्रीकालभैरव पंचरत्न स्तोत्रम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कालभैरव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भगवान कालभैरव के पांच रूपों की प्रशंसा करता है, जो हैं:
- भैरव, जो भय का नाश करने वाले हैं।
- चंद्रशेखर, जो चंद्रमा का मुकुट धारण करने वाले हैं।
- त्रिपुरान्तक, जो त्रिपुरासुर का वध करने वाले हैं।
- भैरवीनाथ, जो भैरवी के स्वामी हैं।
- महाकाल, जो काल के देवता हैं।
स्तोत्र के पांच श्लोक हैं, प्रत्येक श्लोक में एक विशेष रूप की प्रशंसा है।
श्लोक 1
भैरव भयहर्ता चंद्रशेखर।
त्रिपुरारी भैरवीनाथ महाकाल।
नमस्तेऽस्तु पंचरत्नरूपाय।
अष्टांगयोगमहसिद्धये।
अर्थ:
हे भैरव, हे भयहर्ता, हे चंद्रशेखर,
हे त्रिपुरारी, हे भैरवीनाथ, हे महाकाल,
तुम्हारे पंचरत्न रूप को मैं नमस्कार करता हूं।
अष्टांग योग सिद्धि के लिए।
श्लोक 2
भैरव रूपं भयहरं।
चंद्रशेखरं शोभनम।
त्रिपुरारीं भक्तवत्सलं।
भैरवीनाथं भजनीयम्।
अर्थ:
भैरव रूप भयहर है,
चंद्रशेखर रूप शोभन है,
त्रिपुरारी रूप भक्तवत्सल है,
भैरवीनाथ रूप भजनीय है।
श्लोक 3
महाकालं सर्वव्यापकं।
सर्वशक्तिमं परं ब्रह्म।
नमस्तेऽस्तु पंचरत्नरूपाय।
अष्टांगयोगमहसिद्धये।
अर्थ:
महाकाल सर्वव्यापक हैं,
सर्वशक्तिमान हैं, परब्रह्म हैं,
तुम्हारे पंचरत्न रूप को मैं नमस्कार करता हूं।
अष्टांग योग सिद्धि के लिए।
श्लोक 4
भैरव भयं हरे।
चंद्रशेखरं जप।
त्रिपुरारीं ध्यानये।
भैरवीनाथं व्रजे।
अर्थ:
भैरव भय को हरते हैं,
चंद्रशेखर का जप करें,
त्रिपुरारी का ध्यान करें,
भैरवीनाथ का वरण करें।
श्लोक 5
महाकालं भज।
सर्वशक्तिमानं भज।
नमस्तेऽस्तु पंचरत्नरूपाय।
अष्टांगयोगमहसिद्धये।
अर्थ:
महाकाल की भक्ति करें,
सर्वशक्तिमान की भक्ति करें,
तुम्हारे पंचरत्न रूप को मैं नमस्कार करता हूं।
अष्टांग योग सिद्धि के लिए।
श्रीकालभैरव पंचरत्न स्तोत्रम एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान कालभैरव की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है। यह स्तोत्र ध्यान और साधना के लिए भी उपयोग किया जाता है।
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