Vishnukritam Shivastotram
विष्णुकृतं शिवस्तोत्रं भगवान विष्णु द्वारा रचित एक शिव स्तोत्र है। यह स्तोत्र श्रीमद्भागवत पुराण के पांचवें स्कंध के सत्रहवें अध्याय में मिलता है। इस स्तोत्र में भगवान विष्णु भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हैं।
विष्णुकृतं शिवस्तोत्रं में 8 श्लोक हैं। इन श्लोकों में भगवान विष्णु भगवान शिव को निम्नलिखित नामों से संबोधित करते हैं:
- सर्वात्म
- शंकर
- रुद्र
- नीलकंठ
- कद्रुद्र
- प्रचेता
- गति
- अनंत
- अक्षय
विष्णुकृतं शिवस्तोत्रं का पाठ करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं।
विष्णुकृतं शिवस्तोत्रं का पाठ करने का तरीका निम्नलिखित है:
- सबसे पहले किसी पवित्र स्थान पर बैठ जाएं।
- फिर, हाथ में जल लेकर भगवान शिव का ध्यान करें।
- इसके बाद, स्तोत्र का पाठ करें। प्रत्येक श्लोक का पाठ 108 बार करें। स्तोत्र का पाठ करते समय मन को एकाग्र रखें।
विष्णुकृतं शिवस्तोत्रं का पाठ करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
- भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
- भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं।
- भक्तों को सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।
- भक्तों के पापों का नाश होता है।
- भक्तों को मोक्ष प्राप्त होता है।
विष्णुकृतं शिवस्तोत्रं का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है। हालांकि, प्रातःकाल या शाम के समय इसका पाठ करना श्रेष्ठ माना जाता है।
विष्णुकृतं शिवस्तोत्रं के कुछ श्लोक इस प्रकार हैं:
श्लोक 1:
नमः सर्वात्मने तुभ्यं शङ्करायार्तिहारिणे रुद्राय नीलकण्ठाय कद्रुद्राय प्रचेतसे
अर्थ:
हे भगवान शिव, आप सभी आत्माओं के स्वामी हैं। आप हमारे दुखों को दूर करने वाले हैं। आप रुद्र, नीलकंठ, कद्रुद्र और प्रचेता हैं।
श्लोक 2:
गतिस्त्वं सर्वदाऽस्माकं नान्यदेवारिमर्दन त्वमादिस्त्वमनादिस्त्वमनन्तश्चाक्षयः प्रभुः
अर्थ:
आप ही हमारे सभी गति के कारण हैं। आप अन्य सभी देवताओं को पराजित करने वाले हैं। आप आदि, अनादी, अनंत और अक्षय हैं।
श्लोक 3:
भवन्तं तत्त्वमित्याहुस्तेजोराशिं परात्परम् परमात्मानमित्याहुरस्मिञ्जगति यद्विभो
अर्थ:
आप ही तत्त्व हैं। आप तेजोमय हैं और परात्पर हैं। आप ही इस जगत में परमात्मा हैं।
श्लोक 4:
अणोरल्पतरं पाहुमहतोऽपि महत्तरम् सर्वतःपाणिपादान्तं सर्वतोऽक्षिशिरोमुखम्
अर्थ:
आप अणु से भी छोटे हैं और महान से भी महान हैं। आप सभी ओर से हाथ-पैर वाले हैं और सभी ओर से आँख, कान और मुख वाले हैं।
श्लोक 5:
महादेवमनिर्देश्यं सर्वज्ञं त्वामनामयम् विश्वरूपं विरूपाक्षं सदाशिवमनुत्तमम्
अर्थ:
आप महादेव हैं, जिनका वर्णन नहीं किया जा सकता। आप सर्वज्ञ हैं और अमर हैं। आप विश्वरूप हैं, विरूपाक्ष हैं और सदाशिव हैं।
विष्णुकृतं शिवस्तोत्रं एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत प्रभावी है।
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