मुरलीनाधस्तोत्रम् एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की मुरली के गुणों का वर्णन करता है। यह स्तोत्र 10 श्लोकों में रचित है और इसमें भगवान कृष्ण की मुरली के सौंदर्य, संगीत, और शक्ति का वर्णन किया गया है।
स्तोत्र का प्रारंभ भगवान कृष्ण की मुरली के वर्णन से होता है। स्तोत्र में भगवान कृष्ण की मुरली को कई अन्य नामों से भी संबोधित किया गया है, जैसे कि मुरली, वंशी, और मधुरस्वन।
मुरलीनाधस्तोत्र का पाठ करने से भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मुरलीनाधस्तोत्र के 10 श्लोक इस प्रकार हैं:
Muralinadharastotram
1. मुरलीनाध नमस्ते तव मुरली सुन्दरम्
हे मुरलीनाध! आपकी मुरली बहुत ही सुंदर है।
2. वंशी मधुरस्वनं तव कान्ति मधुरम्
आपकी वंशी का संगीत बहुत ही मधुर है, और आपकी कांति भी बहुत ही मधुर है।
3. श्यामसुन्दर मुखपङ्कजे तव वंशी शोभते
आपके श्यामसुन्दर मुखपङ्कजे आपकी वंशी बहुत ही सुशोभित लगती है।
4. त्रिभुवन मोहन मुरली तव वंशी सुरीली
आपकी वंशी बहुत ही सुरीली है, और यह तीनों लोकों को मोहित करती है।
5. गोपिका वत्सल मुरली तव वंशी प्रियम्
आपकी वंशी गोपिकाओं के लिए बहुत ही प्रिय है।
6. रासक्रीडा विलास मुरली तव वंशी रत्नम्
आपकी वंशी रासक्रीड़ा में एक रत्न है।
7. भक्तजन मनोरंजन मुरली तव वंशी सुखम्
आपकी वंशी भक्तजनों के लिए एक सुख है।
8. त्रिकाल जय मुरली तव वंशी जय जय
आपकी वंशी त्रिकाल में विजयी है।
9. वंशीवादन मधुरस्वनं तव वंशी जय जय
आपकी वंशी का मधुर संगीत बहुत ही सुंदर है।
10. वंशीवादन सुखदाई तव वंशी जय जय
आपकी वंशी का संगीत बहुत ही सुखदायी है।
मुरलीनाधस्तोत्र एक बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र हमें भगवान कृष्ण की मुरली के सौंदर्य, संगीत, और शक्ति का अनुभव कराता है। यह स्तोत्र हमें यह भी सिखाता है कि भगवान कृष्ण की मुरली भक्ति का एक महत्वपूर्ण साधन है।
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