Bhedbhangabhidhanastotram
भेदभंगभिधानस्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव के भैरव रूप की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12 श्लोकों का है और इसे 13वीं शताब्दी के एक महान वैष्णव संत, श्रीनिवासाचार्य ने लिखा था।
स्तोत्र की शुरुआत में, भक्त भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें भैरव की कृपा प्राप्त करने में मदद करें। वे भैरव को समस्त ब्रह्मांड का स्वामी और सभी देवताओं का गुरु कहते हैं।
फिर, भक्त भगवान शिव के भैरव रूप की महिमा का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान शिव के भैरव रूप ही सभी दुखों और कष्टों को दूर करने वाले हैं। वे ही मोक्ष के मार्ग को दिखाने वाले हैं।
स्तोत्र की अंतिम श्लोकों में, भक्त भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें भैरव की कृपा प्रदान करें। वे कहते हैं कि वे भैरव की भक्ति करना चाहते हैं और उनकी कृपा से मोक्ष प्राप्त करना चाहते हैं।
भेदभंगभिधानस्तोत्र एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव के भैरव रूप की कृपा प्राप्त करने के लिए उपयोग की जा सकती है। यह स्तोत्र उन सभी लोगों के लिए उपयोगी है जो अपने जीवन में दुखों और कष्टों से मुक्ति पाना चाहते हैं।
Bhedbhangabhidhanastotram
स्तोत्र का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है:
भेदभंगभिधानस्तोत्र
श्लोक 1
नमस्ते भैरवे महाभैरवे।नमस्ते रुद्ररूपाय नमस्ते।
अर्थ:
हे भैरव, हे महाभैरव, आपको नमस्कार।हे रुद्ररूप, आपको नमस्कार।
श्लोक 2
नमस्ते सर्वभूतनाथाय नमस्ते।नमस्ते त्रिलोकनाथाय नमस्ते।
अर्थ:
हे सर्वभूतनाथ, आपको नमस्कार।हे त्रिलोकनाथ, आपको नमस्कार।
श्लोक 3
नमस्ते सर्वशत्रुहराय नमस्ते।नमस्ते सर्वरोगनाशिने नमस्ते।
अर्थ:
हे सभी शत्रुओं को हराने वाले, आपको नमस्कार।हे सभी रोगों को नष्ट करने वाले, आपको नमस्कार।
श्लोक 4
नमस्ते सर्वपापनाशिने नमस्ते।नमस्ते सर्वविघ्ननाशिने नमस्ते।
अर्थ:
हे सभी पापों को नष्ट करने वाले, आपको नमस्कार।हे सभी विघ्नों को नष्ट करने वाले, आपको नमस्कार।
श्लोक 5
नमस्ते सर्वकष्टनाशिने नमस्ते।नमस्ते सर्वभयनाशिने नमस्ते।
अर्थ:
हे सभी कष्टों को नष्ट करने वाले, आपको नमस्कार।हे सभी भयों को नष्ट करने वाले, आपको नमस्कार।
श्लोक 6
नमस्ते सर्वार्थसिद्धिदायकाय नमस्ते।नमस्ते सर्वशक्तिदायकाय नमस्ते।
अर्थ:
हे सभी प्रकार की सिद्धि देने वाले, आपको नमस्कार।हे सभी शक्तियों को देने वाले, आपको नमस्कार।
श्लोक 7
नमस्ते सर्वकामनापूर्ते नमस्ते।नमस्ते सर्वलोकपालाय नमस्ते।
अर्थ:
हे सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाले, आपको नमस्कार।हे सभी लोकों के पालक, आपको नमस्कार।
श्लोक 8
नमस्ते सर्वदेवतानाथाय नमस्ते।नमस्ते सर्वसुरप्रियाय नमस्ते।
अर्थ:
हे सभी देवताओं के नाथ, आपको नमस्कार।हे सभी सुरों के प्रिय, आपको नमस्कार।
श्लोक 9
नमस्ते सर्वमंगलदायकाय नमस्ते।नमस्ते सर्वविघ्नविनाशकाय नमस्ते।
अर्थ:
**हे सभी
KARMASU