Brahmadidevaiha kritam shivastotram
ब्रह्मादिभि कृतं शिवस्तोत्रं एक प्रसिद्ध शिव स्तोत्र है। यह स्तोत्र ब्रह्मा, विष्णु, और महेश सहित सभी देवताओं द्वारा रचित है। स्तोत्र में शिव की स्तुति की गई है और उन्हें सभी देवताओं का स्वामी कहा गया है।
स्तोत्र का पाठ इस प्रकार है:
ब्रह्मादिभि कृतं शिवस्तोत्रम्
नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं महेश्वर नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं शिवाय
अर्थ:
हे महेश्वर, आपको बार-बार नमस्कार। हे शिव, आपको बार-बार नमस्कार।
**सर्वदेवानां त्वमेव नाथो भवसि सर्वदेवानां त्वमेव नाथो भवसि
अर्थ:
आप सभी देवताओं के स्वामी हैं। आप सभी देवताओं के स्वामी हैं।
**त्रिगुणात्मको भवतां परमेश्वर त्रिगुणात्मको भवतां परमेश्वर
अर्थ:
आप तीन गुणों के स्वामी हैं, हे परमेश्वर। आप तीन गुणों के स्वामी हैं, हे परमेश्वर।
**ब्रह्मा विष्णु महेश्वराश्च ब्रह्मा विष्णु महेश्वराश्च
अर्थ:
ब्रह्मा, विष्णु, और महेश भी आपकी स्तुति करते हैं। ब्रह्मा, विष्णु, और महेश भी आपकी स्तुति करते हैं।
**नमस्ते रुद्राय नमस्ते शर्वाय नमस्ते भैरवाय नमस्ते पशुपति
Brahmadidevaiha kritam shivastotram
अर्थ:
हे रुद्र, आपको नमस्कार। हे शर्व, आपको नमस्कार। हे भैरव, आपको नमस्कार। हे पशुपति, आपको नमस्कार।
**नमस्ते त्रिनेत्राय नमस्ते शूलपाणये नमस्ते खड्गहस्ताय नमस्ते गदापाणये
अर्थ:
हे तीन नेत्रों वाले, आपको नमस्कार। हे त्रिशूल धारी, आपको नमस्कार। हे खड्ग धारी, आपको नमस्कार। हे गदा धारी, आपको नमस्कार।
**नमस्ते वरदाय नमस्ते फलदाय नमस्ते मोक्षदाय नमस्ते शिवाय
अर्थ:
हे वर देने वाले, आपको नमस्कार। हे फल देने वाले, आपको नमस्कार। हे मोक्ष देने वाले, आपको नमस्कार। हे शिव, आपको नमस्कार।
यह स्तोत्र शिव भक्तों द्वारा नियमित रूप से पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र शिव की कृपा प्राप्त करने और मोक्ष प्राप्त करने में मदद करता है।
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