Baneshwar or Sansarpaavanakavachan Brahmavaivarta Puranantargatam
बाणेश्वर और संसर्पावानाका वचन ब्रह्मवैवर्त पुराणांतर्गत हैं।
बाणेश्वर एक महान ऋषि थे, जिन्होंने भगवान विष्णु की भक्ति की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वे किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं। बाणेश्वर ने भगवान विष्णु से कहा कि वे एक सांप के रूप में प्रकट हों, ताकि वे सभी जीवों को बचा सकें। भगवान विष्णु ने उनकी बात मान ली और उन्हें संसर्पावानाका नामक एक सांप के रूप में प्रकट हुए।
संसर्पावानाका सांप सभी जीवों की रक्षा करता था। एक बार, जब एक भयंकर अग्नि का प्रकोप हुआ, तो संसर्पावानाका सांप ने अपने शरीर से एक जलप्रपात बनाया और सभी जीवों को बचा लिया।
बाणेश्वर और संसर्पावानाका का वर्णन ब्रह्मवैवर्त पुराण के एकादश स्कंध में मिलता है। इस स्कंध में, भगवान विष्णु के अवतारों का वर्णन किया गया है। बाणेश्वर और संसर्पावानाका को भगवान विष्णु के अवतारों में से एक माना जाता है।
बाणेश्वर और संसर्पावानाका की कथा हमें यह सिखाती है कि हमें सभी जीवों के प्रति दयालु होना चाहिए और उनकी रक्षा करनी चाहिए।
KARMASU