Baanprarthit gaanpatyatvapraptivarannam
बाणप्रार्थित गणपत्यत्वप्राप्ति वर्णनं
श्लोक 1
एक समय, भगवान शिव और पार्वती पार्वती के पिता राजा दक्ष के यज्ञ में उपस्थित हुए थे। दक्ष भगवान शिव को पसंद नहीं करते थे और उन्होंने उन्हें यज्ञ में निम्न स्थान दिया था। इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने दक्ष को शाप दिया।
श्लोक 2
दक्ष के शाप से, दक्ष की सभी संतानों की मृत्यु हो गई। दक्ष की पत्नी प्रजापति कर्दम की पुत्री सती ने भी अपने पिता के अपमान के कारण आत्महत्या कर ली।
श्लोक 3
सती की आत्महत्या से भगवान शिव को बहुत दुख हुआ। उन्होंने सती के शरीर को लेकर तांडव किया। इससे सृष्टि में हाहाकार मच गया।
श्लोक 4
भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को काट दिया। सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े पृथ्वी पर गिरे। जहां-जहां सती के शरीर के टुकड़े गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठों का निर्माण हुआ।
श्लोक 5
Baanprarthit gaanpatyatvapraptivarannam
सती के शरीर के टुकड़ों में से एक टुकड़ा बाण के रूप में गिरा। यह टुकड़ा भगवान शिव को प्राप्त हुआ। भगवान शिव ने इस टुकड़े को अपने कंठ में धारण किया।
श्लोक 6
इस घटना से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने बाण को गणपतित्व प्रदान किया। अर्थात, भगवान शिव ने बाण को गणपति का दर्जा दिया।
श्लोक 7
बाण के गणपतित्व प्राप्त करने के बाद, वह बाणगणपति कहलाए। बाणगणपति एक महत्वपूर्ण देवता हैं। उन्हें सभी प्रकार की बाधाओं और विघ्नों को दूर करने वाला माना जाता है।
कुछ विशेष टिप्पणियां:
- बाणप्रार्थित गणपत्यत्वप्राप्ति वर्णनं एक पौराणिक कथा है जो बाणगणपति की उत्पत्ति का वर्णन करती है।
- यह कथा शिवपुराण में वर्णित है।
- बाणगणपति को सभी प्रकार की बाधाओं और विघ्नों को दूर करने वाला माना जाता है।
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