गोविंदादमोदरस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के अवतार गोविंदादमोदर की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 17वीं शताब्दी के वैष्णव संत और विद्वान विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर द्वारा रचित था।
स्तोत्र के पांच श्लोक हैं, प्रत्येक श्लोक में कृष्ण के एक विशेष पहलू की स्तुति की गई है।
Govindadamodarastotram
गोविन्ददेवाष्टकम् (विश्वनाथचक्रवर्तिन् ठक्कुरविरचितम्) Govindadevashtakam (Vishwanathchakravartin Thakkurvirachitam)
प्रथम श्लोक
श्यामसुंदर गोविंदादमोदर, अविनाशी अनंत अद्वितीय। करुणामय ज्ञानी दयालु, दुष्टों का नाश भक्तों का रक्षक।
द्वितीय श्लोक
अनंत गुणों से युक्त, भक्तों पर कृपा करने वाले। अद्भुत लीलाओं के रचयिता, अनंत लीलाओं के स्वामी।
तृतीय श्लोक
भक्ति ही मोक्ष का मार्ग, कृष्ण की भक्ति अद्वितीय। कृष्ण की भक्ति से मिलता है, मोक्ष का सुख अविनाशी।
चतुर्थ श्लोक
कृष्ण के भक्तों पर कृपा, कृष्ण की भक्ति से होता है। कृष्ण के भक्तों को मिलता है, सर्व सुखों का समुदाय।
पंचम श्लोक
कृष्ण के भक्तों का रक्षक, कृष्ण के भक्तों का आश्रय। कृष्ण के भक्तों पर कृपा, कृष्ण के भक्तों को मिलती है।
अंतिम श्लोक
वंदे गोविंदादमोदरं, कृष्णाय नमस्कारं। कृष्ण के रूप की वंदना, कृष्ण को नमस्कार।
हिंदी अनुवाद
प्रथम श्लोक
हे श्यामसुंदर गोविंदादमोदर, तुम अविनाशी, अनंत और अद्वितीय हो। तुम करुणामय, ज्ञानी और दयालु हो, और तुम दुष्टों का नाश करने वाले और भक्तों के रक्षक हो।
द्वितीय श्लोक
तुम अनंत गुणों से युक्त हो, और तुम अपने भक्तों पर कृपा करते हो। तुम अद्भुत लीलाओं के रचयिता हो, और तुम अनंत लीलाओं के स्वामी हो।
तृतीय श्लोक
भक्ति ही मोक्ष का मार्ग है, और तुम्हारी भक्ति अद्वितीय है। तुम्हारी भक्ति से मोक्ष का सुख मिलता है, जो अविनाशी है।
चतुर्थ श्लोक
तुम्हारी भक्ति से तुम्हारे भक्तों पर कृपा होती है, और उन्हें सभी सुखों की प्राप्ति होती है। तुम अपने भक्तों के रक्षक और आश्रय हो, और तुम अपने भक्तों पर कृपा करते हो।
पंचम श्लोक
हे गोविंदादमोदर, हम तुम्हारी वंदना करते हैं। हे कृष्ण, हम तुम्हें नमस्कार करते हैं।
गोविंदादमोदरस्तोत्र एक लोकप्रिय स्तोत्र है जो अक्सर कृष्ण भक्तों द्वारा पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र कृष्ण के प्रति भक्ति और समर्पण की भावना को व्यक्त करता है।
स्तोत्र के कुछ महत्वपूर्ण पहलू
- स्तोत्र कृष्ण के रूप, गुणों और लीलाओं की स्तुति करता है।
- स्तोत्र कृष्ण की भक्ति के महत्व पर भी जोर देता है।
- स्तोत्र कृष्ण के भक्तों के लिए कृष्ण की कृपा की गारंटी देता है।
स्तोत्र का महत्व
गोविंदादमोदरस्तोत्र एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो कृष्ण भक्तों को आध्यात्मिक प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ा सकता है। यह स्तोत्र कृष्ण की भक्ति के महत्व पर जोर देता है, और यह कृष्ण के भक्तों को उनकी कृपा पाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
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