हनुमदष्टकम् Hanumadashtakam

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Published October 3, 2023
Updated October 3, 2023

हनुमदष्टक एक संस्कृत स्तोत्र है जो हनुमान जी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है, जो रामायण के लेखक भी हैं।

स्तोत्र का अर्थ इस प्रकार है:

हे हनुमान, आप भगवान राम के परम भक्त हैं। आप भगवान राम की भक्ति में लीन हैं। आप भगवान राम के कार्यों में हमेशा तत्पर रहते हैं। आप भगवान राम के भक्तों के लिए आदर्श हैं।

आपने भगवान राम के लिए अपनी जान तक की बाजी लगा दी थी। आपने भगवान राम की सेवा में अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया था। आप भगवान राम के सबसे वफादार भक्त हैं।

मैं आपके चरणों में अपना सिर रखता हूं और आपसे प्रार्थना करता हूं कि आप मुझे आपकी कृपा प्रदान करें। आप मुझे सभी बाधाओं से दूर रखें और मुझे भगवान राम की भक्ति प्राप्त करने में मदद करें।

हे हनुमान, आप मेरे लिए आदर्श हैं। मैं आपकी तरह भगवान राम का भक्त बनना चाहता हूं। कृपया मुझे आपकी कृपा प्रदान करें।

स्तोत्र का पाठ इस प्रकार है:

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुं लोक उजागर।

राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवनसुत नामा।

महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी।

कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुण्डल कुंडल मेघासा।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै, काँधे मूँज जनेऊ साजै।

शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जगवंदन।

विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया।

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा, विकट रूप धरि लंक लंका जावा।

भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचंद्र के काज संवारे।

लाय सजीवन लखन जियाए, श्रीरघुवीर हरषि उर लाए।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।

सनकादिक ब्रह्मादिक मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा।

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राजपद दीन्हा।

तुम बिना नहिं कवन सुभाय, राम लखन सीता सहित जाय।

अबकी अवतार तुम कबहूँ, मोहि दिखाई दर्शन देहूँ।

पूर्ण करो दीनबंधु हमारी, जो इच्छा मन में होय तुम्हारी।

स्तोत्र का अनुवाद इस प्रकार है:

हे हनुमान, आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं। आप तीनों लोकों में प्रकाशमान हैं।

आप भगवान राम के दूत हैं। आपके पास अद्भुत बल है। आप अंजनी के पुत्र हैं और पवनसुत नाम से प्रसिद्ध हैं।

आप महावीर हैं। आपमें अद्भुत शक्ति है। आप बुद्धिमानों को दूर करते हैं और बुद्धिमानों के साथ रहते हैं।

आपका शरीर सोने की तरह चमकता है। आपके कानों में कुंडल हैं और सिर पर मेघ जैसा मुकुट है।

आपके हाथ में वज्र है और ध्वज लहरा रहा है। आपके कंधे पर मूँज की जनेऊ है।

आप शंकर के पुत्र हैं। आपके पिता केसरी हैं। आपके तेज से पूरा जगत प्रकाशमान हो जाता है।

**आप विद्वान हैं। आप

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