श्रीसितलक्ष्मीस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान विष्णु की पत्नी, देवी लक्ष्मी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण प्रथा है।
स्तोत्र के अनुसार, देवी लक्ष्मी श्रीयंत्र में वास करती हैं। श्रीयंत्र एक आध्यात्मिक प्रतीक है जो समृद्धि और सौभाग्य का प्रतिनिधित्व करता है।
स्तोत्र में, देवी लक्ष्मी को विभिन्न नामों से संबोधित किया जाता है, जो उनकी विभिन्न शक्तियों और गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उदाहरण के लिए, उन्हें "श्रीयंत्रवासिनी" कहा जाता है, जो श्रीयंत्र में वास करने वाली हैं। उन्हें "सौभाग्यदायिनी" कहा जाता है, जो सौभाग्य देने वाली हैं। और उन्हें "धनलक्ष्मी" कहा जाता है, जो धन की देवी हैं।
श्रीसितलक्ष्मीस्तोत्रम् एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए की जा सकती है। यह स्तोत्र धन, समृद्धि, सौभाग्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए फायदेमंद है।
स्तोत्र का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है:
श्रीसितलक्ष्मीस्तोत्रम्
अथ श्रीसितलक्ष्मीस्तोत्रम्
श्रीकृष्ण उवाच
श्रीयंत्रवासिनी देवी, सौभाग्यदायिनी।
सर्वपापनाशिनी, धनलक्ष्मी नमोऽस्तु ते।
अर्थ:
हे श्रीयंत्र में वास करने वाली देवी, हे सौभाग्य देने वाली देवी, हे सभी पापों को नष्ट करने वाली देवी, हे धनलक्ष्मी, आपको मेरा प्रणाम है।
अम्बिका देवी, सर्वदेवमयी,
सर्वसुखदायिनी, नमोऽस्तु ते।
अर्थ:
हे देवी अम्बिका, हे सभी देवताओं की अधिष्ठात्री देवी, हे सभी सुखों को देने वाली देवी, आपको मेरा प्रणाम है।
सर्वशक्तिस्वरूपिणी, सर्वकामप्रदायिनी।
सर्वविघ्ननाशिनी, नमोऽस्तु ते।
अर्थ:
हे सर्वशक्तिस्वरूपिणी देवी, हे सभी कामनाओं को देने वाली देवी, हे सभी विघ्नों को दूर करने वाली देवी, आपको मेरा प्रणाम है।
इति श्रीसितलक्ष्मीस्तोत्रम् समाप्तम्।
स्तोत्र का पाठ करने की विधि:
इस स्तोत्र का पाठ करने के लिए, सबसे पहले एक साफ और शांत स्थान चुनें। फिर, एक आसन पर बैठें और अपने सामने श्रीयंत्र की प्रतिमा या चित्र रखें। अब, हाथ में एक माला लें और स्तोत्र का पाठ शुरू करें। स्तोत्र का पाठ करते समय, देवी लक्ष्मी के प्रति पूर्ण श्रद्धा और भक्ति रखें।
स्तोत्र का पाठ करने का सबसे अच्छा समय शुक्रवार है। आप इसे किसी भी समय कर सकते हैं, लेकिन सुबह जल्दी या शाम को सूर्यास्त के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है।
स्तोत्र का पाठ करने से पहले, स्नान करके स्वच्छ हो जाएं। फिर, साफ कपड़े पहनें और एक पवित्र स्थान पर जाएं। वहां, एक आसन पर बैठें और अपने सामने श्रीयंत्र की प्रतिमा या चित्र रखें। अब, अपने हाथों में एक माला लें और स्तोत्र का पाठ शुरू करें। स्तोत्र का पाठ करते समय, देवी लक्ष्मी के प्रति पूर्ण श्रद्धा और भक्ति रखें।
स्तोत्र का पाठ करने के बाद, श्रीयंत्र की प्रतिमा या चित्र को प्रसाद अर्पित करें। आप फूल, धूप, दीप, फल और मिठाई आदि अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद, श्रीयंत्र की आरती करें।
स्तोत्र का पाठ करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र धन, समृद्धि, सौभाग्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए फायदेमंद है।
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